Prabhat Books
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जनवरी 2022

IS ANK MEN

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संपादकीय

सामान्य दिनचर्या से परे...
वर्षों से यही क्रम चला आ रहा है। नए वर्ष के आगमन पर हम अपने जीवन के लिए कुछ नए संकल्प लेकर परिवर्तन की कामना करते हैं। ये संकल्प प्रायः बहुत हलके-फुलके से ही होते हैं कि हम सुबह जल्दी उठा करेंगे हम चाय में चीनी लेना बंद कर देंगे हम योग करना प्रारंभ कर देंगे...यह सूची बहुत लंबी है। कुछ प्रबुद्ध जन इसमें कुछ गंभीर संकल्प भी जोड़ लेते हैं। ये संकल्प कितना और कितने ...और आगे

प्रतिस्मृति

बच्चा
हवेली की किसी मंजिल से गिरकर बच्चा सीधे दालान के बीचोंबीच आ गिरा था। जब तक लोग देखें, तब तक उसके मुँह से निकले खून की धारियाँ इधर-उधर बहने लग गई थीं। असहाय और गिरने के आघात से बेहोश बच्चे का सिर एक तरफ लुढ़क गया था। कोई दौड़कर आया था और उसने सिर्फ बच्चे का मुँह कपड़े से ढँक दिया था। ...और आगे

कहानी

विश्वास विधि हाथ
ज्योंज्यों छुट्टी का समय करीब आ रहा था, रीना की परेशानी बढ़ती जा रही थी। रीना बारहवीं की छात्रा है, प्री-बोर्ड की परीक्षा सर पर है। देखा जाए तो पढ़ाई के अलावे उसे और किसी चीज से मतलब नहीं होना चाहिए। पर संयुक्त परिवार की बेटी है, इसलिए उसके एक ही नहीं नंबर ऑफ गार्जियंस हैं। सभी की ...और आगे

आलेख

जैनेंद्र कुमार : रचनात्मकता का सत्य जैनेंद्र कुमार : रचनात्मकता का सत्य
प्रेमचंद के जीवन काल में हिंदी में जो लेखकों की नई पीढ़ी उभरकर सामने आ रही थी, उनमें जैनेंद्र कुमार, बच्चन, रामकुमार वर्मा, महादेवी वर्मा, अज्ञेय, विष्णु प्रभाकर, प्रभाकर मामले, भँवरमल सिंघी, जनार्दन प्रसाद झा द्विज सुदर्शन आदि की एक लंबी सूची दी जा सकती है। प्रेमचंद अपने ...और आगे

आत्मकथ्य

मृत्यु से साक्षात्कार मृत्यु से साक्षात्कार
पत्रकारिता के छात्रों को सबसे पहले खबर या न्यूज की परिभाषा सिखाई जाती है। न्यूज एजेंसी हिंदुस्थान समाचार के दिनों में मैंने भी इस परिभाषा को आत्मसात् कर लिया था। लेकिन अब मुझे लगता है, ऐसी सभी परिभाषाएँ ठीक नहीं हैं। अब मेरा एक नई परिभाषा से सामना हुआ है। जिसका अपने से संबंध नहीं है, वह खबर है ...और आगे

दोहे

नववर्ष-२०२२
सूरज आया इक नया, गाने मंगल गीत। प्रियवर अब दिल में सजे, केवल नूतन जीत॥ उसकी ही बस हार है, जो माना है हार। साहस वाले का सदा, विजय करे शृंगार॥ बीते के संग छोड़ दो, मायूसी-अवसाद। नवल बनेगा अब धवल, देगा मधुरिम याद॥ खट्टी-मीठी लोरियाँ, देकर गया अतीत। वह भी था अपना कभी, था प्यारा सा मीत॥ जाते-जाते वर्ष यह, करता जाता नेह। अंतर इसका जनवरी, भले दिसंबर देह॥ फिर से नव संकल्प हो, फिर से ...और आगे

जिन्होंने जलाई स्वाधीनता की अलख

मदनलाल धींगरा मदनलाल धींगरा
वीर, निडर और निर्भीक देशभक्त मदनलाल धींगरा का परिवार अमृतसर में रहनेवाला एक संपन्न और अंग्रेज-भक्त परिवार था। उनके पिता डॉ. दत्तामल अमृतसर के ...और आगे

जिन्होंने जलाई स्वाधीनता की अलख

रामप्रसाद बिस्मिल रामप्रसाद बिस्मिल
अपनी प्राणाहुति देकर भारत माता को आजाद करानेवाले देशभक्तों में पं. रामप्रसाद बिस्मिल का नाम विशेष श्रद्धा के साथ लिया जाता है। उनका जन्म सन् 1897 में शाहजहाँपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था। उनके पिता का नाम श्री मुरलीधर था। वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं थे। ...और आगे

