Prabhat Books
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संपादकीय

जलियाँवाला कांड के सौ वर्ष, शहीदों को देश की श्रद्धांजलि
13 अप्रैल को अमृतसर के जलियाँवाला बाग हत्याकांड के सौ वर्ष पूरे हो गए। ...और आगे

प्रतिस्मृति

अंदमान के बंदीगृह में
काला पानी पहुँचते ही कैदियों को धुआँकश से उतारा जाता है और उन्हें सीधे उस द्वीप पर, सागर की ढलान पर बनाए हुए भव्य, मजबूत, विशाल तथा प्रमुख कारागृह में सशस्त्र पुलिस-पहरे में पहुँचाया जाता है। ...और आगे

कहानी

राम भरोसे राम भरोसे
अभी आधा ही अखबार पढ़ पाए थे चंद्रभूषणजी कि राम भरोसे ने घर से बाहर जाते-जाते कहा, "चाय थरमस में रख दी है, बड़े भैया।" ...और आगे

आलेख

हरिहर रूप का रहस्य हरिहर रूप का रहस्य
र्मिंप्राण भारत के मंदिरों में स्थापित 'हरिहर' की कल्पना को सामान्यतः मध्यकाल में तीव्र हो चले शैव और वैष्णव संप्रदाय के विवादों से जोड़ा जाता रहा है। ...और आगे

कविता

नेताजी उवाच नेताजी उवाच
मेरा समाज गहरे गड्ढे में जाए मुझे क्या मेरे समाज की नींव हिले हिलती रहे ...और आगे

आत्मकथा-अंश

माँ की वे ममतालु आँखें माँ की वे ममतालु आँखें
माँ को याद करता हूँ तो सबसे पहले उनकी आँखें याद आती हैं। ...और आगे

उपन्यास अंश

निस्तार निस्तार
कई-कई दिनों तक राजू, रेशमा, नौबू असहाय से जो भी करने को कहा जाता, खामोश उनके आदेशों का पालन करते रहे। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

भिखमंगों का देश भिखमंगों का देश
हमारे देश में दान की बहुत प्रतिष्ठा है। एक जमाना था कि राजा उदार मन और खुले हाथ से दान देते थे। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

भोला पंछी
हरि के आने के समाचार तो मिले, पर उससे मिलने का मन नहीं हुआ। किसी समय वह मेरा प्रगाढ़ मित्र के साथ अत्यंत ही गूढ था। ...और आगे

व्यंग्य

दरवाजा बंद, दिमाग खुला दरवाजा बंद, दिमाग खुला
दूरदर्शन पर प्रायः 'दरवाजा बंद तो...' कहते हुए दिखाई देते हैं। इसके पहले प्रसिद्ध नायिका 'जहाँ सोच, वहाँ...' वाला नारा बुलंद करती दिखती थी। ...और आगे

स्‍मरण

सफर में : मूरत, सुग्गा सफर में : मूरत, सुग्गा
स्मरण यानी याद, यादें! अच्छी हों तो बरबस ओठों पर खिल उठती हैं। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

मारक शत्रु
हम दोनों इकट्ठे यात्रा कर रहे थे। मेरे पास केवल एक ही घोड़ा था-अच्छा घोड़ा-मैं जानता हूँ कि वह अच्छा घोड़ा था ...और आगे

लोक-साहित्य

वर्तमान समस्याएँ एवं लोक की भूमिका वर्तमान समस्याएँ एवं लोक की भूमिका
भारत विश्व का सबसे मजबूत और विशाल लोकतंत्र है। ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

स्मृतियों के चलचित्र में एक सफरनामा स्मृतियों के चलचित्र में एक सफरनामा
कई दशकों से या कहूँ कि आधी शती के करीब हुआ होगा, जब से मैं धर्मशाला देखना चाहती थी, कर्नाटक में तिब्बती आवास देखना चाहती थी। ...और आगे

बाल-संसार

अद्भुत छात्रा अद्भुत छात्रा
नारियल के लंबे-लंबे पेड़, हरियाली और ठंडी-ठंडी पुरवा बह रही थी। ...और आगे