अंधानुकरण

बड़े जुगाड़ के बाद आखिर हम सरकारी क्वार्टर छोड़ अपने घर आ गए। गृह-सज्जा के असीम सुख से परिपूर्ण जब मैं बालकनी में गई तो बगल में बने छोटे मकानों में कोई उत्सव सा प्रतीत हुआ। रोड लाईट के साथ हैलोजन की रोशनी पूरी सड़क को चमका रही थी। उन घरों के बीच रहनेवाले वकील बाबू सूट पहनकर, साफा बाँधे जैसे पश्चिमी संगीत पर थिरक रहे हों। अंतर इतना था कि संगीत की जगह जयघोष थी भक्तगणों की और लोग सामर्थ्यानुसार भेंट लेकर कतारबद्ध खड़े थे। हर भक्त का दुखड़ा सुन वकील साहब, जिनपर बाबाजी आए हुए थे, कपड़े की मूठ से पीठ पर थपकी दे रहे थे। घर के बाहर सजा तख्ता किसी सिंहासन से कम न था। यह प्रकरण निश्चित दिन व तिथि को नियमित देखने को मिलता। एक दिन मैंने वहाँ की किसी वृद्धा से पूछा तो पता चला, वकील साहब की वकालत नहीं चलती थी, पर उनके घर-संसार पर बाबाजी का प्रताप था। बोरियों नारियल, गेहूँ, चावल, घी, शक्कर, संपूर्ण राशन के अतिरिक्त गृहस्थी का अन्य सामान भी उन्हें प्रतापस्वरूप प्राप्त था। हर बार मैं इस तमाशे को देखती और शून्य में खो जाती। एकाएक वकील साहब का दिल के दौरे से स्वर्गवास हो गया। गलियाँ-सड़कें तक सूनी हो गईं। सन्नाटा पसर गया। काफी समयांतराल पर आज मैं विस्मित देख रही थी, उनके घर के बाहर पुनः तख्ता सजा है। वही गहमा-गहमी है, मगर वकील साहब की जगह उनकी पत्नी ने ले ली, जिन्हें आज देवी आई हैं।

हाथी दाँत

किशनलाल के परिवार को तनाव के झोंके हिला रहे थे। चार बेटों और दो बेटियों की परवरिश ने किशनलाल को जितना न थकाया, उतना बच्चों के बीच की कड़वाहट ने तोड़ डाला। घर में उठती दीवारें अब साफ नजर आने लगी थीं। किशलाल मध्यममार्गी अपने बेटों को नियंत्रण में रखने में असक्षम था। बड़ा बेटा एकाउंटेंट था, उससे छोटा एल.आई.सी एजेंट, तीसरे नंबर का मार्केटिंग में और चौथा पढ़ रहा था। तीनों में वैचारिक मतभेद थे। बेटियों में से एक की शादी कर दी थी और दूसरी कॉलेज में थी। परिवार में संस्कारहीनता के साथ अनुशासन की भी कमी थी। आए दिन घरेलू झगड़े हिंसा की सीमा तक पहुँचे जाते, और किशनलाल स्वभावतः अपनी बात मनवाने में निष्काम रहता। घर के अंदर जो भी हो, मगर बाहर उनकी नेतागिरी पुरजोर चलती थी। मंच का नशा कुछ ऐसा था कि एक जलसे में किशनलाल माइक के आगे बोल रहा था, ‘‘समाज किस ओर जा रहा है, इसकी जिम्मेदारी हमारी है। समाज की उन्नति के लिए सबसे आवश्यक है—संगठन।’’

३०४, रिद्धि-सिद्धि नगर पथ,

बूँदी रोड, कोटा (राजस्थान)

दूरभाष : ०९४१४७४६६६८

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