स्वच्छता अभियान

मार्च का महीना था। बसंत ऋतु में पतझड़ होता है। मैं सुबह घूमने जा रहा था। अधिशासी अभियंता के बँगले के लॉन और उसके आस-पास एक महिला झाड़ू लगा रही थी। मैंने उन्हें देखकर कहा, ‘‘अरे बहनजी! आप इतने बडे़ अधिकारी की पत्नी होकर झाड़ू लगा रही हैं? यह काम तो माली और सफाई कर्मचारी का है!’’ उन्होंने कहा, ‘‘मैं जान-बूझकर झाड़ू लगा रही हूँ, मेरे कंधों में दर्द रहता है और झाड़ू लगाने से कंधों की कसरत हो जाएगी।’’ मैंने कहा, ‘‘लगता है, प्रधानमंत्रीजी के स्वच्छता अभियान में आप सहयोग कर रही हैं!’’

विनोद शंकर गुप्त
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