बताओ तो जानें

बताओ तो जानें

बाल-संसार
कागज की उसकी है काया होता है उसमें संदेश, बिना पंख के वह जाता है चाहे हो वह देश-विदेश। ...और आगे
द्वारका-सोमनाथ दर्शन

द्वारका-सोमनाथ दर्शन

यात्रा-वृत्तांत
मैं और मेरी पत्नी वसुधा दक्षिण में रामेश्वरम् व पूरब में जगन्नाथ पुरी धामों के दर्शन कर चुके थे।...और आगे
मैं तीसरे गाँव का आदमी हूँ

मैं तीसरे गाँव का आदमी हूँ

ललित निबंध
जेठ-बैसाख की नीम दुपहरिया में मेरा गाँव गपिया रहा है। ...और आगे

जीवन-झरना

साहित्य का विश्व परिपार्श्व
बीमार ऊँट चालक को झरने के किनारे छोड़कर काफिला चलता रहा।...और आगे
हुक्मरान की भैंस

हुक्मरान की भैंस

व्यंग्य
थाना बारात घर सा सजा हुआ था। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व
सात साल बाद एक दिन प्रयास भैया का फोन आया कि वे आ रहे हैं, ...और आगे
अपने-अपने अवसाद

अपने-अपने अवसाद

राम झरोखे बैठ के
आतंक, अवसर, अवसाद का कोई भरोसा नहीं है कि कब किस पर आ टपके। ...और आगे
शेरजंग गर्ग : अपनी किस्म के एक अदद व्यंग्य-गुरु

शेरजंग गर्ग : अपनी किस्म के एक अदद व्यंग्य-गुरु

स्‍मरण
डॉ. शेरजंग गर्ग यानी सदा मुसकराता एक नूरानी चेहरा,...और आगे
मातृ-दिवस (१४-५-२०१७)

मातृ-दिवस (१४-५-२०१७)

डायरी-अंश
माँ की याद तो आती ही रहती है। मेरे लिए तो हर दिवस मातृ-दिवस होता है। वह तो न जाने कितने रूपों में मुझमें समाई हुई है। ...और आगे
भावी पीढ़ी के लिए

भावी पीढ़ी के लिए

कविता
संघर्ष का नाम ही है जीवन मनुष्य यह क्यों भूल जाता है कि वह ...और आगे
मौलिकता : भारतीय और भारतेतर आचार्यों की दृष्टि

मौलिकता : भारतीय और भारतेतर आचार्यों की दृष्टि

आलेख
संपादकीय कार्यालय अपने पत्र पत्रिकाओं में प्रकाशनार्थ हमेशा ही 'मौलिक' रचना की माँग करते हैं। लेकिन 'मौलिक' सृजन से उनका तात्पर्य क्या है, इसे वे कितने व्यापक अथवा सीमित अर्थ में जानते हैं, यह एक बड़ा सवाल है। ...और आगे

दिखावा

लघुकथा
सेठ चिमनलाल चिल्ला-चिल्लाकर लोगों को पहाड़वाले मंदिर पर चलने के लिए कह रहा था...और आगे
बोनस में आशीर्वाद

बोनस में आशीर्वाद

कहानी
"बिन्नी की शादी हो रही है।" मैंने बुरा सा मुँह बनाकर कहा। "कौन बिन्नी?" इन्होंने पूछा। ...और आगे
चेतना

चेतना

प्रतिस्मृति
लॉटरी का भारी इनाम मिलने पर ब्रजलाल न तो मारे खुशी के पागल हो गया और न बहुत साधारण आय के बाद एकदम लखपति हो जाने के कारण उसने दोनों हाथ रुपया फूँकना ही आरंभ किया। ...और आगे

लोकतंत्र का भविष्य एवं लोकसभा के चुनाव

संपादकीय
देश इस समय २०१९ के लोकसभा के चुनावों की गरमी में तप रहा था। पड़ोसियों के ही नहीं, सारे विश्व की आँखें भारत में आम चुनाव के नतीजों की ओर लगी थीं। ...और आगे