इंडोनेशिया की यात्रा

इंडोनेशिया की यात्रा

सुपरिचित लेखिका। भूगोल में एम.ए. तथा बी.एड.। लंबे समय तक अध्यापन, अब सेवानिवृत्त। ‘ये बड़ी बात है’ कविता संकलन और एक कहानी संकलन ‘वंश बेल’ तथा रचनाएँ विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित।

नई जगहों को देखना और घूमना किसे अच्छा नहीं लगता। नई जगहों को देखने से जानकारी भी बढ़ती है। मैंने खुद भूगोल पढ़ा और पढ़ाई के दौरान कॉलेज से शॉर्ट और लांग ट्रिप पर गई थी। हम बहुत बारीकी से मौसम, पेड़-पौधे, वहाँ की मिट्टी-बालू को देखते, क्योंकि देखी गई जगहों के बारे में रिपोर्ट तैयार करनी होती और उससे संबंधित प्रैक्टिकल परीक्षा में सवाल पूछे जाते। यह सही ही कहा जाता है, जितना ज्ञान घूमकर, देखकर पा सकते हैं, उतना किताबों से नहीं। विद्यालय में पढ़ाने के दौरान भी बच्चों को विभिन्न देशों की भौगोलिक विशेषताएँ, विभिन्न प्रकार की कृषि प्रणाली, जंगल, खनिज, तरह-तरह के खदानों के बारे पढ़ाती तो लगता कि काश उन्हें घुमाकर दिखाया जाता। अब तो स्कूलों में स्मार्ट बोर्ड लगे हैं, पढ़ने-पढ़ाने का ढंग बदला है। फिर भी आभासी दर्शन और प्रत्यक्ष दर्शन में बहुत अंतर होता है। इसलिए व्यक्ति को जब मौका मिले, बाहर घूमने निकले, अपने बाल-बच्चों को नई जगहों को दिखाए। ये जगहें घर के आसपास हो सकती हैं या देश के अंदर या देश के बाहर, सभी कुछ न कुछ सिखाते हैं, नई दृष्टि देते हैं।

मुझको भी नई जगहों को देखना और घूमना पसंद है। पति की नौकरी बैंक में थी, जहाँ हर तीन वर्ष पर घूमने की सुविधा थी। लेकिन घर परिवार, बच्चे, स्कूल के कारण हमेशा तो नहीं निकल पाई। मन में इच्छा रही कि देश के बाहर घूम लूँ। पति के रिटायरमेंट के समय एक मौका मिला तो हमने इंडोनेशिया की सैर की। एक कारण यह भी था कि वहाँ जाने के लिए टूरिस्ट वीजा आसानी से मिल जाता है।

इंडोनेशिया पाँच प्रमुख द्वीप समूह एवं कई छोटे-छोटे द्वीप समूह से बना दक्षिण-पूर्वी एशिया का प्रमुख देश है। यह देश अपनी प्राकृतिक सुंदरता से सैलानियों को अपनी ओर आकर्षित करता रहा है। इस यात्रा में हमने जावा द्वीप में स्थित जोग जकार्ता (योग्य कार्ता) और बाली द्वीप का भ्रमण किया। इन दो जगहों के दर्शनीय स्थलों की चर्चा होगी। यहाँ आने के लिए भारत से सीधी फ्लाइट नहीं है। जाते समय हम बैंकॉक होते हुए गए और वापसी क्वालालंपुर होकर हुई। फिर भी यहाँ तक की यात्रा आसान है।

बाली ीप

इंडोनेशिया का बाली द्वीप हमारा पहला डेस्टिनेशन था। यह इंडोनेशिया का द्वीप प्रांत है, जिसके अंतर्गत बाली द्वीप और कुछ निकटवर्ती द्वीप भी सम्मिलित हैं। हम लोग दक्षिण में स्थित तटीय शहर कुटा में ठहरे। बाली के दर्शनीय स्थलों में हमने इसके प्राकृतिक सौंदर्य जैसे खूबसूरत समुद्र-तट, ज्वालामुखी, मंकी फॉरेस्ट देखा। कई मंदिरों का अवलोकन किया। इसके अलावा पहाड़ों पर धान की सीढ़ीदार खेती और कॉफी की खेती और उसकी प्रोसेसिंग भी देखी।

