होटेल मित्सुबिशि

होटेल मित्सुबिशि

‘वेल्कम टू होटेल मित्सुबिशि, सर! वॉट केन वी डू फॉर यू?’

‘मैनी थिंग्स, फिलहाल एक कमरा।’

‘आपका शुभ नाम?’

‘देखिए, इस कार्ड में नाम, पता, पेशा सबकुछ है।’

‘सोमनाथपुरम गणेशन रामनाथन रंगनाथन कंजूसन?’

‘कंजूसन नहीं, कंठीरन। मैं बहुत ही जेनेरस हूँ। नाम कुछ बड़ा है। इसलिए यह कार्ड बनाया है।’

‘फोटो आई.डी. आधार, प्यान, पासपोर्ट, ड्राइविंग लाइसेंस, मेरेज सर्टिफिकेट या डिवोर्स?’

‘डिवोर्स?’

‘अगर है तो।’

‘शादी ही नहीं हुई है।’

‘सारी, सर!’

‘पासपोर्ट है, प्यान है।’

‘किसी एक बस। पासपोर्ट दीजिए। बुकिंग है क्या?’

‘नहीं।’

‘आपको किस तरह का कमरा चाहिए?’

‘मतलब?’

‘वाल में जो लिखा गया है, आपने देखा नहीं? विथ लाउंज, विदाउट लाउंज?’

‘लाउंज-माउंज मुझे नहीं चाहिए।’

‘विदाउट लाउंज।’

‘विदाउट लाउंज। सिंगल बेड।’

‘हमारे यहाँ सिंगल बेड नहीं है, जो कुछ है, डबल है।’

‘डबल बेड लेकर मैं क्या करूँ? मैं तो अकेला हूँ!’

‘डट इस ए पिटी!’

‘डबल ही दीजिए, आड़ा लेट जाता हूँ!’

‘सॉफ्ट बेड चाहिए या हार्ड?’

‘मतलब?’

‘कुछ लोगों को सॉफ्ट बेड जँचता नहीं, क्योंकि उन्हें पीठ का दर्द होता है।’

‘मुझे अभी तक नहीं है। सॉफ्ट ही दें।’

‘तकिया?’

‘चाहिए न?’

‘कितना?’

‘पाँच-छह।’

‘आई.एस.डी. फैसिलिटी?’

‘जरूरी नहीं है।’

‘लंबा आईनेवाला वार्डरोब या बिना आईनेवाला वार्डरोब?’

‘लंबा आईनेवाला नहीं चाहिए। मुझे अपना ही रूप देखकर डर लगता है।’

‘बाथ और शॉवर या शॉवर ओनली?’

‘दोनों ही। सुबह बाथ, शाम को शॉवर! हा-हा-हा!’

‘वास्तु कांप्लेयंस?’

‘मतलब?’

‘ईस्ट फेसिंग, वेस्ट फेसिंग, नॉर्थ फेसिंग, साउथ फेसिंग, नॉर्थ-ईस्ट फेसिंग...’

‘नॉर्थ-ईस्ट फेसिंग दीजिए। मैं वहाँ कुछ साल था।’

‘फ्रेंच विंडोज?’

‘नहीं चाहिए। जर्मन विंडोस दीजिए। आई हेट द फ्रेंच, जर्मन्स आर बैटर!’

‘जर्मन विंडोस, इस प्रकार का विंडोस नहीं है। कॉमन विंडोस है।’

‘ठीक है, कॉमन दीजिए। कॉमन का माने?’

‘जमीन से चार फुट ऊँचा रहता है।’

‘फ्रेंच माने?’

‘जमीन से आरंभ होता है। डोर कम विंडो। ऑपेनिंग टु ए गार्डन।’

‘मुझे खिड़की के पास बैठकर कुछ पढ़ना मुश्किल है। कॉमन, आई एम ए कॉमनर।’

‘वेस्टर्न कमोड या ईस्टर्न कमोड?’

‘दोनों ही।’

‘एक को चुनना पड़ता है।’

‘ईस्ट फेसिंग वेस्टर्न दीजिए!’

‘आपको को-ऑपरेट करना चाहिए, सर।’

‘वेस्टर्न कमोड।’

‘वेस्टर्न कमोड, फेसिंग किसी भी दिशा में हो।’

‘सर्विस रूम में या हॉल में?’

‘मतलब?’

‘मतलब खाना-नाश्ता कहाँ?’

‘मैंने अभी तक सोचा नहीं है।’

‘अब सोचिए, मुझे यहाँ कंप्यूटर में फीड करना है।’

‘हॉल में ही हो।’

‘सर्विस हॉल में?’

‘ठीक है?’

‘कोई मेडिकल कंडीशन है क्या?’

‘भगवान् की कृपा से अब तक कुछ नहीं है। आगे आ सकता है। एंड वन मोर थिंग, यंग लेडी!’

‘सर?’

‘वन मोर क्वेश्चन एंड आई एम आउट!’

‘मगर एक लास्ट क्वेश्चन सर। दिस इस मेंडेटरी। एमर्जेंसी में किससे कॉण्टैक्ट करना चाहिए? उनका नाम, पता और मोबाइल नंबर?’

मगर उसे सुनने के लिए सोमनाथपुरम गणेशन रामनाथन रंगनाथन कंजूसन वहाँ नहीं था। मैं दूसरे होटल को ढूँढ़ने के लिए निकल पड़ा था।

देर रात नगर भर में घूमकर फिर इसी होटल के रिसेपशन काउंटर के आगे हाजिर हुआ और कहा, ‘सारी, जो कुछ है, आप ही बेटर हैं।’

मगर काउंटर पर अब दूसरी खूबसूरत लड़की बैठी हुई थी।

‘वेल्कम टु होटेल मित्सुबिशि, सर। वॉट केन वी डू फॉर यू?’ उसने उसे देखा।

नवनीत, द्वितीय क्रॉस
अन्नाजी राव लेआउट, फर्स्ट स्टेज
विनोबा नगर, शिमोगा-५७७२०४ (कर्नाटक)
दूरभाष : ९६११८७३३१०
—डी.एन. श्रीनाथ

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