राजा लुई और विवाहित पुरुष

फ्रांस का राजा लुई ग्यारहवाँ बगैने में रहता था, क्योंकि राज्य में गड़बड़ी चल रही थी। वह एक बार शिकार खेलने गया। उसकी मुलाकात केनन नामक व्यक्ति से हुई। केनन सामान्य व्यक्ति था। ऐसे व्यक्तियों में राजकुमार लोग प्रायः रुचि रखते हैं और उनसे मेल-मिलाप करके खुशी महसूस करते हैं।

शिकार के बाद राजा प्रायः केनन के घर जाता और उसके साथ प्रसन्नता से मूली खाया करता था।

कुछ समय बीत जाने के बाद जब राजा को घर लौटने और फ्रांस पर पुनः राज्य करने का अवसर मिला तो केनन की पत्नी ने केनन को परामर्श दिया कि वह बढि़या किस्म की मूलियाँ ले जाकर राजा को दे आए और उसके दिमाग में यह बात डाल दे कि ये उसने घर पर स्वयं उगाई हैं। केनन ऐसा करने पर राजी नहीं हुआ।

‘‘क्या मूर्ख औरत हो!’’ उसने कहा, ‘‘बड़े राजकुमार ऐसी छोटी-छोटी प्रसन्नताओं को याद नहीं रखते।’’

परंतु ऐसा कहने के बावजूद उसको तब तक चैन नहीं आया, जब तक अच्छी तथा सुंदर नजर आनेवाली मूलियाँ लेकर केनन दरबार की ओर नहीं चल पड़ा, परंतु रास्ते में एक सबसे बड़ी मूली को छोड़कर केनन बाकी सब मूलियाँ खा गया।

केनन दरबार में पहुँचा और उस स्थान पर खड़ा हो गया जिसके पास से राजा प्रायः गुजरा करता था। राजा आया और उसको पहचानकर अपने पास बुलाया। केनन ने आगे बढ़कर राजा को प्रसन्नतापूर्वक मूली भेंट की।

राजा ने उसे प्रसन्नता से ग्रहण किया और अनुचर को आदेश दिया कि वह मूली को उसके प्यारे रत्नों में रख दे; फिर केनन को अपने साथ भोजन करने का आमंत्रण दिया।

भोजन समाप्त हो गया तो राजा ने केनन को धन्यवाद दिया। जब राजा ने देखा कि केनन घर लौटने वाला है तो उसने मूली के बदले उसको सोने के एक हजार सिक्के दिए।

जब राजा के महल में इस बात का पता चला तो एक दरबारी ने राजा को एक प्यारा छोटा घोड़ा भेंट किया। राजा ने भाँप लिया कि यह घोड़ा उसको इसलिए दिया जा रहा है कि उसने केनन पर कृपा की है, फिर भी उसने उपहार को प्रसन्नतापूर्वक स्वीकार किया। उसने अपने मंत्रियों से बातचीत की कि घोड़े के बदले में क्या दिया जाए। घोड़ा वास्तव में बहुत ही अच्छा और प्यारा था।

घोड़ा भेंट करनेवाले ने आशा लगा रखी थी कि यदि उसे मूली का इतना अच्छा बदला दिया गया है, जबकि वह एक देहाती ने भेंट की थी, तब मैं तो एक दरबारी हूँ, इसलिए घोड़े का बदला और अधिक होगा।

जब इस मामले में राजा के पूछे जाने पर सब लोग अपनी-अप॒नी राय दे चुके तो अंत में राजा बोला, ‘‘मुझे याद आ गया कि हमें इसको क्या देना चाहिए!’’ उसने मंत्री को कान में आदेश दिया कि कमरे में सिल्क में लपेटकर रखी वस्तु लाई जाए। शीघ्र ही मूली लाई गई। राजा ने अपने हाथों से दरबारी को उसे देते हुए कहा—

‘‘हमारा अनुमान है कि यह रत्न, जिसपर हमारे सोने के एक हजार सिक्के खर्च हुए हैं, तुम्हारे घोड़े का अच्छा बदला है।’’

दरबारी अति प्रसन्न होकर अपने रास्ते पर चला गया। जब उसने उसे खोला तो देखा कि वह सड़ी-गली मूली थी।

हमारे संकलन