Prabhat Books
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संपादकीय

२०१९ के आम चुनाव की ओर
नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा और एन.डी.ए. सरकार अजेय है, ...और आगे

प्रतिस्मृति

वंदे मातरम् के उद्घोषक : बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय
अपनी पुस्तकों 'महिलाएँ और स्वराज्य' तथा 'क्रांतिकारी महिलाएँ' पर काम करते हुए। ...और आगे

कहानी

वंदनवार वंदनवार
पारिजात की माँ ने गाँव के नाई के हाथ गृहस्थी का बहुत सारा सामान लादकर भेज दिया था। ...और आगे

आलेख

साहित्य-सृजन से राष्ट्रार्चन साहित्य-सृजन से राष्ट्रार्चन
भारत की सर्वाधिक प्राचीन भाषा 'संस्कृत' है। उसका अपार साहित्य देश में राष्ट्रीयता के भावों को हृदयंगम करता है ...और आगे

लघुकथा

अहंकार का आवरण
एक गाँव में एक मूर्तिकार रहता था। ...और आगे

कविता

दिव्य आत्मा बेटियाँ दिव्य आत्मा बेटियाँ
कहते हैं मारनेवाले से बचानेवाला बलवान होता है क्योंकि बचानेवाला खुद भगवान् होता है ...और आगे

भाषा-प्रयोग

हिंदी की प्रकृति के भव्य दर्शनों के लिए कर्ता, कर्म, कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य आदि की परिभ हिंदी की प्रकृति के भव्य दर्शनों के लिए कर्ता, कर्म, कर्तृवाच्य, कर्मवाच्य आदि की परिभ
यदि हमें हिंदी भाषा की रचना-प्रक्रिया, अर्थात् आंतरिक व्यवस्था के भव्य स्वरूप के दर्शन करने हों, ...और आगे

व्यंग्य

आम आदमी, खास आदमी
इधर कुछ वर्षों से आम आदमी खासतौर पर चर्चा में है। ...और आगे

ललित निबंध

नदी और मनुष्य नदी और मनुष्य
नदी और मनुष्य के बीच रिश्ता अत्यंत पुराना और गहरा है। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

अपने मोहल्ले के लोग अपने मोहल्ले के लोग
हमारा खयाल है कि हर मोहल्ले में आधा दर्जन कवि, एकाध दार्शनिक, दस-बारह अदद झंझटी, चंद समाजसेवक और कुछ चुप्पे जरूर बसते हैं। ...और आगे

स्‍मरण्‍ा

डॉ. बलदेव वंशी : बातें-मुलाकातें डॉ. बलदेव वंशी : बातें-मुलाकातें
यह पंक्तियाँ चेतनावादी कवि डॉ. बलेदव वंशी की हैं, जो अब इस लोक में नहीं रहे। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

गया था बुद्ध गया गया था बुद्ध गया
गया था बुद्ध गया सिर्फ देखने जैसे बुद्ध गया को ही ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

प्रतिभा
आर्टिस्ट युगोर सेविच, जो एक अफसर की बेवा के मकान में अपनी गरमी की छुट्टियाँ बिता रहा था ...और आगे

लोकपर्व

हमारे पुरखों का फास्ट फूड : सत्तू हमारे पुरखों का फास्ट फूड : सत्तू
अक्षय तृतीया शुभ मुहूर्त की तिथि है। ...और आगे

लोक-साहित्य

भवाई लोकनाट्य भवाई लोकनाट्य
हजारों सालों से संरक्षित भारतीय संस्कृति अभी तक अक्षुण्ण-अखंड रही, उसे तोड़नेवाले, नष्ट करनेवालों के कई प्रयासों के बाद भी वह लुप्त नहीं हुई ...और आगे

यात्रा-संस्मरण

प्रयाग से रामेश्वरम् प्रयाग से रामेश्वरम्
वाल्मीकि रामायण के कतिपय विलक्षण प्रसंगों में राम द्वारा अगाध-असीम महासागर पर सुदृढ़ सेतु का निर्माण ...और आगे

बाल-संसार

ओवरकोट ओवरकोट
पप्पू बहुत ही प्यारा हाथी था। वह चंपक वन के सभी छोटे-बडे़ जानवरों के साथ दोस्ताना व्यवहार करता था। ...और आगे