बताओ तो जानें

बताओ तो जानें

: एक :

कागज की उसकी है काया

होता है उसमें संदेश,

बिना पंख के वह जाता है

चाहे हो वह देश-विदेश।

इसमें मन की बातें होतीं

अपनेपन का नाता,

टिकट लगी होती है उस पर

जिसे डाकिया लाता।

: दो :

मैं हूँ इक नन्ही-सी चिडि़या

फुदक-फुदककर चलती हूँ,

पेड़ों पर है मेरा बसेरा

घर-आँगन में पलती हूँ।

जहाँ जगह मिल जाती मुझको

वहीं घोंसला बन जाता,

मानव की बस्ती में रहना

मुझको हरदम है भाता।

: तीन :

जिसको बस्ते में रखते हैं

विद्यालय में भी पढ़ते,

जिसको पढ़कर सारे बच्चे

अपना जीवन गढ़ते।

वह है सच्ची जीवनसाथी

उसको मित्र बनाना,

उसकी अच्छी-अच्छी बातें

जीवन में अपनाना।

: चार :

जो जीवन में महक बिखेरे

बनकर केसर क्यारी,

ईश्वर ने है उसे बनाया

जग में सबसे न्यारी।

रहे प्रतीक्षा हरदम जब भी

रक्षाबंधन आता,

उसकी राखी के धागों में

सच्चा प्यार समाता।

: पाँच :

नित्य भोर में उठकर जल्दी

दूर टहलने जाओ,

पियो दूध तुम ताजा-ताजा

चने भिगोकर खाओ।

पिता की वह माँ होती है

अच्छी बात बताती,

हमको अपने बेटे से भी

ज्यादा प्यार जताती।

: छह :

प्रतिवर्ष छुट्टियाँ लगते ही

उनके घर हम जाते,

गाय-भैंस का दूध पिलाती

दही-बाटी भी खाते।

माँ की भी वह माँ होती है

कहती रोज कहानी,

उसके घर में हमने देखी

चीजें कई पुरानी।

: सात॒:

सर्दी-गरमी-वर्षा में भी

वह खेतों में जाता,

रात-दिवस वह स्वेद बहाकर

है अनाज उपजाता।

सानी-पानी दे बैलों को

फिर टिटकारी देता,

पेट सभी का वह भरता है

जीवन-नैया खेता।

: आठ :

उछल-कूद करता पेड़ों पर

कभी घरों में आता,

चना, चपाती, केले देखे

मन उसका ललचाता।

लेकर डंडा पीछे दौड़ो

बचकर वह भग जाता,

दाँत दिखाता घुड़की देता

बोलो क्या कहलाता?

: नौ :

रोज सवेरे जल्दी आकर

तुमको रोज उठाता हूँ,

सारे जग की खबरें लाकर

तुमको रोज सुनाता हूँ।

मुझको पढ़ते रहने से ही

लोगों का बढ़ता है ज्ञान,

बच्चों नाम बताओ मेरा

जरा लगाकर थोड़ा ध्यान?

: दस :

सात रंग का अर्धवृत्त वह

नभ में शोभा देता है,

वर्षा ऋतु में सूरज निकले

वह सम्मुख हो लेता है।

भाँति-भाँति के रंग सँजोना

वह हमको सिखलाता है,

कुछ पल को वह खुशी लुटाकर

दूर कहीं खो जाता है।

 

उत्तर : १. चिट्ठी, २. गौरैया, ३. पुस्तक, ४. बहन, ५. दादी, ६. नानी, ७. किसान, ८. बंदर, ९. अखबार, १०. इंद्रधनुष

२४७, दूसरी मंजिल, नौवीं मैन

शांतिनिकेतन लेआउट अरेकेरे,

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दूरभाष : ८७५२९१६९२७
माणिक तुलसीराम गौड़

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