Prabhat Books
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नवंबर 2021

IS ANK MEN

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संपादकीय

उजालों को पुकारें
दृश्य एक : यह एक प्रतिष्ठित सरकारी विद्यालय है। वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हैं। अमृत महोत्सव के उपलक्ष्य में हिंदी पखवाड़े का समापन समारोह भव्य रूप में आयोजित किया गया है। एक कवि-सम्मेलन का आयोजन किया गया है। उद्घोषणा में बताया जा रहा है कि कई हजार छात्र एवं उनके माता-पिता इस कवि-सम्मेलन को ऑनलाइन सुन रहे हैं। ...और आगे

प्रतिस्मृति

एक दीये की दीवाली एक दीये की दीवाली
गणेश किसी से हार मानने वाला नहीं था। मधुवनी के छोटे से गाँव के कोने में बसी दस झोंपडि़यों में से एक झोंपड़ी उसकी थी। उसका जीजा उसे शहर उठा लाया था। उमर होगी पंद्रह-सोलह की। यह तो हमारा अनुमान था। जब उसकी माँ को ही बेटा के जन्म की न तिथि, न महीना, ...और आगे

कविता

बन तारक, गीत गाते
मुझे बाँधने मुझे बाँधने आते हो अनंत सीमा में चुपचाप क्या भिन्न कर पाओगे चाहे जिस विधि लो नाप। तुषार घुले पथ पर आते पुलकित होते, रोओं से पात भूल अधूरा खेल यहीं मुझे सुलाते सारी रात मिल तुमसे उड़ जाता रह जाता तन काँप-काँप; मुझे बाँधने आते हो अनंत सीमा में चुपचाप। ...और आगे

कहानी

अपराधी अपराधी
रश्मि गौड़ सोमा को आज सुबह से ही रह-रहकर दर्द उठ रहे थे। उसे पता था कि उसका दूसरा बच्चा बस पधारने ही वाला है। पर करती क्या? गरीब की जोरू ठहरी, घर के सारे कामकाज निपटाने में लगी थी। चार साल की बेटी अनु भरसक अपनी माँ के साथ लगी थी, उसे लगता कि क्या न कर दे वह अपनी अम्मा के लिए, परंतु इतनी छोटी बच्ची चुपचाप ...और आगे

आलेख

साहित्य में विविध रूपा लक्ष्मी साहित्य में विविध रूपा लक्ष्मी
प्राचीन साहित्य में लक्ष्मी के संबंध में जो सामग्री प्राप्त होती है, उनमें उस काल की लक्ष्मी के स्वरूप का परिचय मिलता है, परंतु विस्तृत जानकारी प्राप्त नहीं होती। हमारे महाकाव्योंरामायण और महाभारत में जो देवी-देवताओं की प्रतिमाएँ प्राप्त होती हैं, उनमें लक्ष्मी के स्वरूप का वर्णन मिलता है। ...और आगे

जिन्होंने जलाई स्वाधीनता की अलख

तात्या टोपे
तात्या टोपे सन् १८५७ के विद्रोह के एक महान् सेनानी थे। वे पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र नाना साहब के यहाँ लिपिक थे। तात्या और नाना बालसखा भी थे। तात्या टोपे अपनी असाधारण वीरता और रण-कौशल के कारण एक सामान्य लिपिक के पद से उठकर नाना साहब की सेना के नायक पद तक पहुँचे। वे मराठा सेनानायकों की कुशल युद्धनीति ...और आगे

स्‍मरण

कला-संस्कृति के संरक्षण को समर्पित अमीरचंदजी कला-संस्कृति के संरक्षण को समर्पित अमीरचंदजी
माननीय अमीर चंदजी से मेरा संबंध दशकों पुराना है। हमारे इस आत्मीय संबंध की धुरी पूर्वोत्तर ही थी। उस समय तक मेरे कई रेडियो धारावाहिक पूर्वोत्तर की रामायण एवं लोककथाओं ...और आगे

लघुकथा

दीये का दीया
एक संत ने दीपावली पर माटी के दीये जलाने का सुझाव देते हुए पूछा, इससे कितने परिवारों को मदद मिलेगी। एक ने उत्तर दिया, एक कुम्हार के परिवार को। दूसरे ने उत्तर दिया, दो को कुम्हार व तेली के परिवार को। तीसरे से पूछा, उसका उत्तर था तीन, कुम्हार, तेली व जुलाहे के परिवार ...और आगे

