नंगा राजा

बहुत समय पहले की बात है। एक राजा के पास तीन पाखंडी आए। पेशे से वे जुलाहे थे। उन्होंने राजा से कहा कि हम एक विशेष प्रकार का कपड़ा बुन सकते हैं, जिसको वही व्यक्ति देख सकता है जो अपने पिता का असली बेटा हो; परंतु यदि वह असली बेटा नहीं—भले ही यह विश्वास किया जाए कि वह असली है—तो वह उसे नहीं देख सकेगा।

यह सुनकर राजा बहुत खुश हुआ। उसने सोचा कि इस तरीके से वह अपने राज्य में ऐसे लोगों में भेद कर सकेगा जो वास्तविक बेटे के रूप में रह तो रहे हैं, परंतु अपने पिता के असली बेटे हैं नहीं। इस तरह वह उन्हें धमकाकर, उनपर अतिरिक्त कर लगाकर अपने खजाने में बढ़ोतरी कर सकेगा; क्योंकि मूर जाति में केवल असली बेटे ही अपने बाप की संपत्ति के उत्तराधिकारी होते थे। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए और कपड़ा तैयार करने के लिए राजा ने उन जुलाहों को एक महल देने की आज्ञा अपने मंत्री को दी। जुलाहे भी अपनी योग्यता सिद्ध करने के लिए कपड़ा तैयार होने तक महल में ही रहने पर सहमत हो गए। इससे राजा संतुष्ट हो गया।

जब जुलाहों को काफी मात्रा में सोना, चाँदी, सिल्क और दूसरी चीजें दी गईं तो वे महल में दाखिल हुए और अपनी खड्डियों को इस ढंग से लगाया कि कोई समझे कि वे दिन-रात काम करते हैं।

कुछ दिनों के बाद उनमें से एक जुलाहा राजा के पास आया और उसे बताया कि कपड़ा बनना आरंभ हो गया है। उसकी बनावट और डिजाइन के बारे में बताते हुए उसने कहा कि वह दुनिया में अत्यंत अद्भुत वस्तु होगी। उसने वहाँ आने के लिए राजा से प्रार्थना की और याचना की कि वह अकेला ही आने की कृपा करे। राजा अति प्रसन्न हुआ, परंतु यह चाहते हुए कि जाने से पहले किसी दूसरे व्यक्ति की सलाह ले ले, उसने लॉर्ड चेंबरलेन को यह देखने के लिए पहले भेजा कि वे कहीं धोखा तो नहीं दे रहे हैं। जब लॉर्ड चेंबरलेन कारीगरों से मिला और वह सबकुछ सुना तो यह मानने का उसका साहस नहीं हुआ कि उसने कपड़ा नहीं देखा था। जब वह राजा के पास लौटा तो उसने बताया कि मैंने कपड़ा देखा था। राजा ने एक दूसरे व्यक्ति को भेजा और उसने भी आकर वही सूचना दी। जिन-जिनको भेजा गया था, उन सभी ने आकर पुष्टि कर दी कि उन्होंने कपड़ा देखा था तो राजा ने स्वयं जाने का निश्चय कर लिया।

महल में प्रवेश करके राजा ने उन लोगों को काम करते देखा। उन्होंने कपड़े की नफासत, बनावट और इस आविष्कार के उद्गम का विवरण दिया। साथ-ही-साथ इसके डिजाइन और रंग के बारे में भी बताया, जिसको वे बुनते हुए प्रतीत होते थे, परंतु वास्तव में बुन नहीं रहे थे। राजा ने देखा कि वे काम करते प्रतीत होते थे। राजा ने कपड़े की नफासत का सूक्ष्म विवरण सुना, परंतु वह कपड़ा देख नहीं पाया, भले ही जिनको देखने के लिए भेजा था उन्होंने कपड़ा देखा था। यह देखकर राजा बेचैन हो गया और डरने लगा कि वह कहीं उस राजा का बेटा न हो जिसको अनुमानित तौर पर उसका पिता कहा जाता है, और यदि वह मानता है कि वह कपड़ा नहीं देख रहा तो उसे अपने राज्य से हाथ धोना पड़ेगा। यह विचार आते ही उसने कपड़े की बनावट इत्यादि, जो उसे बताई गई थी, की प्रशंसा करके कारीगरों की हाँ में हाँ मिलानी शुरू कर दी।

महल में लौटने पर उसने अपने लोगों को बताया कि कपड़ा कितना अच्छा और आश्चर्यजनक था। साथ ही उसे इसमें गड़बड़ी का संदेह हुआ।

