Prabhat Books
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अकतूबर 2021

IS ANK MEN

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संपादकीय

सत्यमेव जयते...
भारत में शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति हो, जिसने कभी-न-कभी दशहरे का मेला न देखा हो या रामलीला न देखी हो। दशहरे के मेले की भीड़ भी शायद सबके मानस में बसी हो। कुछ दशक पहले की याद करें तो सैकड़ों गाँवों से चलकर परिवार-के-परिवार बैलगाड़ियों में, इक्के-ताँगों में, ...और आगे

प्रतिस्मृति

रामलीला रामलीला
गोबरहा और खुराँव ये दोनों गाँव एकदम पास-पास हैं। अंतर केवल एक बगीचे का है। दोनों में एक ही गोत्र के किसान हैं और प्राय: समान हसब-हैसियत के हैं। दोनों गाँव मिलकर रहते हैं, कोई दुराव नहीं रहता। परंतु गोबरहा गाँव वालों के सामने खुराँव का जिक्र आता है तब वे ऐसा भाव प्रकट ...और आगे

कहानी

उत्सव उत्सव
कल पूरा दिन बेटे से बात नहीं हो पाई थी। इसलिए उसने सुबह लैंडलाइन पर फोन लगा दिया। जानती थी, आज रविवार है। रजत घर पर ही होगा। और जब वह घर में होता है, सबसे पहले दौड़कर वही फोन उठाता है। माँ से ...और आगे

कविता

सूर्य उदय होगा सूर्य उदय होगा
बस देखती रही शून्य में इतना कुछ सहना था भगवान् तो औरत को तूने दिल क्यों दिया क्यों दिमाग दिया क्यों दी सोचने-समझने की ताकत क्यों नहीं बिना दिल के मांस का लोथड़ा बनाकर फेंक दिया धरा पर क्यों अत्याचार सहने के बाद सिसकियों से भर जाती हैं साँसें ...और आगे

आलेख

शिक्षा के क्षेत्र में भारत कहाँ है? शिक्षा के क्षेत्र में भारत कहाँ है?
रामकृष्ण मिशन से मेरा घनिष्ठ संबंध १९६३ से है। नरेंद्रपुर कलकत्ते के निकट में इनका आवासीय विद्यालय कक्षा सात से स्नातक बी.ए. तक का था। उन दिनों हायर सेकेंडरी परीक्षा में से उच्चतम अंक प्राप्त करनेवालों में एक या दो विद्यार्थी उनके रहते। ...और आगे

लघुकथा

अजनबी
मैंने कार पार्क करके विश्वविद्यालय की तरफ कदम बढ़ाए ही थे कि मोबाइल फोन की घंटी बज उठी। फोन लिया तो दूसरी तरफ से एक बहुत दुखी आवाज सुनाई दी हेल्प मी प्लीज मेरी मदद करिए। मैं घबरा गई। मैंने चिंतित स्वर में पूछा क्या हुआ तुम्हें ठीक तो हो न पहली बार ऐसे किसी ने मुझे फोन किया था। एक क्षण थमकर आवाज आई मैं बेहद अकेली हूँ। मेरी मदद करें कृपया ...और आगे

संस्मरण

रसना के फेर में रसना के फेर में
जिन लोगों का बचपन कस्बों या बहुत छोटे शहरों में गुजरता है, वे स्वत: संस्कारी और कुछ ज्यादा ही मर्यादित हो जाते हैं। मेरे बचपन का एक बड़ा हिस्सा ऐसी आर्डिनेंस फैक्टरी की आवास बस्ती में गुजरा, ...और आगे

ललित निबंध

गांधी ने सोचा, कहा और किया गांधी ने सोचा, कहा और किया
13नवंबर, १९०९ को गांधी इंग्लैंड का अपना मिशन पूरा कर पानी के जहाज से इंग्लैंड से दक्षिण अफ्रीका लौटते हैं। अपने मिशन का कार्य पूरा करते समय भी उसके मन में भारत की स्वतंत्रता की भावनाएँ उठती रहती हैं। मस्तिष्क भारत की वास्तविक स्वतंत्रता ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

शिकारपुर के खास लोग शिकारपुर के खास लोग
सिर्फ शिकारपुर ही नहीं, हर शहर में कुछ खास व्यक्ति पाए जाते हैं, जैसे पुरुषों में महापुरुष या फिर बीमारियों में महामारी। इनकी ख्याति इनके पूरे क्षेत्र में शीर्ष पर है, जैसे कचरे की दुर्गंध मोहल्ले में। इधर एक नया चलन प्रचलित है। प्रशासन का हर दावा टी.वी., अखबार में किया जाता है। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

दो लघुकथाएँ दो लघुकथाएँ
इन ए सेकंड मेरा पुराना दोस्त तानसेन बेंगलुरु चला गया और वहाँ एक छोटी सी कपड़े की दुकान खोल दी। जब वह पहली ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

हीरों का हार हीरों का हार
वह उन खूबसूरत और आकर्षक युवतियों में से थीं, जो दुर्भाग्य से कभी-कभी किसी क्लर्क के परिवार में जन्म ले लेती हैं। उसके पास न दहेज था, न आशाएँ थीं, न साधन थे कि कोई उसे समझ सके, सराह सके, प्रेम कर सके, कि किसी अमीर अथवा प्रतिष्ठित व्यक्ति से ...और आगे

जिन्होंने जलाई स्वाधीनता की अलख

रानी लक्ष्मीबाई रानी लक्ष्मीबाई
बलिदानों की धरती भारत में ऐसे-ऐसे वीरों ने जन्म लिया है, जिन्होंने अपने रक्त से देशप्रेम की अमिट गाथाएँ लिखीं। यहाँ की ललनाएँ भी इस कार्य में कभी किसी से पीछे नहीं रहीं। इन्हीं में से एक नाम है झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई। उन्होंने न केवल भारत की, बल्कि विश्व की महिलाओं को गौरवान्वित किया। ...और आगे

बाल-कहानी

पाँच सौ का नोट पाँच सौ का नोट
वाह! पाँच सौ रुपए का नोट। आज जैसे लॉटरी ही लग गई। अब तक तो माँ से एक-दो रुपए ही मिला करते थे, लेकिन जब आज बुआ और फूफाजी घर आए, तब उन्होंने चलते समय यह नोट चुलबुल को दिया था। ...और आगे

साहित्य अमृत मासिक का लोकार्पण

साहित्य अमृत मासिक का लोकार्पण साहित्य अमृत मासिक का लोकार्पण
तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकार दयाल शर्मा को 'साहित्य अमृत' का प्रवेशांक भेंट करते हुए प्रबंधक संपादक श्यामसुंदर, साथ में हैं पत्रिका के संस्थापक संपादक प. विद्धयानिवास मिश्र एवं प्रतिष्ठित साहित्यकार ...और आगे