Prabhat Books
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संपादकीय

राष्ट्रीय सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के कुछ पक्ष
गणतंत्र दिवस का आयोजन इस वर्ष अभूतपूर्व रहा। पहली बार दस देशों के राज्याध्यक्ष, राष्ट्रपति अथवा प्रधानमंत्री मुख्य अतिथियों के रूप में सम्मिलित हुए। ...और आगे

प्रतिस्मृति

ब्रज में मनुष्य ईश्वर नहीं, ईश्वर मनुष्य है
अद्भुत आश्चर्य है कि ऐतिहासिक घटनाओं के दवाब में जिस क्षेत्र में नफरत की परत जमनी चाहिए, ...और आगे

आलेख

भारतीय लोक-संस्कृति का महापर्व : होली भारतीय लोक-संस्कृति का महापर्व : होली
भारतीय पुरातन संस्कृति और यहाँ की धार्मिक आस्थाओं से जुडे़ लोकपर्वों का हमारे जीवन में अत्यंत महत्त्व रहा है। ...और आगे

कहानी

दान-पुन्न दान-पुन्न
मेज पर गुड़ की पेसी पड़ी थी, जो अब चींटियों का भोजन बन गई थी। ...और आगे

उपन्यास अंश

स्वप्नदर्शी स्वप्नदर्शी
आज इंजीनियरिंग कॉलेज पूना का वार्षिक परीक्षा-परिणाम घोषित हुआ। ...और आगे

कविता

रूहें कुपोषण की शिकार क्यों
सजी-धजी, रंग-बिंरगी डिजाइनर दीवारों से घिरी हुई बड़े-बड़े अद्भुत से, शानो-शौकत का दम भरते हुए ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

बुद्धिजीवी का बदलाव बुद्धिजीवी का बदलाव
वह शहर का जाना-माना बुद्धिजीवी है। उसका जीव जो है वह बुद्धि के सहारे ही पला-बढ़ा है। ...और आगे

व्यंग्य

जब शिवशंकर ने होली खेली जब शिवशंकर ने होली खेली
शिवशंकर जब होली खेलने गए थे, तब बिल्कुल ठीक तरह थे, किंतु जब लौटकर आए तो विचित्र दशा में थे। ...और आगे

ललित निबंध

फगुनवा में होली है फगुनवा में होली है
फागुन बौरा और मस्ती में इठला रहा है। यह शोख-बदमाश जो कर दिखाए, वह कम है। ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

मनोहारी केरलम् मनोहारी केरलम्
केरल, मालाबार तट पर स्थित तथा अरब सागर से तटरेखा बनाता यह दक्षिणी राज्य 'गॉड्स ऑन कंट्री' यानी ईश्वर का अपना देश कहा जाता है। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

प्रेम तलाशता है प्रेम प्रेम तलाशता है प्रेम
मैं रच रहा हूँ एक गीत मैं रच रहा हूँ वह गीत, ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

ध्वनि
मैं अनेक हूँ। उनमें दो मुख्य हैं मेरी दृष्टिहीनता और मेरा इसलाम। ...और आगे

पुस्तक-अंश

नवदुर्गा
हिदू धर्मावलंबियों में माँ भगवती दुर्गा की पूजा-आराधना का विशेष महत्त्व है। माँ दुर्गा के अनंत रूप हैं। ...और आगे

लोकपर्व

भँवरजी म्हाने खेलण द्यौ गणगौर
होलिका दहन के दूसरे दिन से ही राजस्थान में गणगौर पूजन की गूँज होने लगती है। ...और आगे

बाल-संसार

कहाँ गई चेतना! कहाँ गई चेतना!
चेतना कुछ दिनों से स्कूल नहीं आ रही थी। ...और आगे