Prabhat Books
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संपादकीय

ह्यूस्टन में 'हाऊडी मोदी' कार्यक्रम
'हाऊडी मोदी' का अमेरिका के ह्यूस्टन में आयोजन अपने आपमें एक उल्लेखनीय उपलब्धि है। ...और आगे

प्रतिस्मृति

गोपाल की बुद्धि गोपाल की बुद्धि
एक था लड़का। उसका नाम था गोपाल। वह बहुत ही चतुर और समझदार था। ...और आगे

आलेख

प्रेमचंद : आधी शताब्दी की शोध-यात्रा प्रेमचंद : आधी शताब्दी की शोध-यात्रा
मैंअस्सी वर्ष का हो गया हूँ। यह सही वक्त है, जब मुझे अपने अतीत का अवलोकन करना चाहिए कि प्रेमचंद के साथ मेरे आधी शताब्दी के रिश्ते की यह यात्रा कैसी व्यतीत हुई। ...और आगे

कहानी

मेरी बेटियाँ मेरी बेटियाँ
रात कब की उतर आई थी। सारा मोहल्ला जैसे सुनसान पड़ गया था। लोग खाना खा, रसोई समेट, अपने-अपने घरों की खिड़कियाँ-दरवाजे बंद कर, सोने के लिए लेट गए थे। ...और आगे

लघुकथा

नन्हीं चींटी नन्हीं चींटी
हास्य-व्यंग्य के प्रख्यात कवि-लेखक। बाल-साहित्य में भी दर्जनों पुस्तकें प्रकाशित। इन दिनों भी लेखन में सक्रिय। ...और आगे

बाल कविता

नानी बड़ी सयानी नानी बड़ी सयानी
सुपरिचित कवि। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। हिंदी अकादमी, दिल्ली से पुरस्कृत एवं साहित्य मंडल, नाथद्वारा से सम्मानित। शिल्पा चड्ढा एवं राजेंद्र बिष्ट स्मृति सम्मान भी। ...और आगे

कविता

अनुभूति अनुभूति
बचपन बहाया मैंने, कागज की किश्तियों में। ...और आगे

संस्मरण

यादों में बचपन, जो मुझमें अब भी साँस लेता है...! यादों में बचपन, जो मुझमें अब भी साँस लेता है...!
मेरी कहानियों में नंदू भैया अकसर आते हैं। खूब गोल-मटोल से नटखट और शरारती नंदू भैया। जिंदगी से लबालब। ...और आगे

स्‍मरण

इलाहाबाद के माधव शुक्ल इलाहाबाद के माधव शुक्ल
महामना मदनमोहन मालवीय के शिष्य, बालकृष्ण भट्ट के प्रिय तथा राजर्षि पुरुषोत्तम दास टंडन एवं कृष्णकांत मालवीय के अभिन्न मित्र माधव शुक्ल का जन्म १० जुलाई, १८८९ में इलाहाबाद के चौक में कूचा श्यामदास मोहल्ले में हुआ था। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

एक श्रेष्ठ सैक्युलर सांसद एक श्रेष्ठ सैक्युलर सांसद
लोकतंत्र के चुनावकाल में बहुत कुछ अनपेक्षित होता है। जनता का आका आम आदमी की तलाश में जुटता है। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

शोलापुर
तड़के उठकर दरवाजे पर ताला लगाने के बाद वे घर से निकले। सात बजने से पहले सड़क तक पहुँच जाएँ तो शोलापुर जानेवाली पहली बस मिल सकती है। ...और आगे

व्यंग्य

भय बिनु होइ न प्रीति भय बिनु होइ न प्रीति
नवरस में एक रस है भयानक रस। भयानक रस का स्थायी भाव भय है। भय कितना-कितना भयभीत करनेवाला, सभी जानते हैं। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

राजा लुई और विवाहित पुरुष
शिकार के बाद राजा प्रायः केनन के घर जाता और उसके साथ प्रसन्नता से मूली खाया करता था। ...और आगे

ललित निबंध

एक नदी जीजी के गाँव की एक नदी जीजी के गाँव की
झोरे-झबरे में पैर रखते ही लचकते-लरकते हैं यह घुरक की रंगधूलि है। ...और आगे

यात्रा-संस्मरण

बेंगलुरु में बीस दिन बेंगलुरु में बीस दिन
मैं मूलतः यात्रा भीरू हूँ, घर के बाहर घर जैसा आराम कहाँ, जैसी मानसिकता वाला। पर एक ही जगह पर रहते हुए आदमी ऊब जाता है। ...और आगे

बाल-संसार

कहानी रुपए और सिक्कों के जन्म की कहानी रुपए और सिक्कों के जन्म की
प्यारे बच्चो! मैं तुम्हें बताना चाहूँगा कि जिन रुपयों व सिक्कों का उपयोग हम अपनी आवश्यक वस्तुओं को खरीदने में करते हैं, इसे राजस्व मुद्रा कहा जाता है। ...और आगे