वीडियो गेम

वीडियो गेम

चीनू की आँखों से लगातार पानी निकल रहा था, पर चीनू की आँखें वीडियो गेम पर टिकी हुई थीं। वह एक हाथ से बार-बार अपनी आँखें मसलता और फिर अपना चश्मा ठीक करते हुए तेजी से बटन दबाना शुरू कर देता।

जैसे ही उसने दसवाँ लेवल पार कर लिया। वह खुशी से उछल पड़ा और सोफे पर ही कूदने लगा।

उसका चीखना सुनकर उसकी मम्मी घबराई सी भागती हुई आई और बोली, ‘‘क्या हुआ, कहीं चोट लग गई क्या?’’

चीनू हवा में वीडियो गेम लहराता हुआ बड़ी शान से बोला, ‘‘ना जाने कितने दिनों की मेहनत के बाद आज जाकर बड़ा कठिन लेवल पार कर पाया हूँ। आज मुझे पता चला कि मेरा भी कोई जवाब ही नहीं है। मैं ‘बेस्ट’ हूँ।’’

मम्मी बेचारी अपना सिर पकड़कर बैठ गई और बोली, ‘‘तुम्हारी ऐसे पागलपन के कारण रोज स्कूल से तुम्हारी कोई-न-कोई शिकायत आती ही रहती है। बारह साल की उम्र में ही इतना मोटा चश्मा लगाए घूमा करते हो, उसके बाद भी तुम्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।’’

‘‘अरे मम्मी, आपको नहीं पता कि इसमें कितना मजा आता है, बस आराम से सोफे पर बैठे-बैठे आपके हाथ के कुरकुरे चिप्स खाओ और वीडियो गेम खेलो, मैं तो कहता हूँ कि आप भी खेलना सीख लो।’’

मम्मी गुस्से से बोली, ‘‘मैं तुम्हें फिर से याद दिला दूँ कि कल पापा तुम्हें दादी के यहाँ छोड़ने जाएँगे। अपना सारा जरूरी सामान पैक करके ध्यान से रख लेना।’’

यह सुनकर चीनू कुछ सोचते हुए बोला, ‘‘पर मैं अपना वीडियो गेम साथ में ले जाऊँगा।’’

उसकी मम्मी कमरे से बाहर जाते हुए बोली, ‘‘ठीक है, वीडियो गेम सबसे पहले रखना, भले ही दूसरा सामान छूट जाए।’’

मम्मी का चेहरा देखकर चीनू समझ गया कि मम्मी उससे बहुत नाराज हैं।

वह थोड़ी देर तो उदास रहा, पर फिर अपना मूड फ्रेश करने कि लिए गेम का अगला लेवल पार करने के लिए बैठ गया। गेम खेलने की आदत को बहुत छोड़ ही नहीं पा रहा था।

अगले ही दिन पापा उसे दादी के पास गाँव छोड़कर वापस चले आए।

चीनू खुशी के मारे दादी से लिपट गया। वह जानता था कि दादी के यहाँ रहकर वह जितनी चाहे उतनी मस्ती कर सकता है। दादी उसे किसी भी बात में रोकती-टोकती नहीं थीं।

वह अपना वीडियो गेम दादी को दिखाने के लिए सोच ही रहा था कि दादी आश्चर्य से बोली, ‘‘तू इतना मोटा हो गया है और तुझे यह इतना मोटा चश्मा कब लग गया! अभी से तेरी आँखें ऐसी हो गई हैं तो बाद में तेरा क्या होगा?’’

जब तक चीनू  कुछ जवाब देता, दरवाजे की घंटी बज उठी।

दादी जैसे ही आगे बढ़ी, चीनू दौड़ता हुआ गया और दरवाजा खोल दिया।

अपने सामने उसकी ही उम्र के बहुत सारे बच्चों को देखकर चीनू ने दादी की तरफ देखा।

दादी बच्चों को देखकर खुश हो गई और बोलीं, ‘‘आज यह नटखट टोली मेरे पास क्यों आ गई है?’’

