रूप-रचना पर आधारित हिंदी क्रियाओं का सम्यक् विधान

रूप-रचना पर आधारित हिंदी क्रियाओं का सम्यक् विधान

भाषा-प्रयोग
आज से कोई सौ वर्ष पहले वैयाकरण पं. कामता प्रसाद गुरु ने अपने हिंदी व्याकरण में हिंदी क्रियाओं के शिष्ट रूपों और प्रयोगों का विवेचन-विश्लेषण करने के लिए अंग्रेजी व्याकरण की काल-पद्धति अपनाई थी।...और आगे
जगह

जगह

बाल-कहानी
निखिल वॉशरूम से बड़ी तेजी के साथ अपनी क्लास की ओर जा रहा था। भूख के मारे उसके पेट में चूहे कूद रहे थे।...और आगे
निमाड़ मालवा अंचल की माँड़ना लोककला

निमाड़ मालवा अंचल की माँड़ना लोककला

लोक-साहित्य
निमाड़ अंचल में माँड़ना कला लेखन, स्वागत, भक्ति, स्वच्छता व प्रसन्नता की प्रतीक मानी जाती है।...और आगे
अथश्री जूनागढ़-डाकोर तीर्थयात्रा कथा

अथश्री जूनागढ़-डाकोर तीर्थयात्रा कथा

यात्रा-संस्मरण
'तरति पापादिकं यस्मात्' यानी जिसके द्वारा मनुष्य पापादि से तर (मुक्त) जाए, उसे 'तीर्थ' कहते हैं।...और आगे

नंगा राजा

साहित्य का विश्व परिपार्श्व
बहुत समय पहले की बात है। एक राजा के पास तीन पाखंडी आए। पेशे से वे जुलाहे थे।...और आगे
एक डॉक्टर की कथा

एक डॉक्टर की कथा

व्यंग्य
डॉक्टर साहब साहब बाद में हुए, पहले उनका नाम अमर कुमार था।...और आगे

ध्वन्यार्थ

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व
ज्वाला प्रसाद रोज सुबह उठकर तुरंत एक ही साँस में भारी आवाज में 'इस तन-धन की कौन बड़ाई...'...और आगे
भ्रष्टाचार के किले की प्रेरक कथा

भ्रष्टाचार के किले की प्रेरक कथा

राम झरोखे बैठ के
कुछ मानते हैं, कुछ नहीं मानते हैं। हर काम-धंधे का मंत्रालय एक अभेद्य किले के समान है। ...और आगे

शेष कितने दिन

कविता
आज फिर से लौट आए वे विगत के दिन पर तभी मन पूछ बैठा शेष कितने दिन। ...और आगे

मोबाइल की आत्मकथा

लघुकथा
मैं एक मोबाइल आज आप सभी के सामने अपनी आत्मकथा सुनाना चाहता हूँ। ...और आगे
अपना ईश्वर

अपना ईश्वर

कहानी
जाड़े की ठंडी रात। पूरा गाँव अँधेरे में डूब चुका था। बीच-बीच में दूर से कुत्तों के भौंकने का स्वर सुनाई दे जाता था।...और आगे
पर्यावरण संरक्षण एवं विकास, दोनों जरूरी

पर्यावरण संरक्षण एवं विकास, दोनों जरूरी

आलेख
अनादिकाल से देश में पर्यावरण की चेतना से पंचमहाभूत (यानी आकाश, वायु, अग्नि, जल एवं पृथ्वी) को साधने का प्रयास किया गया।...और आगे

लाल पान की बेगम

प्रतिस्मृति
''क्या बिरजू की माँ, नाच देखने नहीं जाएगी क्या?''...और आगे

मोदी सरकार के तीन साल, विपक्ष में बेचैनी क्यों?

संपादकीय
मई में मोदी सरकार के तीन साल पूरे होने का लेखा-जोखा पिछले एक माह से चर्चा का विषय है।...और आगे