Prabhat Books
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संपादकीय

'साहित्य अमृत' : नींव से निर्माण तक
सन् २०१९ जाते-जाते कुछ दुःखद स्मृतियाँ देकर गया। ...और आगे

प्रतिस्मृति

बाबू गुलाबराय चिरस्मरणीय व्यक्तित्व बाबू गुलाबराय चिरस्मरणीय व्यक्तित्व
मैं एक मुकदमे की पैरवी करके वकील-भवन में आया था ...और आगे

आलेख

सिंहासन पर विदाई सिंहासन पर विदाई
पृथ्वी पर आने से पूर्व शिशु अन्यान्य संबंधों की डोर में बँध जाता है। ...और आगे

कहानी

बिरसी माँ बिरसी माँ
श्याम वर्ण पर्वत की तलहटी में बसा टोला। ...और आगे

लघुकथा

माँ का स्टांप पेपर
मायूसी के दिनों में अमूमन उसे माँ बार-बार स्मरण हो आती थी। ...और आगे

कविता

हमारे बाबूजी
कमरे के कोने में रक्खी, खाली कुर्सी बाबू की, बिन बोले ही बातें करती, खाली कुर्सी बाबू की। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

गरीब का चिकित्सालय गरीब का चिकित्सालय
हमारे प्रजातंत्र में ही क्यों, दुनिया भर में गरीबों का बड़ा महत्त्व है। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

हँसी और हँसी-व्रत
रात की वेला में लिया गया एक विशेष मुहूर्त का कोई निर्णय अथवा मन में उभर आई ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

मृतकों का मार्ग
अपेक्षा से कहीं पहले माइकेल ओबी की इच्छा पूरी हो गई। ...और आगे

ललित निबंध

वसंत की उत्कंठा :  जीवन की सौभाग्यश्री वसंत की उत्कंठा : जीवन की सौभाग्यश्री
जीवन एक उम्मीद है, संसार के साथ चलने की, संसार में रमे रहने की। ...और आगे

व्यंग्य

फकीरचंदजी की मृत्यु फकीरचंदजी की मृत्यु
कड़ाके की ठंड पड़ रही थी। ...और आगे

यात्रा-संस्मरण

आओ, चलें तीर्थराज चित्तौड़ आओ, चलें तीर्थराज चित्तौड़
भारतभूमि महान् है, जो अध्यात्म के साथ-साथ इतिहास की गौरवशाली धरोहरें सँजोए हुए है। ...और आगे

लोक-साहित्य

बुंदेली लोकगीतों में स्वास्थ्य-चेतना बुंदेली लोकगीतों में स्वास्थ्य-चेतना
प्राचीन काल से ही हमारे पूर्वज स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहे हैं। ...और आगे

बाल-संसार

माँ की गंध माँ की गंध
'मम्मी' ...बुखार आई तीन साल की शुनु चढ़कर माँ के पलंग पर बैठ गई ...और आगे