कलाम के पाँच संदेश

कलाम के पाँच संदेश

‘‘विवान, चलो पीछे के बेंच पर बैठो। आज फिर तुमने इतिहास में बहुत गलतियाँ की हैं।’’ ऐसा अकसर होता था। विवान की गणित, साइंस एवं अनेक विषयों में गलतियाँ निकलती थीं और उसे उस विषय की मैडम पीछे की बेंच पर बैठा देती थी। विवान छठी कक्षा में पढ़ता था। पढ़ाई का नाम सुनते ही उसे नींद आने लगती थी। इन विषयों का पीरियड शुरू होते ही वह इधर-उधर ताक-झाँक करने लगता था। पता नहीं ऐसा क्या था कि जब भी गणित, साइंस एवं इतिहास का पीरियड शुरू होता, वैसे ही विवान का ध्यान बँटना शुरू हो जाता। पर हाँ, उसे कहानी व साहित्यिक किताबें पढ़ना बेहद पसंद था। हिंदी एवं अंग्रेजी की कक्षा में वह पहले बेंच पर बैठता था और सर्वाधिक अंक लाता था। लेकिन बाकी विषयों से उसे लगाव कम था।

मम्मी-पापा से भी वह अकसर डाँट खाता था और दोस्त भी उसका मजाक उड़ाते थे। विवान की माँ आभा और पिता अभय बहुत कोशिश करते कि वे उसे न डाँटें, लेकिन विवान अकसर ऐसी हरकतें करता था, जिससे कि उसे डाँट पड़ ही जाती थी। आभा एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करती थी और अभय एक कंपनी में इंजीनियर थे। विवान उनका इकलौता बेटा था। विवान को न ही गणित भाता था, न ही इतिहास और न ही साइंस। ऐसे में आभा अकसर उसके भविष्य को लेकर चिंतित हो जाती थी कि विवान बड़ा होकर क्या करेगा?

विवान बेशक पढ़ने में साधारण था, लेकिन उसे किताबें पढ़ने का बेहद शौक था। यही कारण था कि कहानी की किताबों ने उसकी मानसिक क्षमता को अन्य बच्चों के मुकाबले अधिक विकसित कर दिया था। हिंदी एवं अंग्रेजी विषयों की अध्यापिकाएँ उसे बहुत पसंद करती थीं।

इस बार गांधी जयंती पर स्पेशल असेंबली में हर कक्षा के बच्चे को अपने प्रिय नेता पर आधारित एक नाटिका प्रस्तुत करनी थी। प्रिंसीपल ने सभी बच्चों से कहा कि जिस बच्चे की नेता पर आधारित नाटिका सबसे सुंदर एवं अच्छी होगी, उसे पुरस्कृत किया जाएगा।

सभी बच्चों के साथ विवान अपनी स्पेशल असेंबली को स्पेशल बनाने की तैयारी करने लगा। वह लाइब्रेरी में जाता और वहाँ पर ढेरों किताबें खँगालता। उन किताबों में उसने सभी नेताओं के बारे में पढ़ा, उनकी घटनाओं के बारे में पढ़ा। जब वह अपने दोस्तों से विचार-विमर्श करता तो पता चलता कि जिस नेता के बारे में उसने सोचा है, उस पर पहले ही उसके दोस्त अपनी नाटिका तैयार कर रहे हैं। यह सुनकर वह निराश हो जाता। फिर कुछ देर बाद वह नए नेता की तलाश में जुट जाता।

एक दिन डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पर लिखी हुई किताब उसके हाथ लगी। उसे सरल शब्दों में बच्चों के लिए लिखा गया था। विवान ने उसे पढ़ना शुरू किया तो अंत तक पढ़ता गया। उसने स्पेशल असेंबली से पहले ही उस किताब को दो बार पढ़ लिया था। उस किताब को पढ़कर विवान ने निश्चय कर लिया कि वह न सिर्फ कलाम के संदेशों पर अपनी नाटिका तैयार करेगा, बल्कि उनके संदेशों को अपने जीवन में भी उतारने का प्रयास करेगा। डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के बारे में पढ़कर वह उनसे बहुत प्रभावित हुआ। स्पेशल असेंबली के लिए उसने अपनी नाटिका डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पर तैयार की।

सभी बच्चों ने अपने शिक्षकों की सहायता से प्रिय नेताओं पर आधारित नाटिका प्रस्तुत की। बच्चों ने महात्मा गांधी, पं. जवाहरलाल नेहरू, लालबहादुर शास्त्री, सरदार वल्लभभाई पटेल, इंदिरा गांधी आदि पर अपनी नाटिका को बहुत ही सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया। अब विवान की बारी आई।

