होली हम कैसे मनाएँ

होली हम कैसे मनाएँ

होली शब्द याद आते ही मन में मस्ती और उमंग भर जाती है। होली एक ऐसा त्योहार है, जिसमें छोटे-बडे़ सभी रंगों के माध्यम से एक-दूसरे के साथ हँसी-मजाक, छेड़-छाड़, ठिठोली तथा ऊधम मचाने लगते हैं।

होली की शुरुआत महाशिवरात्रि के दिन से ही हो जाती है। जब लोग मंदिरों में भगवान् शिव को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुरुआत कर देते हैं।

यह त्योहार होलिका और भक्त प्रह्लाद की कथा से जुड़ा है। होलिका के नाम पर ही इस त्योहार का नाम होली पड़ा। वैसे कृष्ण द्वारा राधिका और गोपियों संग होली मनाने की परंपरा सदियों पुरानी है। कृष्ण द्वारा मनाई गई होली का नजारा आज भी मथुरा और वृंदावन में देखने को मिल जाता है। कृष्ण की नगरी मथुरा की होली सबसे मशहूर है।

होली का त्योहार एक ऐसा त्योहार है, जिसमें रंग-अबीर-गुलाल का खुलकर इस्तेमाल किया जाता है। होली के बाद हिंदू पंचांग का नव वर्ष शुरू हो जाता है। इसी त्योहार के साथ वसंत का भी आगमन हो जाता है।

होली मान-मर्यादाओं का एक ऐसा त्योहार, जिसे मनाने के लिए पहले से तैयारी शरू हो जाती है। यह त्योहार पूरे फागुन भर मनाया जाता है। होली में अगर आप किसी रिश्तेदारी में जाते हैं तो वहाँ की महिलाएँ जरूर आप पर रंग डालकर होली मनाएँगी।

होली पर बच्चों की टोली पिचकारी, रंग-अबीर-गुलाल लेकर अपने-अपने मोहल्ले के बच्चों पर रंग डाल-डालकर होली का खूब हुड़दंग मचाते हैं।

होली हम कैसे मनाएँ, इस बारे में भी हमें सोचने-समझने की जरूरत है, ताकि हम होली का त्योहार भरपूर आनंद उठाकर मना सकें।

होली पर लोग नशा करते हैं तथा नशे में एक-दूसरों को गंदी-गंदी गालियाँ देने लगते हैं। इतना ही नहीं, नशे में झगड़ा, मार-पीट, कपार फोड़उवल भी कर बैठते हैं। इससे होली का सारा मजा किरकिरा हो जाता है और थाना-पुलिस की नौबत आ जाती है। ऐसी होली मनाने से क्या फायदा!

इस त्योहार पर हम कतई नशा न करें, न किसी से मार-पीट व झगड़ा करें, बल्कि इस त्योहार को प्रेम और उमंग के साथ मनाएँ।

होली पर लोग एक-दूसरे के कपडे़ फाड़ देते हैं। कितनों को नंगा कर देते हैं। यह काम भी नफरत फैलानेवाला तथा बेहूदगी भरा है, इसलिए आप रंग डालकर होली मनाएँ, न कि कपडे़ फाड़-फड़वाकर।

प्यारे बच्चो! होली पर अकसर कुछ लोग गुब्बारे में रंग भरकर, दूसरे पर मारकर उसे फोड़ते हैं। यह भी गलत काम है। क्योंकि गुब्बारे में रंग भरकर मारने पर आपको आनंद आता होगा, मगर दूसरे को चोट लगती है। कभी आपने इस बारे में सोचा है। इसलिए होली पर गुब्बारे में रंग भरकर होली कतई न मनाएँ, बल्कि पिचकारी से रंग डालकर होली मनाएँ।

होली पर अकसर देखा गया है कि रंग-अबीर-गुलाल में तरह-तरह के रसायन डालकर उसे तैयार किया जाता है। यही रंग जब हम किसी के गाल पर लगाते हैं तो जलन पैदा हो जाती है तथा गाल पर फफोले और दाने निकल आते हैं। ऐसे में आप नकली और रसायन मिले रंगों से होली न खेलें, बल्कि शुद्ध और असली रंग-अबीर-गुलाल से होली मनाएँ और हँसें-मुसकराएँ। होली पर किसी के चेहरे पर वार्निश कभी न पोतें, इससे भी चेहरा खराब हो जाता है। आप अबीर-गुलाल पोतकर भी होली मना सकते हैं तथा हर परेशानी से बच सकते हैं।

होली पर अकसर देखा गया है कि लोग रात में मिट्टी की हाँड़ी में नहर-नाबदान का कीचड़ भरकर किसी के घर-दुकान पर फेंक देते हैं। इससे प्रदूषण तथा बदबू फैलती है। होली पर आप ऐसा गंदा काम न खुद करें, न किसी को करने दें। नाली का कीचड़ किसी के दरवाजे पर फेंकना होली नहीं कही जाएगी। इसलिए इस नीच काम को करने की चेष्टा न करें।

होली मनाने के बहुत सारे तौर-तरीके हैं, जैसे होली पर एक-दूसरे को बधाई दें, गले लगाएँ तथा अबीर-गुलाल लगाएँ। होली पर किसी को तंग और परेशान न करें, न दौड़ाकर रंग डालें। होली पर प्यार से सबको रंग लगाएँ और लगवाएँ। होली पर फूहड़ता को न दरशाएँ, बल्कि ऐसी होली मनाएँ कि लोग वाह-वाह कह उठें। होली पर एक-दूसरे को घर में बने पक्वान्न खिलाएँ।

होली पर सबसे मिलें और उसके साथ होली मनाएँ। होली पर घरवालों के साथ आनंद मनाएँ, बड़ों से आशीर्वाद पाएँ, सब लोग बैठकर खाएँ-पीएँ। परिवार के साथ बैठकर अंताक्षरी खेलें। होली त्योहार को हम ऐसा रंग दें कि इसमें प्यार-ही-प्यार नजर आए और कहें—‘बुरा न मानो होली है!’

गल्ला मंडी, पोस्ट-गोला बाजार
गोरखपुर-२७३४०८ (उ.प्र.)
दूरभाष : ०९८३८९११८३६
—बद्री प्रसाद वर्मा ‘अनजान’

हमारे संकलन