Prabhat Books
Prabhat Books

संपादकीय

पाँच राज्यों के चुनाव और आगे?
पाँच राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना के विधानसभा चुनाव की ओर देश की आँखें लगी हुई थीं। ...और आगे

प्रतिस्मृति

तुम्हारे शहर में तुम्हारे शहर में
तुम्हारे इस शहर में सदियों से तंद्रा में डूब यानी जादुई शहर में जब-जब आता हूँ, ...और आगे

आलेख

इतिहास के अनन्यतम जीवन-शिल्पी इतिहास के अनन्यतम जीवन-शिल्पी
अप्रतिम व्यक्तित्व के धनी, महान् विचारक, साहित्य मनीषी डॉ. वृंदावनलाल वर्मा हिंदी-जगत् के अनूठे ऐतिहासिक उपन्यासकार व जीवनगाथा के अनमोल रत्न थे। ...और आगे

कहानी

मेरा मुझमें कुछ नहीं मेरा मुझमें कुछ नहीं
ट्रेन जब स्टेशन पर पहुँची तो सुबह होने ही वाली थी। उजाला पूरी तरह हुआ नहीं था। प्रभा चार बजे ही उठकर बैठ गई थी। ...और आगे

लघुकथा

ज्ञान का अहंकार
चीन के महान् दार्शनिक कन्फ्यूशियस एक बार घूमते-घूमते दूर के एक देश में पहुँचे। वहाँ के राजा ने उनके सामने तीन पिंजरे रख दिए। ...और आगे

कविता

आम्रपालि परिणय
चक्रमण करते महन्मान ऋषि को शिशु रुद्रन ने चौंकाया, नवजात बाला को देख ऋषि का हृदय द्रवित हो आया। ...और आगे

स्‍मरण

हिमांशु जोशी : मेरे मित्र एवं मार्गदर्शक हिमांशु जोशी : मेरे मित्र एवं मार्गदर्शक
३ दिसंबर, २०१८ को हिमांशु जोशी ८३ वर्ष की उम्र में चिरनिद्रा के आगोश में समा गए। यह समाचार सुनते ही हिंदी परिवार में शोक की लहर दौड़ गई। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

नए साल के इंतजार में नए साल के इंतजार में
जाने इस देश में कैसे लोग बसते हैं कि उन्हें नए साल की प्रतीक्षा रहती है? ...और आगे

संस्मरण

...किसी से अब क्या कहना ...किसी से अब क्या कहना
कुछ ही दिन तो शेष बचे हैं इस साल को बीतने में। कई महान् साहित्यकारों, कलाकारों का शताब्दी वर्ष, जो याद किए गए, वे भी धन्य थे, जो नहीं याद किए गए, वे भी। ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

यात्रा श्रीनाथ धाम की यात्रा श्रीनाथ धाम की
वैष्णव मत के पुष्टि मार्ग या बल्लभ संप्रदाय के भक्ति योग के इष्ट भगवान् श्रीनाथजी के विषय में मान्यता है, ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

तलाश
सुबह छह बजे फोन की घंटी बजी। मैं बिस्तर पर लेटा हुआ था। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

प्रथम प्रवृत्ति
तूरीरी बगदाद का धनी नागरिक था। वह अपने भले कामों के कारण हर जगह प्रसिद्ध था। ...और आगे

लोक-साहित्य

निराली है राजस्थान की संस्कृति निराली है राजस्थान की संस्कृति
'म्हा रो रंग-रंगीलो राजस्थान...,' इन पंक्तियों को सुनते ही राजस्थान की सतरंगी संस्कृति की तसवीर हमारे मस्तिष्क में उभर आती है। हर संस्कृति की अपनी पहचान होती है, ...और आगे

बाल-संसार

एक छोटा सा दीया एक छोटा सा दीया
बिन्नू छोटा ही था, पर उसके जीवन में उथल-पुथल मच गई थी। एक बार पैर भटके, तो फिर वे रास्ते पर आते ही न थे। ...और आगे