रेखाचित्र

बशीरा
वह गाँव का अंतिम छोर। खाली चौड़ी जगह। जिसके बीचो-बीच विशाल बरगद का छायादार पेड़। विशाल भुजाओं को सँवारे। उसके मोटे तने को घेरे, जमीन से उठा था एक छोटा सा चबूतरा। इसी चबूतरे पर मोहल्ले भर के लोगों का जमघट लगा रहता। यहीं देश दुनिया और गाँव भर की बातों का सिलसिला चलता। वहीं बगल में गाँव की बड़ी पोखर। ...और आगे

राम झरोखे बैठ के

महामारी में चुनाव महामारी में चुनाव
अपनी-अपनी अनिवार्यता है। प्रसिद्ध विद्वान् पी. लाल का मानना है, कि गतिशील और जीवंत प्रजातंत्र में चुनाव होने ही होने वरना महामारी के दौरान चुनाव करवाने को सोचता ही कौन? वह भी तब, जबकि सब जानते हैं कि इस ...और आगे

साहित्य का भारतीय परिपार्श्व

रूपांतर रूपांतर
दोपहर का सूरज अपना प्रभाव पूरी ताकत से दिखा रहा था। गरमियों के मौसम में चमड़ी को जला देने वाली प्रखर गरमी के बीच अहमदाबाद के गीता मंदिर के एस.टी. बस डिपो पर लोगों की भीड़ जमी हुई थी। कोई बैठा हुआ था, कोई सो रहा था, कोई बैठने की जगह न मिलने के कारण ...और आगे

साहित्य का विश्व परिपार्श्व

दिन भर का इंतजार दिन भर का इंतजार
जब वह खिड़कियाँ बंद करने के लिए कमरे में आया, तो हम सब बिस्तर पर ही लेटे थे और मैंने देखा कि वह बीमार लग रहा था। वह काँप रहा था उसका चेहरा सफेद था और वह धीरे-धीरे चल रहा था जैसे चलने से दर्द होता हो। क्या बात है, शैट्ज? मुझे सिरदर्द है। बेहतर होगा, तुम वापस बिस्तर पर चले जाओ। नहीं, मैं ठीक हूँ। ...और आगे

लोक-साहित्य

मिथिला का लोक-पर्व सामा-चकेवा मिथिला का लोक-पर्व सामा-चकेवा
धर्म और संस्कृति के इंद्रधनुषी रंग बिखेरती मिथिला की सुभाषित और पावन भूमि अपने विभिन्न सांस्कृतिक अनुष्ठान, लोकरंजन और सामाजिक महोत्सव के लिए सुविख्यात है। ...और आगे

बाल-संसार

दो बालकथाएँ दो बालकथाएँ
मुझे तो चाहिए ही आपको जब भी कोई काम पड़ता है तो कामवाली जीजी से या फिर पड़ोस के सनी भइया को बुलाकर करवाती हैं, मुझसे क्यों नहीं करवातीं? निशू ने कारण पूछा। तुम अभी छोटे हो, तुम्हें मार्केट कैसे भेज सकती हूँ। ...और आगे

यात्रा-वृत्तांत

हूरों के देश का सफर हूरों के देश का सफर
मेरा विदेश सेवा में आने का एक और कारण था विभिन्न देशों की यात्रा करना। इसलिए जब दिल्ली में ट्रेनिंग के दौरान पता चला कि हमारी अफगानिस्तान यात्रा होने वाली है तो रोमांच हो आया। तुरंत घर पर नहीं बताया कि सब डर जाएँगे और व्यर्थ यात्रा में विघ्न डालेंगे। खासकर मैया, दादी और बाबूजी। ...और आगे

साहित्य अमृत मासिक का लोकार्पण

साहित्य अमृत मासिक का लोकार्पण साहित्य अमृत मासिक का लोकार्पण
तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. शंकार दयाल शर्मा को 'साहित्य अमृत' का प्रवेशांक भेंट करते हुए प्रबंधक संपादक श्यामसुंदर, साथ में हैं पत्रिका के संस्थापक संपादक प. विद्धयानिवास मिश्र एवं प्रतिष्ठित साहित्यकार ...और आगे