तभी उनमें से एक लड़का मुसकराते हुए बोला, ‘‘दादी, आज मेरा जन्मदिन है। घर में एक छोटी सी पार्टी रखी है। आप जरूर आना और तुम भी।’’ उस लड़के ने चीनू की तरफ देखते हुए कहा।

‘‘हाँ...हाँ...हम दोनों जरूर आएँगे।’’ दादी ने प्यार से उस लड़के सिर पर हाथ फेरते हुए कहा, उन बच्चों के जाने के बाद चीनू ने थोड़ा सा खाना खाया और अपने वीडियो गेम पर गेम खेलने लगा।

दादी ने उससे कई बार बात करने की कोशिश की, पर वह अपने गेम में पूरी तरह डूबा हुआ था और दादी को सिर्फ हाँ या ना में ही जवाब दे रहा था। आखिर दादी कब तक अकेले बोलतीं, हारकर वे भी उसके पास से उठकर चली गईं।

कहाँ तो उन्होंने सोचा था कि चीनू के आने पर उसे ढेर सारे किस्से-कहानियाँ सुनाएँगी। उसके दोस्तों के बारे में मजेदार बातें सुनेंगी, पर चीनू ने तो जैसे वीडियो गेम के बाहर की दुनिया को देखना और सुनना ही छोड़ दिया था।

शाम को दादी तैयार होकर चीनू के कमरे में आई। उनके हाथ में एक बड़ा सा डिब्बा था, जो लाल रंग की चमकीली पन्नी में पैक किया हुआ था। वह चीनू को आवाज देते हुए उसके पास आई और बोली, ‘‘चलो, शांतनु की बर्थडे पार्टी में चलते हैं।’’

‘‘नहीं दादी, मैं कहीं नहीं जाऊँगा। मुझे नींद आ रही है।’’ चीनू उनींदा सा बोला।

दिनभर वीडियो गेम खेलने के बाद अब उसकी आँखों में जलन हो रही थी।

पर दादी चीनू को जबरदस्ती उठाते हुए बोलीं, ‘‘जल्दी चलो, वरना ‘रिटर्न गिफ्ट’ के सारे वीडियो गेम खत्म हो जाएँगे।’’

चीनू ने दादी का हाथ पकड़ते हुए आश्चर्य से कहा, ‘‘तो क्या वह सबको वीडियो गेम दे रहा है?’’

‘‘हाँ, लगता तो ऐसा ही है, क्योंकि कल उसके पापा बगलवाली दूकान से ढेर सारे वीडियो गेम खरीद रहे थे।’’ दादी ने कुछ सोचते हुए कहा।

बस फिर क्या था। दादी को दुबारा कहने की जरूरत ही नहीं पड़ी। कुछ ही मिनटों बाद चीनू तुरंत तैयार हो गया और दादी का हाथ पकड़कर चल दिया।

जब वे दोनों शांतनु के घर पहुँचे तो शांतनु और उसके मम्मी-पापा ने बड़े ही प्यार से उन दोनों का स्वागत किया।

दादी शांतनु को तोहफा पकड़ाकर उससे बात करने लगे।

शांतनु ने मुसकराते हुए अपने गिफ्ट को मम्मी को पकड़ा दिया और चीनू का हाथ पकड़कर उसे अपने दोस्तों से मिलवाने चला गया। थोड़ी देर तक सभी बच्चे हँसी-मजाक के साथ-साथ स्नेक्स वगैरह खाते रहे।

थोड़ी देर बाद शांतनू के पापा बोले, ‘‘चलो, अब हम सब लोग कुछ मजेदार गेम्स खेलेंगे।’’

गेम्स की बात आते ही सभी बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे।

‘‘आज हम एक नए तरह का एटलस खेलेंगे, जिसमें देश, शहर, घर में उपयोग होनेवाले सामान और या फिर मुहावरे, कुछ भी हो सकते हैं।’’

‘‘अरे वाह...यह तो एक बिल्कुल नए तरह का गेम होगा।’’ ऋषि हँसते हुए बोला।

‘‘तब तो इसमें बहुत मजा आएगा।’’ कहते हुए मिहिर तुरंत शांतनु के पापा के पास सरककर बैठ गया।

गेम शुरू करते हुए उन्होंने सबसे पहले ‘सी’ शब्द दिया और सोनू को एक देश बताने के लिए कहा।

