Prabhat Books
Prabhat Books

फ़रवरी 2016

IS ANK MEN

More

प्रतिस्मृति

चतुरी चमार चतुरी चमार
चतुरी चमार डाकखाना चमियानी मौजा गढ़कला, उन्नाव का एक कदीमी बाशिंदा है। मेरे नहीं, मेरे पिताजी के बल्कि उनके पूर्वजों के भी मकान के पिछवाडे़ कुछ फासले पर, जहाँ से होकर कई और मकानों के नीचे और ऊपरवाले पनालों का, ...और आगे

कहानी

तुम याद आओगे लीलाराम...! तुम याद आओगे लीलाराम...!
सुबह-सुबह अखबार पढ़ने के बाद मैं अपना लिखना-पढ़ना शुरू करने की तैयारी में था, इतने में ही दरवाजे पर दस्तक। पहले धीरे से, फिर तेज...! मैं बाहर गया तो सामने जो दुबला-पतला सा युवक था, उसने बड़े आत्मीय स्वर में कहा, ...और आगे

आलेख

कृष्ण के स्वरूप का रहस्य कृष्ण के स्वरूप का रहस्य
कदंब वृक्ष की घनी छाया तले, शीश पर मोर-मुकुट, कानों में मकराकृति-कुंडल, अधरों पर मुरली, गले में वैजयंतीमाल, कटि में पीतांबर धारण किए त्रिभंगी मुद्रा में आधी खुली आँखें, मग्न भाव, पीछे गाय ...और आगे

कविता

लेकिन पेट अभी भूखे हैं लेकिन पेट अभी भूखे हैं
मौसम की अय्यारी देख रहे हम बहुत दिनों से मौसम की अय्यारी ...और आगे

बाल-संसार

महात्मा गांधी की तीन माँग
देश समस्याओं के मकड़जाल में उलझा हुआ था, इसे सुलझाएँ कैसे? यह प्रश्न था उनके सामने, छुआछूत, जात-पाँत और धार्मिक विवाद तो थे ही, राजतंत्र भी बंदूक लिये खड़ा था। अजीब बात थी कि राजतंत्र की बंदूक दिखती नहीं थी, ...और आगे

संस्मरण

डॉ. वृंदावनलाल वर्मा के जीवन के प्रेरक प्रसंग डॉ. वृंदावनलाल वर्मा के जीवन के प्रेरक प्रसंग
अप्रतिम व्यक्तित्व के धनी, महान् विचारक और साहित्य मनीषी डॉ. वृंदावनलाल वर्मा हिंदी जगत् के अनूठे उपन्यासकार और जीवन-गाथा के अनमोल रत्न हैं। वे अत्यंत संवेदनशील और जागरूक कलाकार थे। ...और आगे

व्यंग्य

अपने मुँह मियाँ मिट्ठू अपने मुँह मियाँ मिट्ठू
तोता-मैना का किस्सा तो आपने सुना ही होगा। मैना स्त्री जाति का पक्ष लेकर पुरुषों के अत्याचारों का वर्णन कथाओं में करती है और तोता पुरुषों का साथ देता हुआ ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

कुदरत का सूरज और इनसान का कुदरत का सूरज और इनसान का
सूरज को नमन लोग यों ही नहीं करते हैं। सूरज दुनिया को कुदरत की सबसे बड़ी समाजवादी देन है। झुग्गी-झोंपड़ी, खेत-खलिहान, गली-कूचे, कोठी-महल, सबको समानता से रोशनी बाँटना कोई कम उपलब्धि है क्या? जबकि स्वयं को जयप्रकाश-लोहिया की विरासत ...और आगे

साहित्य का भारतीये परिपार्श्व

क्लॉकरूम
थके हुए शहर के फुटपाथ से नई कमीज खरीदने के बाद वह आगे बढ़ा। मन ही मन ऐसी जगह खोजता रहा, जहाँ कमीज पहन सके। मगर ऐसा कोई एकांत कोना वह ढूँढ़ नहीं पाया। वह आगे बढ़ता रहा। फुटपाथ के किनारे स्टोव और दूसरे बरतन लेकर एक दुकानदार चाय बेच रहा था। ...और आगे

ललित निबंध

संवेदना संवेदना
संवेदना का मोती हृदय की सीपी में पलता है। हृदयहीन इस नायाब खजाने से बहुत दूर हैं। जिस मनुष्य में संवेदना नहीं है, वह मृतक है। संवेदना ही मनुष्य को मनुष्य से जोड़ती है, मनुष्य को समाज से जोड़ती है ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

लुटेरे...द सोशली फ्रेंडली
क्या विश्व साहित्य में लुटेरों का महिमा-मंडन नहीं किया गया? मेरी दुर्बल लेखनी भी उनके बारे में कुछ कहना चाहती है। फ्रेंकोइस विलिन को दोष देने से क्या होगा? क्या ह्यूगो और बालजाक भी उस रास्ते को छोड़ सके? ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

यात्रा पितृ-मोक्ष से प्रभु-दर्शन तक
मेरे परिवार के सदस्यों, विशेषकर मेरे पुत्र सुब्रत, बहू रिचा और बेटी सुप्रिया का आग्रह था कि मैं सपत्नीक गया और भगवान् जगन्नाथ के धाम पुरी की यात्रा करूँ। मेरी इस यात्रा को संभव बनाने के लिए मेरे मित्र ओमप्रकाश चौधरी की सलाह का भी योगदान रहा और इन सबके आग्रह तथा मेरे साहस के कारण मैं व मेरी पत्नी नीमच से कोटा जानेवाली रात्रिकालीन रेल में सवार हो गए गया जाने के लिए। ...और आगे

स्‍मरण्‍ा

आचार्य क्षेमचंद्र सुमन आचार्य क्षेमचंद्र सुमन
आचार्य क्षेमचंद्र सुमन का जन्म १६ सितंबर, १९१६ को उत्तर प्रदेश के मेरठ जनपद (अब गाजियाबाद) की हापुड़ तहसील के बाबूगढ़ नामक ग्राम में हुआ था। ...और आगे

कहानी

मर्यादा की लकीरें मर्यादा की लकीरें
"हेलो, हेलो। २७४९६३ से बोल रहे हैं?" किसी प्रकार साहस बटोरकर स्वदेश ने पूछा। "हाँ, आप ठीक कह रहे हैं। आप कौन साहब हैं? किनसे बात करनी है?" स्वदेश भरसक प्रयत्न करने पर भी तुरंत उत्तर न दे पाया। ...और आगे