Prabhat Books
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मई 2020

IS ANK MEN

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संपादकीय

गौरवपूर्ण साहित्यिक शब्द-यात्रा
साहित्य अमृत के रजत जयंती अंक का संपादकीय लिखते हुए मुझे अत्यंत प्रसन्नता हो रही है। ...और आगे

प्रतिस्मृति

ठेस
खेती-बारी के समय गाँव के किसान सिरचन की गिनती नहीं करते। ...और आगे

कहानी

तुम मेरी माँ हो तुम मेरी माँ हो
वायुयान निरंतर तीव्र गति से आगे बढ़ रहा है। ऊपर नीलगगन है। ...और आगे

आलेख

संस्कृति संस्कृति
यह शब्द इस रूप में प्रयोग में बहुत कम आता था। अब यह शब्द अंग्रेजी शब्द 'कल्चर' के अर्थ को इंगित करने के लिए प्रयोग में बहुत और बहुधा आने लगा है। ...और आगे

लघुकथा

चार लघुकथाएँ चार लघुकथाएँ
"जब से ट‍्यूबलैस टायर चले हैं न साब," पहिए के नट खोलते हुए पंचरवाले ने बात चलाई, "धंधा एकदम आधा रह गया है। पहियों में हवा भरने के सहारे ही चल रही है रोटी।" ...और आगे

कविता

दो नवगीत दो नवगीत
पर यहाँ बच्चे नहीं हैं शाम है औ पार्क भी है ...और आगे

संस्मरण

मेरा समाज मेरा समाज
बालेंदुजी का दूसरी बार निमंत्रण आया था, फोन पर। इस निमंत्रण ने मुझे आश्चर्य में डाल दिया। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

हाँ में ना का निहित होना हाँ में ना का निहित होना
वे यादों के भूतबँगले में खोए बैठे हैं। समय की खासियत है कि वह सिर्फ आगे चलता जाता है, न किसी के रोके रुकता है, न लौटता है। ...और आगे

व्यंग्य

दो प्रधानमंत्रियों की एक कथा दो प्रधानमंत्रियों की एक कथा
राजनेता भी निर्वाचन वेला पर जिसे साष्टांग प्रणाम करता है उस साधनहीन, किंतु सिद्धिदायक मतदाता को नमस्कार है। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

कहानी दाढ़ी की... कहानी दाढ़ी की...
निनो की सही उम्र केवल छह साल है, ऐसा उसके बर्थ सर्टिफिकेट में लिखा है। ...और आगे

उपन्यास अंश

खिड़की खिड़की
अपने पति रोहित और उसके बीच बात को तो वहीं खत्म कर दिया सुधा ने...लेकिन उथल-पुथल उसके भीतर दूर तक चलती गई, चलती रही। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

तीन फकीर
आर्चएंजल नगर से सोलोवकी, जो डवीना नदी पर एक बंदरगाह था, के लिए एक पादरी जहाज में सवार हुआ। ...और आगे

आत्मकथा-अंश

वह मेरा पिता... वह मेरा पिता...
यह पिता दुर्धर्ष ऊर्जा का धनी था। यह बाँसुरी पर अल्हैया विलावल और हारमोनियम पर राग पीलू की बंदिशें निकालता था। ...और आगे

साक्षात्कार

स्त्रियों की बदलती स्थिति स्त्रियों की बदलती स्थिति
इतने लंबे अरसे के साहित्यिक जीवन में स्त्रियों की समस्याओं के बारे में क्या सोचा? ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

हूरों, हवाओं का नगर हूरों, हवाओं का नगर
कोई भी शहर अपना अतीत नहीं बताता। वह हथेली की रेखाओं की तरह गुँथा रहता है ...और आगे

बाल-संसार

सवाल का जवाब सवाल का जवाब
तिस दिन रविवार था। मैं कॉलोनी के मार्केट में जाने के लिए तैयार हुआ तो तन्मय भी साथ चलने की जिद करने लगा। ...और आगे