इंडोनेशिया वैसे तो मुसलिम बहुल देश है, पर बाली हिंदू बहुसंख्यक प्रांत है। यहाँ की लगभग ८५ प्रतिशत आबादी बालानी हिंदू धर्म मानती है। इसलिए हमने यहाँ स्थित बहुत सारे मंदिरों को देखा। हर एक मंदिर की बनावट, पत्थर पर की आकृतियाँ और मूर्तियों में बहुत समानता भी देखने को मिली। हर एक मंदिर के प्रवेश द्वार पर एक खास पैटर्न है, हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियाँ हैं, जैसे जामवंत, विष्णु, गणेश इत्यादि। यहाँ गणेश ज्ञान, विद्या, बुद्धि के प्रमुख देवता माने जाते हैं। ग्यारहवीं शताब्दी में बना Goa Gajah, जिसे ‘एलिफैंट केव’ कहते हैं। गुफा के अंदर गणेश की मूर्ति है और इसके उत्तरी एवं दक्षिणी भाग में शैव और बौद्ध धर्म का दर्शन होता है। वहाँ होली वाटर टेंपल भी देखा, जहाँ झील के पवित्र जल में स्नान कर लोग पूजा (अर्पण) कर रहे थे।

एक बात है, बाली के कुछ पुराने मंदिरों को व्यवस्थित एवं साफ-सुथरा रखा गया है। वहाँ जाने के लिए टिकट लेना होता है, कमर से नीचे तक ढकने के लिए एक कपड़ा, जिसे (sarango) ‘सारंगो’ कहा जाता है, उसे पहन कर जाना होता है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर ये कपड़े मिल जाते हैं, मंदिर के दर्शन करने के बाद ये कपड़े वापस करने होते हैं।

हरेक मंदिर में किचेन है, जहाँ वहाँ के स्थानीय लोग भोजन तैयार करते हैं और उनको देवता को चढ़ाया जाता है। ऐसा जान पड़ा कि वहाँ के लोग धार्मिक हैं, उनके घरों में भी मंदिर होता है।

काम या दिन शुरू करने के पहले वे एक नारियल के पत्ते से बने दोने में उसके चारों कोनों में फूल, बीच में कुछ हरी दूब की तरह और टॉफी भोग की तरह रख, उसे अपने घर के सामने, दुकान में, अपनी गाड़ी में सजाते हैं।

मंदिर के अलावा यहाँ हमने बातुर ज्वालामुखी देखा, जो एक सक्रिय ज्वालामुखी है। इसके दो स्पष्ट मुख, जिसे कॉलडेरा कहते हैं, देखा जा सकता है। इस पर्वत के एक तरफ झील है, जिसे बातुर लेक कहते हैं। इस तरह का लैंडस्केप बिल्कुल नया था हमारे लिए। हिंद महासागर के तटीय क्षेत्र में समुद्री लहरों से कटकर बनी आकृतियाँ समुद्री क्लिफ और समुद्री आर्क भी हमने देखा, जिसके बारे में हम पढ़ते और पढ़ाते हैं। जंगलों से घिरे विभिन्न प्रकार के बंदरों की भरमार वाला एक क्षेत्र है मंकी फॉरेस्ट।

बाली में बहुत बड़े इलाके में कॉफी की खेती और पहाड़ों पर सीढ़ीदार धान के खेत भी देखने लायक हैं। कॉफी बीन्स को भूनकर कैसे कॉफी तैयार करते हैं और विश्व की सर्वोत्तम किस्म की कॉफी भी तैयार करने की प्रक्रिया का पता चला। यहाँ कॉफी और चॉकलेट की अनगिनत वेराइटी देखने को मिलीं। इसके अलावा यहाँ के कुटीर उद्योग, जिसमें सोने व चाँदी के काम, लकड़ी का काम और बाटिक प्रिंट का काम भी देखा।

बाली का रामायण का मंचन बहुत प्रसिद्ध है, इसके लिए ओपन थियेटर भी हैं। हालाँकि हम इसका आनंद नहीं ले पाए। बाली में यों तो हरेक उम्र के पर्यटक मिल जाएँगे, पर नवविवाहित जोड़ों का यह पसंदीदा डेस्टिनेशन है। बाली एक ऐसा द्वीप है, जिसकी ८५ प्रतिशत कमाई टूरिज्म से होती है, जो देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करती है।

योग्यकार्ता या जोगजकार्ता

जावा द्वीप पर स्थित यह शहर शाही शहर के रूप में जाना जाता है। यह इंडोनेशिया का एकमात्र शहर है, जहाँ अभी भी राजतंत्र है, २० प्रतिशत शासन का अधिकार राजा के पास है। यहाँ सुल्तान के महल का कुछ भाग दर्शनार्थियों के लिए खुला रहता है। महल के एक भाग में म्यूजियम है, इससे शासक के परिवार, उनके रीति-रिवाज और तौर-तरीकों का पता चलता है। उनके रिक्रिएशन के लिए वाटर पैलेस भी है, जहाँ राजा-रानी कभी स्नान किया करते थे, अब दर्शनार्थियों के लिए खुले हैं।