दो-तीन दिन की समाप्ति पर उसने अलगुअसिल (न्याय विभाग के अधिकारी) से कहा कि वह जाए और कपड़ा देखे। जब अलगुअसिल अंदर गया और कारीगरों को देखा तो उन्होंने पहले की तरह कपड़े की शक्ल एवं डिजाइन का विवरण यह जानकारी देते हुए दिया कि राजा कपड़ा देखने आ चुका था, फिर भी वह कपड़े को देख नहीं पाया। उसने सोचा कि वह वास्तव में अपने बाप का असली बेटा नहीं है और इसी कारण कपड़ा देख नहीं पा रहा है। अलगुअसिल यह सोचकर भयभीत हुआ कि यदि वह घोषित कर दे कि वह कपड़ा देख नहीं सका तो उसे अपने महत्त्वपूर्ण पद से हाथ धोना पड़ेगा। इस विपदा को टालने के लिए उसने औरों से भी अधिक बढ़-चढ़कर कपड़े की प्रशंसा करना शुरू कर दी।

जब अलगुअसिल राजा के पास लौटकर आया तो उसने बताया कि मैंने कपड़ा देखा है और वह दुनिया में एक अत्यंत अद्भुत निर्माण है। राजा बुरी तरह घबरा गया, क्योंकि उसने विचार किया कि यदि अलगुअसिल ने कपड़ा देखा है तो इसमें कोई संदेह नहीं रहा कि वह राजा का असली बेटा नहीं है जैसाकि प्रायः खयाल किया जाता है। अतः उसने भी कपड़े की उत्तमता की प्रशंसा आरंभ कर दी और कारीगरों के कौशल को भी सराहा, जिन्होंने कपड़ा बनाया था।

दूसरे दिन राजा ने अपने सभासदों में से एक को कपड़ा देखने के लिए भेजा। उसे लगा कि अन्य व्यक्तियों ने राजा और दूसरे लागों को धोखा दिया था, क्योंकि किसी को भी यह कहने का साहस नहीं हुआ कि उसने कपड़ा नही देखा था।

इसी प्रकार यह सब चलता रहा, जब तक महाभोज का दिन नहीं आ गया। सभी ने राजा से प्रार्थना की कि वह महाभोज का दिन कोई भी वस्त्र पहन लें। अतः आज्ञा मिलने पर कारीगर बहुत महीन कपड़े के रोल लाए और राजा से पूछा कि इसमें से कितना कपड़ा काटें। राजा ने आज्ञा दी कि आवश्यकतानुसार इतना काटा जाए। राजा ने यह भी बता दिया कि उसे किस प्रकार से बनाया जाए।

अब जब वस्त्र तैयार हो गए और महाभोज का दिन आ पहुँचा तो जुलाहे उन्हें राजा के पास लाए। उन्होंने राजा को बताया कि पोशाक उसी कपड़े की बनाई गई है जिसके लिए आदेश दिया गया था। इस सारे समय में राजा को यह कहने का साहस नहीं हुआ कि वह उस पोशाक को देख नहीं सकता था।

जब राजा ने यह पोशाक पहने हुए स्वीकार किया तो वह घोड़े की पीठ पर सवार होकर नगर की ओर चला, परंतु उसके लिए सौभाग्यवश यह गरमियों का समय था। लोगों ने जब राजा को इस रूप में आते हुए देखा तो बहुत हैरान हुए, परंतु यह जानते हुए कि जो कोई भी उसके कपड़ों को नहीं देखेगा, वह अपने बाप का असली बेटा नहीं कहलाएगा तथा इस प्रकार की घोषणा उनके लिए अनादर का कारण हो सकती है, उन्होंने अपनी हैरानी को अपने पास ही रहने दिया।

किंतु एक हबशी के साथ ऐसी बात नहीं थी। उसने राजा को इस स्थिति में देखा और यह सोचते हुए कि उसका कोई नुकसान होनेवाला नहीं है, वह राजा के पास गया और बोला, ‘‘श्रीमान्, मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता कि मैं अपने बाप का असली बेटा हूँ या नहीं। अतः मैं आपको सूचित करता हूँ कि आप बिना कपड़े पहने घुड़सवारी कर रहे हैं।’’

यह सुनकर राजा ने यह कहकर उसे पीटना शुरू कर दिया कि वह अपने बाप का असली बेटा नहीं है, इसीलिए वह कपड़े नहीं देख सकता।

परंतु ज्यों ही हबशी ने कहा, बाकी लोगों को भी उसकी सचाई का विश्वास हो गया। उन्होंने भी वही कहा। जब तक राजा और अन्य लोगों को सचाई प्रकट होने का डर जाता रहा। अंत में उन्होंने पाखंडियों की चाल को समझ लिया, जिसके वे सभी शिकार हुए॒थे।

जब जुलाहों को पकड़ने की कोशिश की गई तो पता चला कि वे सारे साजो-समान, जो राजा से पाखंड (कपड़ा बनने) के लिए लिया था, लेकर भाग गए थे।

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