रहस्यमयी पुस्तक चोर

रहस्यमयी पुस्तक चोर

बाल-संसार
''अरे, मेरी गणित की किताब कहाँ गई?'' यशवी अपनी किताब को मेज पर न पाकर चीखते हुए बोली।...और आगे

ककड़ी प्रदेश में शिशु-जन्म

साहित्य का विश्व परिपार्श्व
ककड़ी प्रदेश में एक मुसीबत आ खड़ी हुई। ककड़ी प्रदेश आर्कटिक सागर में स्थित एक दूरवर्ती सुनसान उपद्वीप है। इस उपद्वीप की खोज कुछ ही दिनों पूर्व हुई है।...और आगे

डाकमुंशी

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व
सरकारी नौकरी में बहाल होने के दिन से हरिसिंह मुफस्सल (नगरेतर) के छोटे-बड़े अनेक पोस्ट-ऑफिसों में काम कर चुके हैं।...और आगे
आनंद का उद्गम अमरकंटक

आनंद का उद्गम अमरकंटक

यात्रा-वृत्तांत
'ऊधौ! मन नाही दस-बीस। एक हुतो सो गयौ श्याम संग को आराधे ईश।' ...और आगे
न्याय की आस लिये एक लोकनृत्य नाग-सैला

न्याय की आस लिये एक लोकनृत्य नाग-सैला

रिपोर्ताज
लोक संस्कृति, लोकजीवन, लोकनृत्य, लोक साहित्य, ये सभी हमारे मस्तिष्क में आदिकाल के निवासियों की ऐसी छवि अंकित करते हैं,...और आगे
लोककंठ से निकली बरखा की फुहार

लोककंठ से निकली बरखा की फुहार

लोक-साहित्य
काले-कजरारे बादलों को देखते ही मन-मयूर नाच उठता है।...और आगे
श्री घोड़ीवाला का चुनाव अभियान

श्री घोड़ीवाला का चुनाव अभियान

व्यंग्य
श्री घोड़ीवाला का विधायक का चुनाव हारने का घाव अभी पूरी तरह भरा भी नहीं था...और आगे
पावस और सर्जन

पावस और सर्जन

ललित निबंध
भारतवर्ष पृथ्वी की गोद में बसा हुआ ऐसा देश है, जिस पर प्रकृति की ममता अन्य देशों की अपेक्षा सर्वाधिक बरसती है।...और आगे

दादा की भीनी-भीनी यादें

स्‍मरण्‍ा
दादा चले गए, ऐसे तो कभी नहीं जाते थे!...और आगे
दाढ़ी, बुद्धिजीवी और बादल

दाढ़ी, बुद्धिजीवी और बादल

राम झरोखे बैठ के
हमें भी हाल में बुद्धिजीवी बनने और दिखने का शौक चर्राया है। कुछ अक्ल के जीव साधु संतों सी दाढ़ी पाल लेते हैं।...और आगे

कौन है दोस्त, कौन है दुश्मन

कविता
इन हवाओं को क्या हो गया, इन फिजाओं को क्या हो गया? ...और आगे

स्वच्छता अभियान

लघुकथा
मार्च का महीना था। बसंत ऋतु में पतझड़ होता है। मैं सुबह घूमने जा रहा था। ...और आगे
नींद भर सोए

नींद भर सोए

कहानी
''मैनेजर साहब! नमस्ते!'' ''नमस्ते भाई, नमस्ते, बोलो क्या कहना है?''...और आगे
एक महीना ऐसा भी...

एक महीना ऐसा भी...

आलेख
समय की, संवत्सर वर्ष की, सौर और चाँद गणनाद पद्धति में समानता लाने के लिए किसी महीने में दो तिथियों के एक, जैसे कभी चौथ-पंचमी, कभी एकादशी-द्वादशी एक हो जाती हैं,...और आगे
प्रिया

प्रिया

प्रतिस्मृति
बेलमार के लंबे और विस्तृत समुद्र तट के पूर्वी और उत्तरी प्रांतों में, गोरे धनपतियों के आलीशान बँगले एक छोर से दूरे छोर तक फैले हुए थे।...और आगे

कांग्रेस में असुरक्षा की भावना क्यों?

संपादकीय
कांग्रेस खुद को कितना असुरक्षित महसूस करती है, इसका हास्यास्पद उदाहरण पिछले दिनों देखने को मिला।...और आगे