मोबाइल की आत्मकथा

 मैं एक मोबाइल आज आप सभी के सामने अपनी आत्मकथा सुनाना चाहता हूँ। अनेकों ऐसे राज हैं, जो मैं अपने सीने मे दबाए पड़ा हुआ हूँ। जहाँ तक बात कॉल की है, आवाज के जादू के सामने क्या सच्चा है, और क्या झूठा है, कुछ भी समझ में नहीं आता है। चैटिंग के बहाने आदमी क्या-क्या करता है, ऐसी इनसानी फितरत से मैं पूरी तरह से वाकिफ  हूँ, पर मैं चुप हूँ। व्हाट्सएप पर तो होली, दीवाली और यह डे, वह डे के शुभकामना संदेश ऐसे आते हैं जैसे कि जानो सारा ब्रह्मांड ही एक हो गया हो। ओ हाँ, आप किसी को पसंद करें अथवा न करें, लेकिन फेसबुक पर तो ‘लाइक्स’ ऐसे आते हैं जैसे कि बचपन मे कंपट खाने की होड़ लगी रहती थी, और ‘कमेंट्स?’ जैसे कि कोई बिछड़ा यार मिल गया हो। व्हाट्एप की प्रोफाइल फोटो पर तो लोग ऐसी सुंदर-सुंदर फोटो लगाते हैं कि ऐश्वर्या राय भी अपने सौंदर्य पर शरमा जाए। किसी की उपलब्धियों की फोटो देख बधाई देनेवालों की मुझमें भीड़ लग जाती है, पर सच क्या है, यह तो मैं ही समझ सकता हूँ, इतना सब होने पर भी हर अच्छी-बुरी बातें अपने सीने में दबाए बैठा हूँ।

७/२०२, स्वरूप नगर

कानपुर (उ.प्र.)

दूरभाष : ७६०७३५५६७८

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