पॉलीथिन और गौ-हत्या

पॉलीथिन और गौ-हत्या

बाल-संसार
एक दिन मैं अपनी छोटी बच्ची के साथ देवीजी के मंदिर में दर्शन करने गया, तो वहाँ पर मंदिर के बाहर प्रसाद व अगरबत्ती के खाली पैकिट और पॉलीथिन यहाँ-वहाँ फैली पड़ी थीं। ...और आगे
दिल्ली से हेग

दिल्ली से हेग

यात्रा-संस्मरण
फरवरी शुरू ही हुई थी कि मैंने यूरोप जाने की योजना बना ली। अहमकाना हरकत थी, लेकिन इसके पीछे भी एक कहानी थी। ...और आगे

किस्सा नीलकंठ

साहित्य का विश्व परिपार्श्व
यह सच है कि जानवर आपस में बातें करते हैं। इसमें किसी तरह का कोई संदेह नहीं हो सकता; लेकिन मैं सोचता हूँ कि बहुत कम लोग ही ऐसे हैं, जो उनकी बातें समझ सकते हैं।...और आगे
काहे प्रिंसिपल माथुर भए त्यागी

काहे प्रिंसिपल माथुर भए त्यागी

व्यंग्य
प्रिंसिपल माथुर ने अचानक त्याग-पत्र दे दिया, यह बात कॉलेज परिसर में उसी दिन और विश्वविद्यालय में रातोरात फैल गई।...और आगे

दक्षिण अफ्रीका का दामाद

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व
'अंबुलु, ओ अंबुलु, सुनते हो!' ऊँची आवाज में पुकारते हुए घर के अंदर प्रवेश करते हुए रामभद्र को चकित नजरों से देखते हुए विशालम ने पूछा।...और आगे
एक दिन : एक जीवन

एक दिन : एक जीवन

संस्मरण
चर्चित लेखक, संपादक, विख्यात निर्माता-निदेशक, केवल १२ वर्ष की वय में पितृविहीन हो चले 'यायावर'।...और आगे
नए भारत का निर्माण और हम

नए भारत का निर्माण और हम

राम झरोखे बैठ के
बड़े बाबू जानते हैं कि मच्छर-मक्खी से हमारा आशय क्या है? यह प्रतीक भर है, उन चोट्टे चरित्रों का, जो अपने कर्तव्य का अंत केवल दूसरों के विरुद्ध बड़े बाबू के कान भरने में समझते हैं। ...और आगे
पत्ता टूटा डाल से

पत्ता टूटा डाल से

ललित निबंध
पतझर आने पर वृक्षों में लगे पीले पत्ते धरती पर गिरने लगते हैं। पत्तों की नियति यही है, कोंपलें फूटती हैं, हरे पत्तों में परिवर्तित होती हैं और फिर पीले पत्ते के रूप में झर जाती हैं मनुष्य की तरह। ...और आगे
बादल की ओट से

बादल की ओट से

कविता
रुक जाता यम देवता के सम्मुख गुनगुनाई जा रही कोई ऋचा तुम्हारे लिए, ...और आगे

माँ का दिल

लघुकथा
"किससे बातें हो रही थीं?" "माँ का फोन था।" "क्यों बोल रही थीं?" ...और आगे
ऊर्जा बचाएँ और ऊर्जस्वी बनें

ऊर्जा बचाएँ और ऊर्जस्वी बनें

आलेख
जिस प्रकार बिना जल, वायु और भोजन के कोई भी प्राणी जीवित नहीं रह सकता, उसी प्रकार बिना ऊर्जा के न तो वह गतिमान हो सकता है और न ही उसकी चैतन्यता विद्यमान रह सकती है। ...और आगे
आँसुओं की त्रिधारा

आँसुओं की त्रिधारा

कहानी
आँसू अधिकतर अपार दुःख, असीम कष्ट और गहरी वेदना के प्रतीक होते हैं, कभी-कभी हर्षाश्रु भी होते हैं-काल, परिस्थिति, पात्र और चोट की गंभीरता के अनुसार अश्रु का स्वरूप भी बदलता रहता है। ...और आगे
पूस की रात

पूस की रात

प्रतिस्मृति
मुन्नी झाड़ू लगा रही थी। पीछे फिरकर बोली, "तीन ही रुपए हैं, दे दोगे तो कंबल कहॉँ से आवेगा? माघ-पूस की रात हार में कैसे कटेगी? उससे कह दो, फसल पर दे देंगे। अभी नहीं।...और आगे

रामजन्मभूमि विवाद का पटाक्षेप

संपादकीय
रामजन्मभूमि और बाबरी मसजिद के करीब एक सौ पैंतीस साल से चले आ रहे विवाद का पटाक्षेप शीर्ष न्यायालय के निर्णय के बाद हो जाएगा, देश में ऐसी आशा थी। ...और आगे