तोड़ी सियार ने दोस्ती

सियार और कुत्ते में गहरी दोस्ती थी। दोनों जंगल में साथ रहते थे। मिलकर शिकार करते थे। एक दिन उन्हें कोई शिकार नहीं मिला। दोनों को भूखे पेट ही सोना था। उस रात ठंड भी कुछ ज्यादा थी। भूखे पेट उन्हें नींद नहीं आ रही थी। अचानक कुत्ते को कुछ दूरी पर कोई लाल चीज चमकती दिखाई दी। सियार ने उसे बताया कि ‘‘वह आग है। यहाँ से कुछ ही दूरी पर एक गाँव है, जहाँ लोग आग जलाकर जाड़ा दूर भगाते हैं।’’ कुत्ते ने सियार से आग लाने को कहा। आग से कम-से-कम ठंड तो दूर भाग जाती? लेकिन सियार गाँव जाने को तैयार नहीं हुआ। उसने साफ-साफ कह दिया, ‘‘तुम्हें जाना हो तो जाओ, मैं नहीं जा पाऊँगा।’’

कुत्ते को आदमी से बहुत डर लगता था, लेकिन उसने सोचा कि ‘आग के आस-पास कुछ हड्डियाँ भी पड़ी हुई मिल सकती हैं। वहाँ जाने पर भूख और ठंड दोनों समस्याओं का अंत हो सकता है।’ वह चल पड़ा। जब वह जलती हुई आग के पास पहुँचा, एक आदमी घर से बाहर निकल आया। उसे देखकर कुत्ते को बहुत डर लगा। उसने आदमी से निवेदन किया, ‘‘मुझे बहुत ठंड लग रही है। क्या मैं थोड़ी देर आग के पास बैठ सकता हूँ? थोड़ी देर में मैं चला जाऊँगा।’’

आदमी ने कहा, ‘‘ठीक है, बैठो। लेकिन जैसे ही तुम गरम हो जाओ, यहाँ से चले जाना।’’

कुत्ता आग के पास बैठ गया। वहीं पास में कुछ हड्डियाँ पड़ी थीं, वह उन्हें खाने लगा।

कुछ देर में आदमी फिर से बाहर आया और कुत्ते को जाने के लिए कहा। कुत्ता बोला, ‘‘अभी मुझे ठंड लग ही रही है। थोड़ी देर और बैठ लेने दीजिए न?’’

कुछ देर बाद आदमी फिर बाहर निकला। इस बार कुत्ते ने कहा, ‘‘हाँ, अब मैं गरम हो गया हूँ, लेकिन मैं जंगल नहीं जाना चाहता। वहाँ मैं अकसर भूखा रहता हूँ। ठंड से भी परेशान रहता हूँ। आप मुझे यहीं रहने नहीं दे सकते? मैं पक्षियों और जानवरों के शिकार में आपकी मदद करूँगा। आप मुझे यहीं रहने दीजिए, प्लीज!’’

आदमी ने सोचा, ‘कुत्ते के रहने से फायदा ही है।’ उसने कुत्ते को रहने की अनुमति दे दी।

तभी से कुत्ते आदमी के साथ रह रहे हैं और सियार कुत्ते को पुकार रहे हैं, ‘काम हुआ?...हुआ?...हुआ?’

एस.एफ. २२, सिद्ध विनायक अपार्टमेंट

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