पिचकारी के रंग

ढोलक चुन्नूलाल की, जुम्मन देते थाप।

सुर से जैसे ताल का, होता मधुर मिलाप॥

रंग मलें रमजान के, कक्का पुत्तीलाल।

बजा नगाड़ा प्रेम का, तन मन हुआ गुलाल॥

पिचकारी से छूटते, इंद्रधनुष-से रंग।

सराबोर दुनिया हुई, मन में बजे मृदंग॥

गुझिया तलती जानकी, भर देती नसरीन।

साझी दुनिया और भी, लगती आज हसीन॥

उड़ता इधर गुलाल है, हँसती उधर अबीर।

मिलता गले हबीब से, खुश हो आज समीर॥

रंगबिरंगी है फिजा, नाचे हृदय-मयूर।

सत्ते के संग गा रहे, फगुआ चचा गफूर॥

हुल्लड़वाला प्रात है, रंग भरी है साँझ।

हर दिल में उल्लास का, बजे मंजीरा-झाँझ॥

असिस्टेंट प्रोफेसर, हिंदी विभाग,

मुमताज पी.जी. कॉलेज, इरादत नगर

डालीगंज, लखनऊ-२२६०२०
दूरभाष : ९४५०२८५२४८
—फहीम अहमद

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