विवान बोला, ‘‘मैंने अपनी स्पेशल असेंबली हमारे देश के भूतपूर्व राष्ट्रपति, वैज्ञानिक एवं शिक्षक स्वर्गीय डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम पर तैयार की है। मैंने इस नाटिका में उनके पाँच संदेशों को अपना आधार बनाया है। उनके पाँच संदेश जो इस प्रकार हैं—‘सपना वो नहीं है, जो आप नींद में देखें, सपने वो हैं, जो आपको नींद ही नहीं आने दें।’ दूसरा, ‘एक अच्छी किताब हजार दोस्तों के बराबर होती है।’ तीसरा, ‘सूरज की तरह चमकना है, तो सूरज की तरह जलना भी पड़ेगा।’ चौथा, ‘आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते, पर अपनी आदतें बदल सकते हैं। यकीन मानिए, आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देंगी’ और पाँचवाँ व अंतिम ‘देश का सबसे अच्छा दिमाग क्लास रूम की आखिरी बेंचों पर मिल सकता है।’’

कलाम के इन पाँच संदेशों को बताने के बाद विवान ने पहले संदेश के अनुसार बताया कि एक गरीब बच्चा सपना देख रहा है कि एक दिन वह स्कूल पढ़ने जा रहा है। स्कूल पढ़ने की इच्छा बच्चे में इस कदर छा जाती है कि वह स्कूल जाने के लिए दिन-रात मेहनत करता है और आखिर स्कूल तक पहुँच जाता है। दूसरे संदेश में वह किताबों को अपने इर्द-गिर्द फैलाकर उन्हें पढ़ता है। परेशानी और खुशी में वह किताबों को खोलकर देखता है, उन्हें निहारता है और पढ़ता है। वे उसे अच्छे दोस्त की तरह नई राह दिखाती हैं। तीसरे संदेश में विवान स्वयं को प्रस्तुत करता है कि उसे अच्छा लेखक बनना है। वह दिन-रात किताबें पढ़ता है, लेकिन सभी उसका मजाक उड़ाते हैं। गणित, साइंस में वह बेहद कम नंबर लाता है। चौथे संदेश में भी विवान स्वयं को प्रस्तुत करते हुए यह बताता है कि वह अपनी बुरी आदतों को बदलेगा। इन बुरी आदतों में माता-पिता एवं दोस्तों पर गुस्सा करना, समय पर काम नहीं करना, पढ़ाई के समय इधर-उधर ध्यान बँटना शामिल है। अंतिम संदेश में भी विवान स्वयं को प्रस्तुत करते हुए दिखाता है कि उसे गणित, इतिहास एवं साइंस में कम अंक लाने पर पीछे की बेंच पर बिठाया जा रहा है। वह उदास होकर पीछे की बेंच पर बैठता है और दोस्त उसका मजाक उड़ाते हैं, लेकिन एक दिन पीछे की बेंच पर बैठनेवाला यही बच्चा बड़ा होकर साहित्य में देश के लिए नोबेल पुरस्कार जीतकर लाता है। इस संदेश से स्पेशल असेंबली में स्टूडेंट के साथ ही शिक्षक एवं प्रिंसीपल भी दंग रह जाते हैं।

विवान जब अपनी नाटिका समाप्त करता है तो देर तक तालियाँ बजती रहती हैं। गणित, इतिहास एवं साइंस की टीचर को अपनी गलती का एहसास होता है। यह नाटिका देखकर प्रिंसीपल विवान को गले से लगा लेती हैं और कहती हैं, ‘‘इसमें कोई शक नहीं कि तुमने इस नाटिका से न सिर्फ बच्चों को, बल्कि बड़ों को भी राह दिखाई है। हर बच्चा श्रेष्ठ होता है। हाँ, यह बात दूसरी है कि हर बच्चा हर विषय में तेज नहीं हो सकता।’’

विवान को सर्वश्रेष्ठ नाटिका प्रस्तुत करने पर पुरस्कृत किया जाता है। अब इतिहास, गणित एवं साइंस के टीचर उसे गलती करने पर पीछे की बेंच पर नहीं बैठाते। हाँ, विवान भी अब इन विषयों पर अधिक ध्यान देता है और गलती कम करता है। उसने ध्यान बँटनेवाली अपनी आदत पर काबू पा लिया है और सचमुच कलाम के पाँच संदेशों को अपने जीवन में उतार लिया है ।

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