सोनू तुरंत कूदते हुए बोला, ‘‘कॉमरोस।’’

हा, हा, हा...चीनू हँसते हुए बोला, ‘‘कॉमरोस तो ‘क’ से शुरू होता है और यह ‘सी’ से बता रहा है।’’

यह सुनकर सभी बच्चे चीनू का मुँह देखने लगे

शांतनु बोला, ‘‘कॉमरोस।’’

चीनू शर्मिंदा हो उठा।

‘‘चलो चीनू अब तुम ‘एस’ से किसी औजार का नाम बताओ, क्योंकि अब तुम्हारी बारी है।’’ मोनू ने कहा।

चीनू सोचने लगा, पर उसे तो कुछ भी याद नहीं आ रहा था। उसने सिर नीचे कर लिया।

उसके बगल में बैठा मोनू तुरंत बोला, ‘‘सॉ...यानी आरी।’’

बस फिर क्या था। एक के बाद एक प्रश्न-उत्तर होने लगे। सभी बच्चों को इस खेल में बड़ा मजा आ रहा था, सिवा चीनू के...वह बिल्कुल अलग-थलग पड़ गया था।

चीनू ने देखा कि बच्चे सरककर उससे आगे बैठ गए थे और सबका एक गोला बन गया था, जहाँ पर सब हँस रहे थे, जवाब दे रहे थे और खुश हो रहे थे। पर चीनू को कुछ भी नहीं आता था, यहाँ तक कि जो उसके कोर्स में था, वह भी नहीं।

उसने कभी वीडियो गेम खेलने के अलावा कुछ किया ही नहीं था।

उसने दादी की ओर देखा, जो बहुत उदास नजर आ रही थीं और उसकी ओर ही देख रही थीं।

अचानक वह उठा और दादी के पास जाकर बोला, ‘‘मेरी तबीयत ठीक नहीं लग रही है। आप प्लीज घर चलिए।’’

यह कहते हुए चीनू का गला भर्रा गया और आँखें डबडबा उठीं।

दादी ने उसका हाथ पकड़ा और शांतनु की मम्मी से बोलीं, ‘‘हम लोग चलते हैं।’’

शांतनू की मम्मी भी बहुत देर से चीनू को देख रही थी। वह सारी बात तुरंत समझ गईं और उन्होंने चीनू के हाथ में वीडियो गेम पकड़ाते हुए कहा, ‘‘यह तुम्हारा रिटर्न गिफ्ट।’’

चीनू ने काँपते हाथों से वीडियो गेम पकड़ा और दादी के साथ बाहर आ गया।

रास्ते भर दादी और चीनू कुछ नहीं बोले, पर दादी जानती थीं कि चीनू रो रहा है।

दादी उसका हाथ पकड़े सड़क पार करने के लिए खड़ी थीं कि तभी चीनू को उसकी उम्र का ही एक बच्चा दिखा, जो सड़क के किनारे बैठा था और टकटकी लगाए चीनू के वीडियो गेम को देख रहा था।

कुछ देर बाद, सड़क पार करते ही चीनू उसकी ओर बढ़ा और उसने वीडियो गेम उस बच्चे की तरफ बढ़ा दिया।

बच्चा ने झट से चीनू के हाथ से वीडियो गेम ले लिया और हँस दिया। चीनू ने दादी की ओर देखा, जो साड़ी के पल्लू से खुशी के आँसू पोंछ रही थीं।

चीनू और दादी ने देखा कि बच्चे की हाथ में वीडियो गेम पकड़ते ही उसके आस-पास ढेर सारे बच्चे आकर इकट्ठा हो गए थे और बारी-बारी से अपने हाथों में लेकर वीडियो गेम देख रहे थे।

दादी और चीनू मुसकराते हुए वहाँ से चल पड़े सामने एक दुकान की ओर, जहाँ पर ढेर सारी रंग-बिरंगी किताबें दूर से ही नजर आ रही थीं।

 

मंजरी शुक्ला
क्वार्टर नं. डी-१४३३
इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लि.
रिफाइनरी टाउनशिप, गाँव व पोस्ट-बहोली
पानीपत-१३२१४० (हरियाणा)
दूरभाष : ९६१६७९७१३८

हमारे संकलन