मेरी कच्छ यात्रा

मेरी कच्छ यात्रा

यात्रा-वृत्तांत
जब भी कभी टी.वी. पर अमिताभ बच्चन को गुजरात टूरिज्म की ओर से बोलते देखता 'कच्छ नहीं देखा तो कुछ नहीं देखा'...और आगे
धूप की उष्मित छुवन से...

धूप की उष्मित छुवन से...

कविता
मेरे दिल में तेरा ही नाम है, शुभ अक्षरों में खुदा हुआ, फिर क्या पता किस हेतु तू चुपचाप मुझसे जुदा हुआ।...और आगे
धूल उड़ाती आती गरमी

धूल उड़ाती आती गरमी

बाल-संसार
गुस्सा खूब दिखाती गरमी, लूएँ भी बरसाती गरमी। आँधी, तूफानों को लेकर, जब-जब भी यह आती गरमी। ...और आगे
मणिपुर का लोकसाहित्य

मणिपुर का लोकसाहित्य

लोक-साहित्य
भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र बांग्लादेश, भूटान, चीन, म्याँमार और तिब्बत-पाँच देशों की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर अवस्थित है।...और आगे
छुँयाल

छुँयाल

व्यंग्य
यदि ब्रह्मापुत्र नारदजी नर न होकर नारी होते तो निश्चित रूप से वे हमारे पहाड़ के किसी गाँव की छुँयाल ही होते।...और आगे
हमारे हिस्से की छत

हमारे हिस्से की छत

उपन्यास अंश
छह महीने होने को आए और राजधानी स्थित कार्यालय से प्रभाकरजी की लेखा स्लिप सुधरकर नहीं आई। ...और आगे

देव, दवे को अभी नहीं बुलाना था

स्‍मरण्‍ा
अनिल माधव दवे देव के पास चले गए। अभी नहीं जाना था। जाना तो सबको है...और आगे
लाल बत्ती की विदाई

लाल बत्ती की विदाई

राम झरोखे बैठ के
उनके कान में मच्छर भिनभिना रहा है। वह एक-दो बार हाथ को कान के पास ले जाकर उसे मुट्ठी से पकड़ने का असफल प्रयास कर चुके हैं...और आगे

शिवाजी व सुराज

पुस्तक-अंश
आधारभूत मानचित्र (Blue Print) की तरह देखना होगा।...और आगे

वही लड़की

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व
हीराखंड एक्सप्रेस दक्षिण-पश्चिम दिशा की ओर दौड़ रही थी।...और आगे

बूढ़ा बावरची

साहित्य का विश्व परिपार्श्व
सन् १७८६ की जाडे़ की शाम थी। काउंटेस तून का भूतपूर्व अंधा बावरची वियना की सीमा पर एक छोटे से लकड़ी के घर में जिंदगी की अंतिम घडि़याँ गिन रहा था।...और आगे
पंचायत का फैसला

पंचायत का फैसला

कहानी
मैंने पूछा, "पिताजी, आप उदास क्यों हैं?" थोड़ी देर तो उन्होंने आनाकानी की, परंतु फिर बताना पड़ा। ...और आगे

विष्णु प्रभाकर : खुले मन के बडे़ लेखक

आलेख
विष्णु प्रभाकर की जीवन-कथा सहज कदमों से बढ़ते हुए एक संवेदनशील मनुष्य की गुमनाम घाटियों से उच्च शिखर तक पहुँचने की अचरज भरी कहानी है।...और आगे

अनोखी माँग

लघुकथा
"बाबूजी, आपने मेरा काम करवाया है, कोई सेवा बताएँ?" ...और आगे

क्या उसकी मृत्यु हो गई

प्रतिस्मृति
अब्दुल करीम, जो कि बचपन से ही पूर्वी अफ्रीका में नैरोबी में रहता था...और आगे

लालबत्ती की हवश और खुमार

संपादकीय
एक मई से तथाकथित वी.आई.पी. की गाडि़यों से लालबत्ती उतर गई है,...और आगे