प्रेम तलाशता है प्रेम

प्रेम तलाशता है प्रेम

मैं रच रहा हूँ एक गीत

मैं रच रहा हूँ वह गीत,

जहाँ मेरी माँ व सभी माँएँ

देखेंगी स्वयं का प्रतिबिंब,

वह गीत जो बोलता दो नयनों की तरह।

मैं चल रहा हूँ उस सड़क पर

जो गुजरती कई गाँवों से,

लोग मुझे नहीं देख पाते हों किंतु मैं

देखता और सलाम करता पुराने मित्रों को।

मैं खोल रहा हूँ रहस्य उस व्यक्ति की तरह

जो प्रेम करता या मुसकराता है।

प्रेम तलाशता है प्रेम

बडे़ ही स्वाभाविक तरीके से।

मेरा जीवन, हम सबका जीवन

रचता बस एक नगीना,

मैंने सीखे नए शब्द

किया प्रयोग अन्य शब्दों का बड़ी सुंदरता से।

मैं रच रहा हूँ एक गीत

लोगों को जगाने

बच्चों को सुलाने।

तुम्हारे कंधों ने उठा रखी है दुनिया

वह समय आ जाता है जब आप

और नहीं कह सकते, ओ मेरे भगवान्!

वह समय पूर्णतः परिमार्जन का

वह समय जब आप और नहीं कह सकते, ओ मेरे प्यार!

क्योंकि प्यार सिद्ध हो चुका है व्यर्थ,

कि आँखें रोती नहीं

कि हाथ केवल करते हैं अनगढ़ काम

कि हृदय है शुष्क।

स्त्रियाँ व्यर्थ ही देती हैं दस्तक तुम्हारे दरवाजे पर,

जो तुम खोलते नहीं।

तुम रहते हो अकेले, बत्तियाँ बुझी हुई हैं,

और अँधेरे में चमकती हैं तुम्हारी विशाल आँखें

जाहिर है तुम अब नहीं जानते हो कैसे सहते हैं पीड़ा

यह भी कि तुम अपने मित्रों से भी कुछ नहीं चाहते।

कौन करता है परवाह यदि बुढ़ापा आता है—क्या है बुढ़ापा?

तुम्हारे कंधों ने उठा रखी है दुनिया

और है यह एक बच्चे के हाथ से भी हल्की

युद्ध, अकाल, मकानों के भीतर पारिवारिक झगडे़

सिद्ध करते हैं केवल यही कि जीवन चलते रहता है,

कि किसी ने भी अभी तक स्वयं को नहीं किया है मुक्त

कुछ (जो नाजुक हैं) इस नजारे को मानते हुए क्रूर

पसंद करेंगे मरना।

वह समय आ जाता है जब मृत्यु नहीं करती सहयोग

वह समय आ जाता है जब जीवन होता है एक जरूरत

सिर्फ जीवन, बिना किसी बचाव के।

पुरातन दुनिया का स्मरण

क्लारा बच्चों के साथ बगीचे में घूम रही थी

हरी घास से लगता था आसमान हरा

पुलों के नीचे था स्वर्णिम जल

अन्य दृश्य थे नीले, गुलाबी, नारंगी

एक पुलिसवाला मुसकरा रहा था

लोग जा रहे थे साइकलों से

एक लड़की आई लॉन में चिडि़या पकड़ने,

क्लारा के लिए सबकुछ था शांत

समूची दुनिया-जर्मनी, चीन

बच्चों ने देखा आकाश, इसके लिए नहीं थी मनाही,

मुँह, आँख, कान सब खुले थे, नहीं था कोई खतरा

क्लारा को डर था फ्लू, गरमी और कीड़ों से

क्लारा को डर था कहीं छूट न जाए ग्यारह बजेवाली गाड़ी

वह इंतजार करती थी पत्रों का, जो आते थे बमुश्किल

वह नहीं पहन पाती थी हमेशा नया ड्रेस

लेकिन वह घूमती थी बगीचे में सुबह-सुबह

उन दिनों उनके पास थे बगीचे, थीं सुबहें।

अनकही इच्छा

काश! मेरे पास हो साहस

कि कह सकूँ यह अनकही बात

कि दुनिया को बता सकूँ

इस प्रेम के बारे में,

नहीं है मुझमें चाहत की कमी

नहीं है मुझमें इच्छा की कमी

कि तुम हो मेरी चाहत

मेरी सबसे बड़ी इच्छा,

काश! मैं चीख-चीखकर बता सकता

इस भले दीवानेपन के बारे में

तुम्हारी बाँहों में समा जाने

तुम्हारे चुंबनों में खो जाने की

इच्छाओं के उन्माद में

मैं सुनाना चाहता हूँ कविताएँ,

गाना चाहता हूँ चारों दिशाओं में

कि शब्द उमड़ते हैं

तुम्हारी प्रेरणा से

मैं बात करना चाहता हूँ सपनों के बारे में

बताना चाहता हूँ अपनी अप्रकट इच्छा के बारे में

कि छोड़ सकता हूँ सबकुछ

तुम्हारे साथ रहने के लिए

है यह मेरी अनकही इच्छा।

बचपन

मेरे पिता चले खेतों की ओर घोडे़ पर सवार होकर

मेरी माँ बैठी कुरसी पर और करने लगी सिलाई

मेरा नन्हा भाई ले रहा है नींद

और मैं अकेले आम्र-वृक्षों तले

पढ़ रहा हूँ कहानी रॉबिंसन क्रुसो की

एक लंबी कहानी जो कभी समाप्त नहीं होती

दोपहर की श्वेत रोशनी में एक आवाज

बुलाती है हमें कॉफी पीने के लिए

वह आवाज जिसने गुलामी के दिनों में

झुग्गियों में सीखी थीं लोरियाँ

जिन्हें वह भूली नहीं कभी

कॉफी उस बूढ़ी-साँवली नौकरानी के रंग की

कड़क कॉफी, बढि़या कॉफी।

मेरी माँ अभी भी बैठीं, सिलाई करतीं,

मेरी ओर देखकर कहतीं—

‘श्...श्...बेबी को जगाना नहीं।’

तभी पालने पर बैठ जाता एक मच्छर

और वह गहरी...आह भरतीं।

दूर मेरे पिता कर रहे थे सवारी

खेतों के निस्सीम चारागाह में।

और मुझे पता न था कि मेरी कहानी

रॉबिंसन क्रूसो की कहानी से भी ज्यादा अच्छी है।

कविता शुद्धीकरण की

अनेक युद्धों के बाद

भले फरिश्ते ने मार गिराया दुष्ट फरिश्ते को

और उसका शव फेंक दिया नदी में

पानी लहू से हुआ लाल ऐसा

कि न पड़ा फीका

और मर गईं सारी मछलियाँ

किंतु एक दिन दुनिया को रौशन करने

चला आया प्रकाश,

कोई नहीं जानता आया कहाँ से,

और योद्धा फरिश्ते के घाव का

किया उपचार एक-दूसरे फरिश्ते ने।

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