Prabhat Books
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संपादकीय

कुछ अपनी, पनामा पेपर्स का खुलासा, वंदे मातरम् और भारतमाता की जय स्वतंत्रता संग्राम की
काफी समय के उपरांत साहित्य अमृत के पाठकों से पुनः संपर्क एवं विचार-विनिमय हो रहा है। यकायक अस्वस्थता और एक लंबे अरसे तक अस्पताल में रहने के कारण संपादकीय के माध्यम से जो विचार-विमर्श होता था, उससे वंचित रहा। ...और आगे

प्रतिस्मृति

बीवी की छुट्टियाँ बीवी की छुट्टियाँ
कन्नन अपनी झोंपड़ी के दरवाजे पर बैठा गाँव के लोगों की आवाजाही देख रहा था। तभी तेल बेचनेवाला सामी अपने बैलों को हाँकते हुए आया और वहाँ से गुजरते हुए कहने लगा, "आज तुम्हारे लिए फुरसत का दिन है, है न? तो फिर दोपहर को तुम मंटपम में क्यों नहीं आ जाते?" ...और आगे

कहानी

एक सच स्त्री और स्त्री का एक सच स्त्री और स्त्री का
कमलकांत रस्तोगी तब करनाल में प्राइवेट कंपनी के इंजीनियर थे, जब उनकी तीन बेटियों में से सबसे छोटी बेटी आग से बुरी तरह से जल गई थी, ...और आगे

आलेख

शिवाजी और आगरा शिवाजी और आगरा
शिवाजी के संबंध में आगरा के पुरातत्त्व विभाग के अध्यक्ष डी. दयालन का २७ जून, २००३ का लिखा हुआ पत्र प्राप्त हुआ था, जिसमें यह लिखा गया था कि शिवाजी एक शूरवीर मराठा राजा थे। लोगों के मसीहा और देश की शान थे। वे भारतीय इतिहास में महत्त्वपूर्ण स्थान रखते हैं। ...और आगे

लघुकथा

सीख सीख
सुबह से ही भाग-दौड़ करके, दोनों बच्चों को स्कूल भेजकर सीमा बैठी ही थी कि फोन बज उठा। छोटी बहन दिशा का फोन था। उसके पति सुमित की अचानक तबीयत खराब हो गई है, वह उसे ले जा रही है। घर पर दोनों बच्चे अकेले हैं। अतः वह एक-दो दिन के लिए उसके पास आ जाए। ...और आगे

कविता

ओ राष्ट्र प्रहरी!
ओ! शाश्वत, शांत प्रहरी, तेरे दर्शन को विकल यह हिंद-सिंधु लहरी, यह धवलता या स्निग्ध हास, या शिवा (पार्वती) का लास्याभास। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

मुरगे का मुगालता मुरगे का मुगालता
मियाँ साहब के अहाते के मुरगे को कौन नहीं जानता है? मियाँ साहब भी उस पर मेहरबान हैं। जब वह कलगी का ताज पहने शीश मटकाता, इतराता टहलता है तो मियाँ साहब का सिर ...और आगे

संपादकीय

कविता और सोच कविता और सोच
बिना सोच के कविता नहीं होती। कविता है तो सोच है। अगर सोच के बारे में गहराई से जानना हो तो यह रोचक लग सकता है कि मूल शब्द 'शोच' या 'शोक' है। मैं यह कोई भाषाशास्त्रीय स्थापना नहीं दे रहा हूँ। कुछ लोगों को ये दो शब्द अर्थ की ...और आगे

साहित्य का भारतीये परिपार्श्व

दुआ
जमीन किसी प्रेम दीवानी नारी के हृदय जैसी नरम पड़ गई थी। पैर रखने से पहले ही विचार करना पड़ता है, न हो कहीं धँसी रह गई तो? रेशम को लगा, तब तो मुसीबत हो जाएगी। यहाँ तो आवाज भी किसे लगाई जाए? ...और आगे

व्यंग्य

यमपुरी में हड़कंप
उन दोनों यमदूतों का आज साप्ताहिक अवकाश था, सो आराम फरमा रहे थे और टी.वी. पर फिल्म का आनंद ले रहे थे-वैसे तो यमदूतों का काम कभी खत्म नहीं होता, पर जब से बॉस यमराजजी ने नए यमदूत नियुक्त किए हैं, हफ्ते में एक छुट्टी सबको मिल जाती है, ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

दंपती
व्यापार है ही बुरी चीज। मुझे ही लीजिए। दफ्तर के काम से जब थोड़ी देर के लिए भी मुझे छुट्टी मिलती है तो मैं अपने नमूनों की पेटी उठाकर खुद ही अपने ग्राहकों से मिलने चल देता हूँ। बहुत दिनों से मेरी इच्छा एन. के पास जाने की थी। ...और आगे

लोक-साहित्य

बुंदेलखंडी जनजातियाँ व उनके लोकोत्सव बुंदेलखंडी जनजातियाँ व उनके लोकोत्सव
हमारा देश विभिन्न धर्मों-समुदायों, भाषा-बोली, प्राकृतिक रचनाओं का अद्भुत संगम है और अनेकताओं में एकता को समाहित किए है। आज हमारा देश प्रत्येक क्षेत्र में विकास कर रहा है। संसार के साथ कदम मिलाकर चलने का प्रयास कर रहा है। ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

सौराष्ट्र की तीर्थ परिक्रमा सौराष्ट्र की तीर्थ परिक्रमा
नव वर्ष २०१६ के दूसरे ही दिन सौराष्ट्र यात्रा का कार्यक्रम बन गया। इस बार चाचा रवि की बिटिया की शादी का कार्ड भगवान् द्वारकाधीश को भेंट करना है। सो सात सदस्यीय यात्री-दल में हैं- ...और आगे

बाल-संसार

ईश-वंदना ईश-वंदना
हम बालक छोटे नादान। सब जग पालक आप महान॥ विनय भावना हम क्या जानें, गिनती, अक्षर पढ़ना जानें। ...और आगे