Prabhat Books
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अप्रैल 2024

IS ANK MEN

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संपादकीय

लोकतंत्र का विराट् उत्सव
इस कविता में एक ओर भारत की भोली-भाली, मेहनतकश, संघर्षशील जनता का भी चित्रण है, जो अनेकानेक चुनौतियों का सामना करती है, वहीं जनता की अपार शक्तियों, क्षमताओं का भी उल्लेख करके शासकों को चेताया गया है। वहीं इस कविता में जनता की शक्तियों का भी चित्र दिनकरजी ने प्रस्तुत किया है ...और आगे

प्रतिस्मृति

मैं हार गई मैं हार गई
भानपुरा, मध्य प्रदेश में ३ अपैल, १९३१ को जनमी मन्नू भंडारी को लेखन-संस्कार पिता श्री सुखसंपत राय से विरासत में मिला। स्नातकोत्तर के उपरांत लेखन के साथ-साथ वर्षों दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस में हिंदी का अध्यापन। ...और आगे

लघुकथा

धुँधली चमक
कभी समाज के अभिशप्त वर्ग के लिए धर्म, दान, इनके संरक्षण, चिकित्सा के लिए भी कुछ समय दो। अच्छा लगता है सभी के सुख-दुःख में सहभागी होना। ...और आगे

कहानी

नैनी भाई नैनी भाई
मीना अग्रवाल सुपरिचित लेखिका। अब तक अंदर धूप बाहर धूप, कुत्ते वाले पापा, क्या अच्छा क्या बुरा (कहानी-संग्रह), सफर में साथ-साथ, धूप अपनेपन की (मुक्तक), यादें बोलती हैं ...और आगे

आलेख

आचार्य प्रवर विद्यासागरजी को शत-शत वंदन आचार्य प्रवर विद्यासागरजी को शत-शत वंदन
सुरेश जैन विमला जैन सुरेश जैन (आई.ए.एस.) अनेक पुरस्कारों से सम्मानित हैं। 'जैन रत्न' और 'समाज भूषण' जैसी विभिन्न उपाधियों से विभूषित। सेवानिवृत्ति के पश्चात् भारत सरकार के पर्यावरण मंत्रालय में मध्य प्रदेश राज्य विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष रहे। ...और आगे

कविता

रामजी आए अवध के द्वार
श्रीधर द्विवेदी चिकित्सा विषय पर हिंदी में लिखनेवाले प्रतिनिधि लेखक। चिकित्सा क्षेत्र में अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय फेलोशिप से सम्मानित। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

होने न होने का संकट होने न होने का संकट
गोपाल चतुर्वेदी सरकारी हो या निजी, हर कामचोर क्लर्क या अफसर एक दार्शनिक है। उसका नजरिया होने न होने का है। जब उसने हर डिग्री परीक्षा में नकल करके कमाई है तो यह अहसास स्वाभाविक है कि दूसरे ने भी ऐसे ही प्राप्त की होगी। ...और आगे

संपादकीय

तुसी कर दे की होl
हरीश नवल प्रख्यात व्यंग्यकार। अब तक छह व्यंग्य-संकलन, तीन आलोचनात्मक पुस्तकें, नौ संपादित ग्रंथ और बावन ग्रंथों में सहयोगी रचनाकार के रूप में रचनाएँ प्रकाशित। एक हजार से अधिक रचनाएँ पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित। ...और आगे

गजल

गजलें
प्रशांत उपाध्याय सुपरिचित कवि-लेखक। 'शब्द की आँख में जंगल' (नई कविता-संकलन), 'गीतों में झाँकते दोहे' (दोहा-संकलन), 'थोड़ी-बहुत गजल की कोशिश' तथा विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में दो सौ से अधिक रचनाएँ प्रकाशित एवं आकाशवाणी, दूरदर्शन से रचनाओं का प्रसारण। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

इश्क मलंगी
मूलःखालिद हुसैन अनुवादःनीलम शर्मा 'अंशु' बहुभाषी लेखक। ४० वर्षों से अधिक समय तक विविध प्रशासनिक पदों पर कार्य। उर्दू, हिंदी, अंग्रेजी, पहाड़ी, गोजरी, डोगरी, कश्मीरी तथा पंजाबी आदि भाषाओं के जानकार। ...और आगे

व्यंग्य

घायल वसंत
पूरन सरमा सुपरिचित व्यंग्यकार। अब तक चौदह व्यंग्य-संग्रह, एक उपन्यास 'समय का सच' एवं बाल-साहित्य की करीब बीस पुस्तकों का प्रकाशन। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

धुएँ से भरा एकांत
मूलःरुडयार्ड किपलिंग अनुवादःबंशीधर तातेड सुप्रसिद्ध कवि जोसेफ रुडयार्ड किपलिंग का जन्म ३० दिसंबर, १८६५ को बंबई (भारत) में हुआ। ग्यारह वर्ष की उम्र में स्वास्थ्य की दृष्टि से उन्हें इंग्लैंड के डेवोन ले जाया गया। यहीं से उन्होंने लिखना शुरू किया। ब्रिटिश अंग्रेजी लघुकथा लेखक, कवि और उपन्यासकार के रूप में उनको याद किया जाता है। ...और आगे

बाल-कथा

मूर्ख बने जानवर
 घमंडीलाल अग्रवाल सुपरिचित बाल-साहित्यकार। कई विधाओं की ७४ पुस्तकें तथा पत्र-पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के प्रतिष्ठित ...और आगे