चक्रधारी हाथ

हाथ

एक-दूसरे से मिलाना

रखता है अलग मायना

संधि-स्नेह-स्वागत-प्रेम

या प्रणय में सीधा-सरल होकर

और प्रतिरोध या प्रतिशोध में

आग में जलने को तत्पर

कभी सहजता तो कभी कड़कपन के साथ

मिलाया जाता है हाथ।

 

हाथ

मित्रता में आगे,

कटुता में पीछे

स्वतः हो जाता है हाथ।

 

हाथ

अनुयायी होकर

अपने बड़ों का करते अनुसरण,

पैरों के धीमे या तेजी में

हिल-मिलकर गत्यानुक्रम

में चल पड़ते हैं हाथ।

 

हाथ

जब बालों को

सहलाते-सँवारने लगते हैं,

तब कंधे का काम करने लगते हैं हाथ।

 

हाथ

सफर में सिर के नीचे मोड़कर

सिरहाने का काम करते हैं,

ऐसे में सुस्ती व थकान

मिटाते हैं हाथ

पल भर में नींद

दिला देते हैं हाथ।

 

हाथ

पकड़ ले जब दूसरे हाथ

मिलते हैं तब हजारों हाथ,

और फिर कारवाँ बना देते हैं

समर्थकों के हाथ।

हाथ

पर उँगलियाँ

उनपर विभाज्य रेखाएँ

बन जाती हैं विश्व भर में

सहज गणना करनेवाले,

सर्वसुलभ गिनता करनेवाले हाथ।

 

हाथ

बेलते हुए रोटी

घुमाते हुए चाक

रिंगाते हुए चक्की,

सुचक्री बन जाते हैं

चक्रधारी हाथ।

 

हाथ

कुष्ठरोगियों से मिलाते

सहानुभूतिपूर्वक

दवा-मलहम लगाते

हमदर्द बनकर

आमटे व मदर टेरेसा के

निर्मलमना-स्वच्छ हृदयी

विभूतियों के चूमते-सहलाते थे,

सड़ने-गलनेवाले दया-पात्री हाथ।

 

हाथ

लिप्त होकर श्रम में

गंदगी हटाकर स्वच्छता बढ़ाकर,

अपावन जगहों को पावन करते हैं

निर्लिप्त होकर हाथ।

१२८, गोरा स्ट्रीट

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