Prabhat Books
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संपादकीय

गजेटियरों का पुनर्लेखन, नई शिक्षा नीति कब तक? प्रधानमंत्री मोदी के सात मंत्र
ज्ञात हुआ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदेशानुसार मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने जिलों के गजेटियर पुनः लिखवाने का निश्चय किया है। यह अत्यंत आवश्यक हो गया है, क्योंकि पिछले वर्षों में नए-नए राज्यों का निर्माण हुआ है। पहले आंध्र प्रदेश के बनने के लिए संघर्ष हुआ और ...और आगे

आलेख

मेस आयनाक : भारत को पुकारते बौद्ध अवशेष मेस आयनाक : भारत को पुकारते बौद्ध अवशेष
'शाहबुद्दीन! पहचानो इसे! यह तुम्हारी ही आबरू...' फिल्म 'पाकीजा' में वरिष्ठ अभिनेत्री वीना की ओजस्वी ललकार अनजाने मेरे हृदय में गूँज उठी, जब मैंने प्राचीन बौद्ध नगर 'मेस आयनक' ...और आगे

लोक-साहित्य

उसको क्या नाम दूँ? उसको क्या नाम दूँ?
सकल ब्रह्मांड एक विशेष अदृश्य तरंगों से संचालित है। यह अनूठा जगत् है, जिसमें तरंगवाद का दर्शन तरंगित है। इन तरंगों का जगत् इतना सूक्ष्म है कि उसे किसी से अलग नहीं किया ...और आगे

बाल-संसार

आई खुशियों वाली रुत आई खुशियों वाली रुत
सुबह-सवेरे छत पे आए मेहमान ये बिना बुलाए, संगी-साथी को भी लाए। ...और आगे

कहानी

मोगरा महकता रहा मोगरा महकता रहा
उसने खिड़की से बाहर झाँककर देखा, पीले ट्यूलिप की कई कतारें उग आई थीं। किंतु घुटनों तक उगी जंगली घास जाने क्यों ऐंठी खड़ी थी? भीगी ओस की नन्ही-नन्ही बूँदें हर नजारे पर बिखरी पड़ी थीं। लग रहा था, जैसे सूरज से कुछ रोशनी उधार लेकर व्यवहार में पारदर्शिता बरत रही हो। ...और आगे

गीत

फिर एक महाभारत रच दो फिर एक महाभारत रच दो
हे युग द्रष्टा! हे युग स्रष्टा हे युग संस्थापक! युगाधार! तेरी महिमामय प्रभुता को ...और आगे

लघुकथा

चपाती की संवेदना
"आंटी!" भिखारी उसके घर के बाहर खड़ा था, "एक चपाती दे दो, कल से भूखा हूँ!" "क्या... चपाती!" क्षणों में ही उसके कदम आगे बढे़ और फुरती से उसके गालों पर एक चपत रसीद कर दी। ...और आगे

ललित निबंध

कदंब कहाँ है कदंब कहाँ है
देश के मौसम विभाग ने पिछले महीने भविष्यवाणी की थी कि इस बार मानसून दो दिन पहले ही केरल के दरवाजे पर दस्तक दे देगा। कोलकाता महानगर की उमस भरी गरमी में जीनेवालों के लिए यह भविष्यवाणी कम मोहक न थी। पर जैसा कि आमतौर पर सुनहरे सपनों के साथ होता रहा है, ...और आगे

प्रतिस्मृति

शिष्टाचार शिष्टाचार
जब तीन दिन की अनथक खोज के बाद बाबू रामगोपाल एक नौकर ढूँढ़कर लाए तो उनकी क्रुद्ध श्रीमती और भी बिगड़ उठीं। पलंग पर बैठे-बैठे उन्होंने नौकर को सिर से पाँव तक देखा और देखते ही मुँह फेर लिया। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

पान और पत्थर फेंकने की प्रवृत्ति पान और पत्थर फेंकने की प्रवृत्ति
ज्ञानी विद्वान् मानें या न मानें, अपना अनुभव है कि इधर दो ही चीजें प्रगति पर हैं-आरक्षण के प्रस्ताव और पत्थर फैंकने की आदत। हमें विश्वास है कि सियासी दल ...और आगे

साहित्य का भारतीये परिपार्श्व

राह
हसिया जैसे घुमावदार पहाड़ी राह से कुरवय्या उतर रहा था। उसके पीछे उसके गाँववाले चल रहे थे। दूर से देखने पर मानो पहाड़ से कोई अजगर लिपटा हो, ऐसा प्रतीत होता था। अरहर, भुट्टा, कोचई, जौ, बाजरा और राह के दोनों ओर की गई खेती, हरे-भरे लहलहाते पेड़-पौधे; पहाड़ के नीचे से देखनेवालों को खूबसूरत नजारा नजर आता था। ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

गुलाबी मोती
मेरे एक अभागे मित्र ने मुझसे यह कहा- "यह ऐसा आदमी है, जो अपने आपको सारा दिन बंद करके काफी पैसा कमाने के लिए देर तक काम करता है, ताकि जिस औरत को वह प्यार करता है, उसकी चंचलता की संतुष्टि कर सके-औरत जो थोड़ा जमा करके एक विशेष राशि से अपने मन की मौज को संतुष्ट करने के आनंद को समझ सकती है। ...और आगे

व्यंग्य

जन्मदिन का अर्थशास्त्र जन्मदिन का अर्थशास्त्र
मैं इस बार पहली मार्च को अपनी तनख्वाह ले जैसे ही घर की ओर चला तो मन रास्ते में घर-खर्च के आइटमों की बार-बार उल्टी-सीधी गिनती करने में उलझ गया। इसी उधेड़बुन में मैं घर पहुँच, ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

बिताएँ वीरभूमि पर चंद दिन बिताएँ वीरभूमि पर चंद दिन
दिसंबर का महीना, जहाँ उत्तर भारतीयों के लिए शीतकाल है, वहीं मध्य भारत, विशेष रूप से राजस्थान के लिए वसंत। जब यहाँ गुलाबी ठंड की अनुभूति होती है, ऐसे में पर्यटन के शौकीनों को वहाँ जाने का अवसर मिल जाए तो बात ही क्या! यह भी संयोग कहिए कि एक गाड़ी (कालका-जोधपुर) पटियाला होकर जाती है। ...और आगे