कविताओं में गांधी

सत्य पर अटल आस्था, निश्छल शरीर,

ढँकने को कुछ नहीं, नंगे फकीर।

दुखियों के दुःख में हृदय का उँडेला रुधिर,

सब कुछ समर्पित तुम्हारा, नंगे फकीर!

क्षणभर में न भूली दुर्दशा दुःखी की,

सम्मान को ठुकरा चले, नंगे फकीर!

अपने हाथ से सौंपा खोया हुआ रत्न,

दुःखी के हाथ में दिया डाल चक्र सुदर्शन।

विशाल हृदय में तैंतीस करोड़ को दिया स्थान,

भारत देवता तुम्हीं नंगे फकीर।

पृथ्वी का महाप्रतापी शक्तिशाली अंबरभेदी गिरिराज

नत मस्तक हुआ तुम्हारे आगे।

तुम्हारे मुख से निकला शब्द गंभीर,

भारत की वज्रवाणी, नंगे फकीर!

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