Prabhat Books
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दिसम्बर 2017

IS ANK MEN

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संपादकीय

व्यर्थ के विवादी मुद्दे क्यों?
कुछ राज्य सरकारें और सत्ताधारी व्यक्ति न जाने क्यों ऐसे मुद्दे उठाते हैं अथवा कुछ ऐसे कार्य करते हैं, ...और आगे

प्रतिस्मृति

धुँधलका धुँधलका
उसे लगता है, उसके पास सबकुछ है। वह संसद् की सदस्य है। इस नाते पूरी कोठी, टेलीफोन, रेल और हवाई यात्रा सहित उसके पास अनगिनत सुविधाएँ हैं। ...और आगे

कहानी

मैं चुनौती हूँ, पनौती नहीं मैं चुनौती हूँ, पनौती नहीं
मैं चाय पी रही थी कि ईशा ऑफिस से लौटी। "मैं जल्दी आ गई हूँ या तुम लेट चाय पी रही हो?" उसने पूछा। ...और आगे

लघुकथा

अब भुगतो
आज ग्रामसभा में अच्छी-खासी उपस्थिति थी। हो भी क्यों न, नए सरपंच को कार्य सँभाले एक वर्ष पूर्ण हो चुका है। ...और आगे

आलेख

भारत-विभाजन और मुसलिम समस्या पर आंबेडकर का अभिमत भारत-विभाजन और मुसलिम समस्या पर आंबेडकर का अभिमत
देश के मुसलमानों और भारत-विभाजन को लेकर भीमराव आंबेडकर के विचारों पर अभी भी विवाद होता रहता है। ...और आगे

कविता

लगता कैसी भूल हुई लगता कैसी भूल हुई
तन तो मस्ती में है झूमे, ढूँढ़ रहा मन मधुशाला, घर की छत की दीवारों में, दीखे जाला-ही-जाला। ...और आगे

स्‍मरण्‍ा

मनु शर्मा नहीं रहे! मनु शर्मा नहीं रहे!
आठखंडों में प्रकाशित प्रसिद्ध कथाकृति 'कृष्ण की आत्मकथा' के रचनाकार मनु शर्मा ने ८ नवंबर, २०१७ को इस नश्वर जगत् से विदा ली। ...और आगे

व्यंग्य

महिमा शॉर्टकट की महिमा शॉर्टकट की
शॉ र्टकट मारना मनुष्य की स्वाभाविक प्रवृत्ति है, पर हर कोई इसका लाभ प्राप्त कर ले, यह जरूरी नहीं। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

बोन्साई की कला और भारत बोन्साई की कला और भारत
बड़े पेड़ों का लघु संस्करण बनाकर उन्हें गमले में लगाने की तकनीक चीन ने ईजाद की। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

जय अंबे माँ
आश्विन महिना शुरू हुआ कि प्रतिपदा से लेकर नवमी तक नौ दिन और हाँ, नौ रातें भी नवरात्र-उत्सव की धूम शुरू हो जाती है। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

नर्तक
"विशाल विपत्तियाँ मुझे ज्यादा नहीं सतातीं।" ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

यात्रा मालवांचल की
यों तो प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कहीं-न-कहीं यात्रा करता ही है। ...और आगे

लोक-साहित्य

लोकजीवन में ऋतुगीत लोकजीवन में ऋतुगीत
ऋतुगीत किसी धार्मिक अनुष्ठान या संस्कारादि अवसर पर नहीं गाए जाते और न इनका संबंध सीधे तौर पर किसी व्यवसाय से रहता है। ...और आगे

बाल-संसार

कलाम के पाँच संदेश कलाम के पाँच संदेश
"विवान, चलो पीछे के बेंच पर बैठो। आज फिर तुमने इतिहास में बहुत गलतियाँ की हैं।" ...और आगे