मनुष्यता की पुकार सुनो...
लक्ष्मी शंकर वाजपेयी
अमरीकी कवि (मूल देश सर्बिया) चार्ल्स सिमिक की एक कविता याद आ रही है—
लाखों मारे गए!
जबकि हर कोई निर्दोष था
मैं अपने कमरे तक महदूद था ...और आगे
प्रबंध-संपादकीय
ऑडियोबुक्स : पुस्तक पढ़ने की बदलती संस्कृति
पीयूष कुमार
अमरीका और यूरोप में ऑडियाेबुक्स का इतिहास तकनीकी विकास और बदलती जीवन-शैली के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। इसकी शुरुआत १९३० के दशक में मानी जाती है, जब नेत्रहीन और प्रिंट पढ़ने में असमर्थ लोगों के लिए ‘टॉकिंग बुक’ परियोजना शुरू हुई। ...और आगे
प्रतिस्मृति
निचले फ्लैट में
नरेंद्र कोहली
वह अँधेरे में आँखें फाड़े एकटक छत को घूर रही थी। वस्तुतः वह आँखों से काम नहीं ले रही थी। वे तो ऐसे ही खुली थीं। उसकी सारी ऐंद्रिय शक्तियाँ उसके कानों में सिमट आई थीं। ...और आगे
रम्य रचना
मुरली मठ
अजयेंद्रनाथ त्रिवेदी
सुप्रसिद्ध लेखक। हिंदी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं, जर्नलों में संवाद, शोध-आलेख प्रकाशित। संप्रति मुख्य प्रवंधक (राजभाषा), युको बैंक। ...और आगे
कहानी
पुत्रमोह
दिनेश प्रसाद सकलानी
वर्तमान में राष्ट्रीय शैक्षिक अनुंधान और प्रशिक्षण परिषद् के निदेशक। विभिन्न विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय संगोष्ठियों एवं सम्मेलनों में १०० से अधिक व्याख्यान। ...और आगे
लघुकथा
मोबाइल और पुस्तक
पुष्पा खरे
पुस्तक बहुत दिनों से मोबाइल से वार्त्तालाप करना चाह रही थी, पर कभी पास रहने का मौका ही नहीं मिल रहा था, लेकिन आज घर पर लेेखक आए थेे, उन्होंने अपनी पुस्तक मोबाइल के पास अलमारी में रख दी। ...और आगे
होली की आध्यात्मिकता
विवेक रंजन श्रीवास्तव
वरिष्ठ व्यंग्यकार निबंध, नाटक लेखक, समीक्षक, ई अभिव्यक्ति पोर्टल के संपादक। २३ से अधिक पुस्तकें प्रकाशित। चर्चित हिंदी ब्लाॅगर। फिलहाल अमेरिका प्रवास पर। ...और आगे
कविता
तीन कविताएँ
रितुप्रिया शर्मा
अठखेली करती हैं तितली, रंग-बिरंगी फूलों की क्यारी,
लाल-गुलाबी, नीले-पीले, फूलों के ये रंग निरालेे। ...और आगे
होली : अपनी पहचान पाने का पर्व
नर्मदा प्रसाद उपाध्याय
मध्यभारत की भित्तिचित्र परंपरा पर विशद कार्य, मालवा तथा बुंदेलखंड के अंचलों के भित्तिचित्रों पर कोशस्तरीय कार्य। उनकी छह संपादित, तीन अनूदित, ...और आगे
बाल-संसार
आप यही मुझे दे दें
शकुंतला कालरा
जानी-मानी लेखिका। अब तक सृजन-आलोचना की ५८ पुस्तकें प्रकाशित। बाल एवं किशोर साहित्य पुरस्कार एवं सम्मान, हिंदी अकादमी, ‘बालसाहित्य भारती सम्मान’ ...और आगे
यात्रा-वृत्तांत
मोक्षदायिनी नगरी कांचीपुरम
लोकेंद्र सिंह
जाने-माने लेखक। अब तक १४ पुस्तकें प्रकाशित, जिनमें ‘हिंदवी स्वराज्य दर्शन’, ‘मैं भारत हूँ’, ‘डॉ. अंबेडकर : विचार और पत्रकारिता’ एवं ‘हम असहिष्णु लोग’ प्रमुख हैं। ...और आगे
साहित्य का भारतीय परिपार्श्व
(बांग्ला कहानी) वर्षा के बाद
मूल : बिस्तता घोषाल
अनुवाद : पूर्णिमा मित्रा
सुपरिचित लेखिका। अब तक हिंदी में बदलते रिश्ते (कहानी-संग्रह), प्रतिबिंब (लघुकथा-संग्रह)और राजस्थानी में तिस (लघुकथा-संग्रह), ...और आगे
साहित्य का विश्व परिपार्श्व
(अमरीकन कहानी) एक न एक दिन
मूल : गैब्रिएल गार्सिया
अनुवाद : सुशांत सुप्रिय
सुपरिचित लेखक। हिंदी के प्रतिष्ठित कथाकार, कवि तथा साहित्यिक अनुवादक। सात कथा-संग्रह, तीन काव्य-संग्रह तथा विश्व की अनूदित कहानियों के छह संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं। ...और आगे
खामोश घर
रमेश कुमार सोनी
सुपरिचित रचनाकार। राज्यपाल पुरस्कृत व्याख्याता एवं साहित्यकार। अब तक हाइकु, ताँका, सेदोका विधा की पाँच पुस्तकें प्रकाशित। पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ निरंतर प्रकाशित। ...और आगे