उषा गीत

पेड़ों पर गूँज उठा पक्षियों का शोर,

रात कटी अँधियारी निकल आई भोर।

सूरज के स्वागत में

लालिमा जो आई है।

ओस बूँद हरित तृण पे,

मोती सी छाई है।

 

शीतल पवन बहने लगी चारों ओर,

रात कटी अँधियारी निकल आई भोर।

मुरगे ने बाँग मारी,

चिडि़या भी चहकी।

झूम उठे तरु पल्लव

लताएँ भी बहकी।

 

कोयल भी कूक उठी नाच उठा मोर,

रात कटी अँधियारी निकल आई भोर।

एक नई आस लिये,

मन में विश्वास लिये,

आँखें खोली हर कली ने

भँवरों की आस लिये।

 

गुनगुनी सी धूप नजर आई हर छोर,

रात कटी अँधियारी निकल आई भोर।

प्रियतम संग रात कटी,

बिरहा की अगन छँटी।

हर पल मधुमय बिता

सारी तकरार हटी।

 

अलसाए यौवन पर थकन का है जोर,

रात कटी अँधियारी निकल आई भोर।

 

२२४ सिल्वर हिल कॉलोनी, धार,

जिला-धार (म.प्र.)

दूरभाष : ०८२३६९४०२०१

हमारे संकलन