Prabhat Books
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संपादकीय

राजस्थान राज्य अभिलेखागार की अत्यंत महत्त्वपूर्ण उपलब्धि
राजस्थान राज्य का भूमि अभिलेखागार बीकानेर में है। उस समय मुख्य राज्यों की जो राजधानियाँ थीं। ...और आगे

प्रतिस्मृति

काहे फिरत बौरानी हो रामा
होली मानव के इतिहास में उतनी ही पुरानी है, जितना शैशव की अपेक्षा-यौवन। ...और आगे

लघुकथा

कड़वा सच कड़वा सच
घरेलू डॉक्टर के निर्देशानुसार मैं अपनी गरदन के नीचे आइसपैक लगाकर सोई थी, दिनभर के काम से मेरा शरीर सुबह अकड़ जाता था। ...और आगे

आलेख

पाठालोचन : प्रो. डी.एल.एन. के स्मृतिपूर्ण मार्गदर्शन के साथ पाठालोचन : प्रो. डी.एल.एन. के स्मृतिपूर्ण मार्गदर्शन के साथ
मै सूर के महाराजा कॉलेज की विद्वत्ता का एक संभ्रांत इतिहास है। ...और आगे

कहानी

देहदान देहदान
बहुत देर से टेलीफोन की घंटी बज रही थी। ...और आगे

कविता

भूख
भूखे को न दे सके कोई निवाला कभी, प्यासे को न दे सके कोई प्याला कभी। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

हमारे मोहल्ले के लोग हमारे मोहल्ले के लोग
हर मोहल्ले में रहनेवालों के अपने वर्गीकरण होते हैं। कुछ की ख्याति झगड़ालू तो कुछ की स्वार्थी की है। ...और आगे

लोक-साहित्य

लोकगीतों में राम का स्वरूप एवं आस्था लोकगीतों में राम का स्वरूप एवं आस्था
लोकगीत भारतीय समाज के हृदय के स्वतंत्र उद्गार हैं। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

अगला जन्म
और बात थी एकदम सच। जसवंत राय का दूसरा नाम सफलता था। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

दिनभर का इंतजार
जब वह खिड़कियाँ बंद करने के लिए कमरे में आया तो हम सब बिस्तर पर ही लेटे थे और मैंने देखा कि वह बीमार लग रहा था। ...और आगे

स्‍मरण्‍ा

डॉ. रमाशंकर शुक्ल 'रसाल' हिंदी साहित्य का एक अनूठा व्यक्तित्व डॉ. रमाशंकर शुक्ल 'रसाल' हिंदी साहित्य का एक अनूठा व्यक्तित्व
हिंदी साहित्य के इतिहास में आचार्य डॉ. रामशंकर शुक्ल 'रसाल' का स्थान अनेक रूपों में अप्रतिम है। ...और आगे

बाल-संसार

बिन दिमाग बिन दिमाग
कुत्तों का चीखना-चिल्लाना और भौंकना सुनकर सभी लोग घरों से बाहर आ गए। ...और आगे

यात्रा-संस्मरण

लला, फिर आइयो खेलन होरी लला, फिर आइयो खेलन होरी
होली-दहन की पूर्व-संध्या पर, यानी ४ मार्च, २०१५ को ऐसा संयोग बना कि वृंदावन धाम के दर्शनों का पुण्य लाभ मिला। ...और आगे

पत्र

बाबू गुलाब राय व निरालाजी के पत्र बाबू गुलाब राय व निरालाजी के पत्र
छतरपुर राज्य के महाराजा सर विश्वनाथ सिंह जूदेव चैतन्य महाप्रभु के गौडि़या संप्रदाय में दीक्षित थे। ...और आगे

रिपोर्ताज

सिंहस्थपुरी के अविस्मरणीय क्षण सिंहस्थपुरी के अविस्मरणीय क्षण
भारत लोगों की धार्मिक, सांस्कृतिक, सामाजिक और राष्ट्रीय भावनाओं का संगम है। ...और आगे

पुस्तक-अंश

मितभाषी, गंभीर और स्पष्ट चिंतन
संघ के वरिष्ठ प्रचारक माननीय सोहन सिंहजी का अभाव बेहद खलेगा। ...और आगे

हास्य-व्यंग्य

उस होली से इस होली तक उस होली से इस होली तक
होली का त्योहार रंग-बिरंगी बौछार न जाने कितने रंग रहे सवार, गुजरी होली से आज तक बेशुमार रंगों से हमारा पाला पड़ा है। ...और आगे