फिर जन्म लेना

फिर जन्म लेना

ललित निबंधकार। पत्र-पत्रिकाओं में ललित-निबंध का निरंतर प्रकाशन। नर्मदा के घाटों का निरंतर भ्रमण। नर्मदा की सहायक नदी एवं सतपुड़ा पहाड़ का भ्रमण।

तेरी रगों में दौड़ता है खून जो उसे याद करना

एक वीर की माँ वचन दे अपने हिया में लाना

चाहे नीर की बदरी घिरी हो, चाहे सर्द अँधेरी रात हो

चाहे लू की हवा हो, इन हवाओं से बतियाना

भले ही गहरी सागर की ऊँची लहरें हों

या सियाचीन पर हिम की दुर्गम खाई हो

चाहे मरू भूमि में ऊँचे-नीचे रेत के पहाड़ हों

हर एक जगह साँसों में स्वर भरना

है भरोसा मुझे हर बुलंदी छुएगी तुझे

आए अवसर यह भले ही

हो अकेला, दुश्मन अनेक

चाहे खंदक हों, खाई अनेक

फिर एक पैर कटकर लटका हुआ

एक हाथ कटकर गिर गया

बहने लगी रूधिर की धार

हो जाए बदन लहू-लहू

तेरी रगों में दौड़ता है खून उसे याद करना

हर रूधिर की बूँद उठ खड़ी होगी

फिर छाती से चलकर दनदन बंदूक चलाना

हो जाए छलनी छाती पर पीठ ना दिखाना

यह चोला फिर ना काम पडे़गा

ललकार हुंकार लिए साँसों को पुरजोर लगाना

इस धरती की रज-रज को चंदन सा लगाना

अपने कतरे-कतरे को न्योछावर करना

उठ आए प्रेम बबूला आ जाए घर की याद

छलकाना प्रेम हदय से माँ का ध्यान लगाना

जब अंतिम साँस चलेगी

जब अंतिम खून-खून का कतरा-कतरा बचने को

ऐ मेरे वीर सिपाही वेदना की भाव ना आने देना

खुशियों के आँसू ले, इस धरती पर

बार-बार जन्म लूँ  यह अंतिम इच्छा जतलाना

फिर भले ही रूधिर में लिपटी अर्थी ले कोई आ जाना

सजाऊँगी आरती तू मेरी कोख में फिर जनम लेना।

नर्मदाप्रसाद सिसोदिया

ऑफीसर रेजिडेंसी, कंचन नगर,

रसूलिया, होशंगाबाद (म.प्र.)

दूरभाष : ९९२६५४४१५७

हमारे संकलन