बादल की ओट से

बादल की ओट से

जानी-मानी साहित्यकार। सात कहानी-संग्रह, सात उपन्यास, तीन कविता-संग्रह, छह ललित-निबंध एवं अन्य विधाएँ, तीन पुस्तकें अंगे्रजी में, तीन अनुवादित पुस्तकें तथा कई उपन्यास, कहानी, कविता आदि पाठ्यक्रमों में शामिल। ‘सर्जना पुरस्कार’, ‘यशपाल पुरस्कार’, ‘भारतेंदु प्रभा’ सहित कई अन्य सम्मान। संप्रति कार्यक्रम अधिशासी, आकाशवाणी दूरदर्शन।

रुक जाता यम

देवता के सम्मुख

गुनगुनाई जा रही

कोई ऋचा

तुम्हारे लिए,

गवाक्ष पर आ-आकर बैठती

कोई नन्हीं चिड़िया

चुटकी भर चावल की आस में

बादल की ओट से

अर्घ्य के लिए तुम्हारी राह देखता

क्षितिज में लाल सूरज

गुड़हल की डाल पर हँसता

लाल डहाडह अकेला वह फूल

जोह में तोड़ लेने के

तुम्हारी उँगली पकड़

बाहर घूमने की जिद के साथ

प्रतीक्षा में मचलता नन्हा कान्हा

क्या इन प्रतीक्षाओं के बारे में

बता नहीं सके थे तुम यम को

अपनी जर्जर देह से निकलने से पहले?

क्योंकि रुक जाता वह भी

इतनी मखमली प्रतीक्षाओं के

पूरी हो जाने की प्रतीक्षा में

ओ मेरे पिता!

सपनों की जमीन पर

तुम अपने सपनों की जमीन पर

चलाते थे हल

चीरते थे धरती का सीना

हराई-दर-हराई,

सधे हाथों से

माँ गिराती जाती थी बीज

आँचल से निकाल

धीरे-धीरे

कुछ इतना कि

धरती के चिरे सीने को

चोट ना लगे

दो जोड़ी आँखों की नमी

काफी थी

सपनों के अँखुआने के लिए

पर सपनों की जमीन पर उगी

सपनों की फसल

कट ही जाती है

अपनी जमीन से

नहीं जुड़ी रह पाती,

पीपल, बरगद या आम की तरह

ओ मेरे पिता!

काँपती तर्जनी

अपना हस्ताक्षर करते भी

काँपती तुम्हारी तर्जनी में

सोचती हूँ

कितनी बला की शक्ति थी

जिसे थाम॒

हम लाँघ जाते

कितने दुर्गम, कँटीले रास्ते,

घूम आते मेले-ठेले

देख आते रावण का मरना

राम का वन-गमन

या कि

रामलीला में दशरथ का विलाप,

बारात के कानफोड़ू संगीत

और भीड़ में

खो जाने के डर से

और कसकर भींच लेते हम

तुम्हारी तर्जनी

जो कवच थी हमारी

बिल्ली की म्याऊँ से लेकर

भूत-प्रेत

और मुरदों तक के

डर के विरुद्ध।

हम खड़े होते थे तनकर

ईश्वर के भी समक्ष

बिना डरे

आज जब देखती हूँ

अपने आस-पास

अपने बेहद प्रिय

बूढ़े-बुढ़ियों का

एक-एक कर मर जाना

ढूँढ़ते हैं

उस कँपकँपाती

तुम्हारी तर्जनी को

एक बार फिर

कसकर पकड़ लेने को

अब मेरे झुर्रियों भरे हाथ

ओ मेरे पिता!

 

मधुवन, सा. १४/९६ छ ५

सारंगनाथ कॉलोनी

सारनाथ, वाराणसी-२२१००७

दूरभाष : ९७९२४११४५१

—नीरजा माधव

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