योग्य कार्ता के दो स्मारक विश्वप्रसिद्ध हैं, जिसे हमने देखा, दसवीं शताब्दी का एक पुराना हिंदू मंदिर है प्रमबनन मंदिर। कहा जाता है कि यहाँ छह प्रमुख मंदिर और २१४ छोटे-छोटे मंदिर थे, पर दो-तीन भूकंप में बहुत कुछ नष्ट हो गया। फिर भी छह मंदिर अभी भी खड़े हैं। ये मंदिर पत्थर से निर्मित हैं, जिनकी नक्काशी और मूर्तियाँ दर्शनीय हैं। यहाँ शिव, विष्णु, दुर्गा, ब्रह्म‍ा और गरुड़ आदि देवताओं के मंदिर हैं। हर एक मंदिर के द्वार पर द्वारपाल हैं। ऐसी मान्यता है कि पूरे विश्व में भारत के पुष्कर के बाद यही जगह है, जहाँ ब्रह्म‍ाजी का मंदिर है।

यहाँ बोरोबुदुर में विश्व का सबसे बड़ा बुद्ध मंदिर है। यह मंदिर गोलाकार है और इमारत सात मंजिली है। यहाँ ५१०० स्तूप हैं। इंडोनेशिया के ये दोनों स्मारक धरोहर कहे जा सकते हैं। बोरोबुदुर और प्रमबनन कला और शिक्षा के केंद्र माने जाते हैं। इसलिए शायद दोनों स्मारकों को देखने के लिए बड़ी संख्या में विद्यार्थी आए थे। ऐसा मालूम होता था, कुछ प्रोजेक्ट की तैयारी में हैं और कुछ अंग्रेजी सीखने के लिए यहाँ आते हैं, जैसा कि हमारे गाइड ने बताया। अंग्रेजी सीखने के लिए हमारे गाइड के साथ ही तीन लड़कियाँ हो लीं, जिनसे हमारी भी अच्छी दोस्ती हो गई। इंडोनेशिया की प्राथमिक भाषा (Bahasa) बहासा है, जो यहाँ की ऑफिशियल भाषा भी है।

इसके अलावा मेरापी ज्वालामुखी को देखने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्ते को जीप के द्वारा पार करते हुए बहुत ऊँचाई पर जाना पड़ा। २०१० में इस ज्वालामुखी से विस्फोट हुआ था। कभी आबाद रहा जंगलों से भरा यह क्षेत्र विस्फोट के बाद बरबाद हो गया। यहाँ एक छोटे से म्यूजियम में विस्फोट के कारण लोगों की चीजें, जैसे कपड़े, बरतन, टेलीविजन, घर के अवशेष देखने को मिले, जानवरों की ह‍‍‍‍‍‍‍‍‍‌ियों के ढाँचे भी थे। परंतु मेरापी ज्वालामुखी बादल के कारण अच्छी तरह नहीं दिखा। फिर वहाँ से नीचे उतरते निचले इलाके में धान की खेती के साथ-साथ पपीता, केला, नारियल इत्यादि के बगीचे दिखे।

योग्य कार्ता इंडोनेशियाई शिक्षा का केंद्र है। यहाँ दर्जनों स्कूल और विश्वविद्यालय हैं। उच्च शिक्षा का देश का सबसे बड़ा संस्थान गदजा माडा विश्वविद्यालय यहीं पर है। यह कला और संस्कृति का भी केंद्र है। यहाँ के संगीत और कठपुतली प्रस्तुति की झलक सुल्तान के पैलेस में देखने को मिली, जहाँ कलाकार की प्रस्तुति देखने के लिए बैठने की व्यवस्था रहती है।

इंडोनेशिया की इन दो जगहों को देखकर वहाँ की प्राकृतिक सुंदरता के साथ वहाँ की संस्कृति से रूबरू होने का मौका मिला। यह भी पता चला कि सरकार पर्यटन स्थलों के विकास और पर्यटकों की सुविधा के लिए बहुत सजग है।

मैं झारखंड में रहती हूँ और जानती हूँ कि यहाँ प्राकृतिक सुंदरता, दर्शनीय स्थलों एवं मंदिरों की कमी नहीं है। यह देश का प्रमुख पर्यटन स्थल बन सकता है। हमारी सरकार इसके लिए प्रयत्नशील है। पर्यटन यहाँ के लोगों को रोजगार के अवसर भी दे सकता है और सरकार को अधिक राजस्व की भी प्राप्ति हो सकती है।

बी-२०२, उमिया वूड्स

ईसीसी रोड, डोड्सवर्थ लेआउट

बैंगलुरु-५६००६६

दूरभाष : ९९५५३४६५६६

हमारे संकलन