लघुकथा

अखबार और आदमी
अरे! भाई, पढ़ने के पश्चात् अखबार रद्दी से हो जाते हैं। हाँ। कुछ-कुछ मेरा भी ऐसा ही मानना है। तो फिर पडोसी को आप अभी अखबार दे देते। काहे को दे देता अखबार, पडोसी को। पढ़ने को, और क्या? ना-ना क्या मतलब है आपका? मतलब कि मेरे ये पडोसी भी एकदम एक अखबार की मानिंद ही हैं। कैसे कैसे...मैं समझा नहीं। अखबार ले जाने के बाद वापस लौटाने की नीयत नहीं होती पडोसी की, समझे। ...और आगे

व्यंग्य

चिंता न करो भई!
बहुत चिंतित होते होंगे न आप? आप अर्थात् माननीय वरिष्ठ व्यंग्यकार जन! हमारे बाद व्यंग्य किसी अंधी दिशा में भटक न जाए और भटकने से उसकी दशा जैसी है, उससे कहीं और भी बदतर न हो जाए तो आप लोग किंचित् भी चिंता न करें। आप कहेंगे, भला ऐसा क्या हो गया? तो जवाब है चीन देश द्वारा ...और आगे

संस्मरण

ट्रैवल ग्रांट
जीवन में कभी-कभी ऐसे क्षण आते हैं, जब कुछ ऐसा घट जाता है, जिसकी कोई संभावना दूर तक देखने में नहीं आती है। और शायद ऐसा बहुतों के जीवन में घटता होगा। मेरे जीवन में ऐसी बहुत सी घटनाएँ हैं, जिनका अजीब सा पूर्वाभास मुझे होने लगता था, यह अच्छा भी होता है और बुरा भी, लेकिन मुझे लगने लगता है कि कुछ घटनेवाला है। मुझे सँभलना चाहिए। वहाँ नहीं जाना चाहिए, ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

नए साल में नया क्या है? नए साल में नया क्या है?
यकुम जनवरी है, नया साल है, दिसंबर में पूछेंगे, क्या हाल है। हर नए वर्ष की पहली भोर अपने स्वर्गीय मित्र अमीर कजलबाश का यह शेर मन खुद बखुद ही गुनगुना उठता है। पहली जनवरी को लाने के लिए ३१ दिसंबर से ही तैयारी शुरू हो जाती है। ३१ की रात को तो बड़े होटल ही नहीं, ढाबे तक सजते हैं। पूरा शहर जगमगा उठता है। ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

मुन्नी के पाँव मुन्नी के पाँव
सच पूछिए तो मैं स्वयं ही नहीं जानता कि मैंने उनकी बात क्यों मान ली! और आज मैं वह सब याद करके भी काँप उठता हूँ। वहाँ मुझे एक बड़ी संस्था ने आमंत्रित किया था ...और आगे

निबंध

सत्यानाशी सत्यानाशी
सत्यानाशी यह भी कोई नाम हुआ? बड़ा ही अजीब नाम है, इसका। फिर जिसका नाम ही सत्यानाशी हो, उससे कोई क्या उम्मीद रखेगा? पर ऐसी बात नहीं है कि इस कलयुग में नाम के अनुकूल ही हर किसी का व्यवहार और व्यक्तित्व भी हो। तब तो यह हमारी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी अर्थात् जन्मभूमि स्वर्ग से ...और आगे

यात्रा-संस्मरण

नीले समंदर का देशथाईलैंड नीले समंदर का देशथाईलैंड
यात्राएँ हमें पुनर्जीवित कर देती हैं। रोजमर्रा की आपाधापी से मुक्त होकर कुछ अलग करना मन को खूब भाता है। नई जगह, नए लोग और नया परिवेश। अच्छा लगता है, जब उनकी जीवन शैली की तुलना हम खुद से करने लगते हैं और किसी भी समानता पर उल्लसित होते रहते हैं। ...और आगे

बाल-संसार

नया वर्ष नया वर्ष
प्यारे बच्चो! नया वर्ष आने का समाचार सुनकर भला किसका मन मयूर नहीं नाच उठता। सभी को सुख का आभास हो उठता है। और सभी लोग उसके आने की खुशी मनाते हुए झूम उठते हैं। मुख तो मानो ...और आगे

साहित्य अमृत मासिक का लोकार्पण

साहित्य अमृत मासिक का लोकार्पण साहित्य अमृत मासिक का लोकार्पण
तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकार दयाल शर्मा को 'साहित्य अमृत' का प्रवेशांक भेंट करते हुए प्रबंधक संपादक श्यामसुंदर, साथ में हैं पत्रिका के संस्थापक संपादक प. विद्धयानिवास मिश्र एवं प्रतिष्ठित साहित्यकार ...और आगे