Prabhat Books
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संपादकीय

प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा प्रधानमंत्री की विदेश यात्रा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नौ दिन की जर्मनी, फ्रांस और कनाडा यात्रा उनकी पूर्व की विदेश यात्राओं की तरह हर दृष्टि से सफल कही जाएगी। ...और आगे

प्रतिस्मृति

'आत्म-निवेदन' 'आत्म-निवेदन'
वर्ष १९३३ में काशी नगरी प्रचारिणी सभा द्वारा आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी के अभिनंदन का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर आचार्य द्विवेदीजी ने जो उद्गार व्यक्त किए थे ...और आगे

कविता

ममता वह बचपन की ममता वह बचपन की
मरने पर ही माँ सबको याद आती है अपनी मरने से पहले दिन पहाड़ से याद नहीं आते, जंगल सी भुतही रातें। ...और आगे

आलेख

नियति की डाली पर खिला अकेला 'सुमन' नियति की डाली पर खिला अकेला 'सुमन'
आग, पानी, हवा, धरती और आकाश-इन पाँचों तत्त्वों को कभी भी, कहीं भी और कैसे भी जब कभी छुओ, सभी अपने-अपने प्राणतत्त्व और प्राणवत्ता का परिचय पूरी निश्छलता के साथ दे देंगे। ...और आगे

कहानी

'कुमुदिनी जल में बसे' 'कुमुदिनी जल में बसे'
रूपा बरामदे के कोनेवाले खंभे से टेक लगाकर बैठी है। पूरा आँगन, घर, बरामदा और छत रोशनी से नहाई हुई है। दो दिन बाद पोती का विवाह है। ...और आगे

डायरी-अंश

स्मृतियों के साथ दर्द जाग जाता है स्मृतियों के साथ दर्द जाग जाता है
सरस्वतीजी ने कहा, "एक दुकान पर जा रही हूँ। १५-२० मिनट में आ जाऊँगी।" वास्तव में हम दोनों कहीं जाते हैं तो कहकर जाते हैं, चाहे कुछ दूर जाना हो, चाहे अत्यंत पास जाना हो। ...और आगे

संस्मरण

रामनरेश त्रिपाठी : काव्य-संवेदना और शिल्प रामनरेश त्रिपाठी : काव्य-संवेदना और शिल्प
कविवर रामनरेश त्रिपाठी का देशी स्वच्छंदतावाद भारतीय सांस्कृतिक नवजागरण की सर्जनात्मकता का उजला रूप लेकर पाठकों के सामने ...और आगे

लघुकथा

सृष्टि
जब उसके अगले जन्म की बारी आई तो बूढ़ी की आत्मा चित्रगुप्तजी के पैर पड़कर रोने लगी, "नहीं! भगवन् नहीं, अब नहीं। अब धरती पर जाने की हिम्मत नहीं। नहीं कहलाना तनया रूप ले किसी कोख का दंश।" ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

जाम जानलेवा है
सड़कों का यह आलम है कि वहाँ चार से लेकर दुपहिया वाहनों की भरमार है। दो पहिए वाले सवार और सवारियाँ तो हैं पर दो टाँगों वाले इनसान सड़कों पर नजर नहीं आते हैं। चौराहों पर जो दिखते हैं, कुछ माँगते या बेचते हुए, वह उन मजबूरों का यथार्थ है, जो हमारे तथाकथित समाजवादी प्रजातंत्र की गरीबी बढ़ाने की खोखली व्यवस्था में पापी पेट के शिकार हैं। ...और आगे

ललित निबंध

कहाँ से शुरू हुए, कहाँ पहुँचे कहाँ से शुरू हुए, कहाँ पहुँचे
पानी बरस रहा है। बरसते पानी के बीच निमाड़ का छोटा सा गाँव यादों में उभर आया है। गाँव, जहाँ पर आँखें खुलीं। जहाँ खेतों में दौड़ते-कूदते सतरंगी ...और आगे

व्यंग्य

कोठीवाला कुत्ता कोठीवाला कुत्ता
अपने मोहल्ले में कोठीवालों को छोड़ सारे मोहल्लेवाले शाम होते ही एक-दूसरे के घर शान से पूरे रोब के साथ प्याज का गट्ठा, नमक की कलछी, सलाद के लिए हरी मिर्च तो कोई तड़के के लिए टमाटर लेने निकल पड़ता है। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

आइडिया
किसी ने घंटी बजाई कि वह झल्लाई बाघिन सी बेडरूम से उठी और चीखी, "क्या काम है भाई? अभी-अभी लेटी ही थी कि नींद ही हराम कर दी।" वह गाउन पर जल्दी-जल्दी दुपट्टा डालती हुई बाहर आई। बूढ़के टी.वी. पर बापू की कथा सुनने में तल्लीन थे। एक बार ही नहीं, कोई दस बार भी पूरे जोर से घंटी दबाए तब जाकर यह प्रेतात्मा सुन पाए। ...और आगे

संपादकीय

भामती
वाचस्पति सोच रहा था, ज्ञान का समुद्र अथाह है। उसमें गोते लगाने हैं। इतने कार्य करने हैं, पर समय तो अत्यंत सीमित है। उधर उसकी स्नेहमयी तथा आदरणीया माँ चाहती थी कि अब वह विवाह कर घर बसाए। माँ कहती है, "तुमने इतने वर्षों तक इतनी लगन से शास्त्रों का ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

आनंद यात्रा आनंद यात्रा
सुहाना सफर और ये मौसम हसीं, हमें डर है हम खो न जाए कहीं...' ए.सी. के बंद कोच में से बाहर के नजारों का आनंद लेते टे्रन के साथ मन भी जैसे भागा जा रहा था। ...और आगे

लोक-साहित्य

ऋग्वेद में लोक-जीवन की झाँकी ऋग्वेद में लोक-जीवन की झाँकी
विश्व के प्राचीनतम ग्रंथ ऋग्वेद में लोक-जीवन के विभिन्न चित्रों को देखना अपने आप में एक रोचक अनुभव है। प्रारंभ से लोक और वेद को कुछ इस तरह परस्पर विरोधी रूप में देखा गया है ...और आगे

बाल-कहानी

डॉक्टर मंकी
एक दिन चिड़ियाघर में रहनेवाले जानवर, पशु-पक्षियों में से कोयल और मोरनी के बच्चों को चिकनगुनिया हो गई। शेर ने अलग-अलग पेड़ की पत्तियों से काढ़ा बनाकर मोरनी और कोयल को दे दिया। मोरनी और कोयल ने वह काढ़ा अपने बच्चों को पिलाया। ...और आगे