घोड़ागाड़ी का स्टैंड

घोड़ागाड़ी का स्टैंड

चार्ल्स डिकेंस का जन्म फरवरी, १८१२ को हुआ था। वे विक्टोरियन युग के सबसे लोकप्रिय अंग्रेजी उपन्यासकार थे, साथ ही एक सशक्त सामाजिक आंदोलन के सदस्य भी। चार्ल्स के दर्जन भर प्रमुख उपन्यास, लघुकथाएँ और अनेक नाटक  सर्वाधिक लोकप्रिय हैं। उनकी प्रसिद्ध रचनाओं मेंबौज के स्कैच’, ‘पिकविक पेपर्स’, ‘ऑलिवर ट्विस्ट’, ‘निकोलस निकिलबी’, ‘डेविड कॉपरफील्ड’, ‘ग्रेट ऐक्सपेक्टेशंस’, ‘दो नगरों की कथाआदि प्रमुख हैं। डिकेंस ने सैकड़ों अमर पात्रों की सृष्टि की, जो जनता की स्मृति में आज तक सुरक्षित हैं। वे कहानी कहने में दक्ष थे, यहाँ उनकी एक चर्चित कहानीघोड़ागाड़ी का स्टैंडका हिंदी रूपांतर प्रस्तुत कर रहे हैं।

हमारा मानना है कि घोड़ा गाड़ी, जो कि लंदन में हैकनी कोचेज कहलाती हैं, केवल मेट्रोपोलिटेन शहर में ही पाई जाती थीं। हमें यह बताया जाता है कि एडिनबरा और बहुत ज्यादा दूर नहीं, लिवरपूल और मैनचेस्टर में भी अपने-अपने हैकनी-कोच स्टैंड पाए जाते हैं। हम इस बात को भी तुरंत मान लेते हैं कि इस तरह की कुछ घोड़ा-गाडि़याँ इन शहरों में भी पाई जाती हैं; पर वे भी अकसर लंदन की कई घोड़ा गाडि़यों की तरह सुस्त, धीरे-धीरे चलनेवाली और गंदी होती हैं। पर वे किसी भी तरह लंदन की घोड़ा गाडि़यों की संख्या में, कितने स्टैंड हैं, कितने ड्राइवर या घोड़े हैं, वे कहीं से भी उनकी बराबरी नहीं कर पाती हैं।

अब एक भारी-भरकम, टूटी-फूटी लंदन की घोड़ा गाड़ी को लीजिए। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि दुनिया का कोई भी वाहन या सवारी लंदन की इस घोड़ा गाड़ी की तरह नहीं हो सकती, चाहे वह उतनी ही पुरानी हैकनी कोच क्यों न हो! हमने अभी हाल ही लंदन की सड़कों पर, अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि कुछ स्टैंडों पर ऐसी गाडि़याँ देखी हैं, जो कि एक साफ-सुथरे, सजे हुए रथ की तरह थे—हरे रंग के रथ और पीली पॉलिश की हुई चार पहियों पर घोड़ा गाडि़याँ—और कुछ गाडि़यों के पहिए भी अलग-अलग रंग व अलग-अलग साइजों के होते हैं। यह एक तरह से नवीनता या विविधता लाने का प्रयास, जो कि मानव-मन की बेचैनी की ओर इशारा करता है और तमाम समय से चली आई मान्यताओं या संस्थाओं का अनादर है। अब आप ही बताइए, घोड़ा गाडि़याँ साफ-सुथरी क्यों होनी चाहिए? हमारे पूर्वजों ने उन्हें गंदी पाया और वैसे ही छोड़कर चले गए। और हमारे अंदर यह इच्छा क्यों होनी चाहिए कि हम हमेशा चलते ही रहें—वह भी ६ मील प्रति घंटे की रफ्तार से, जबकि वे ४ मील प्रति घंटे की रफ्तार से ही पथरीली, ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर चलते रहते थे। यह सब बहुत गंभीर सवाल है। घोड़ा गाडि़याँ अब हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग हैं। वे विधायिक द्वारा निर्धारित की गई हैं, और उन्हें सरकार द्वारा, पार्लियामेंट द्वारा बाकायदा रजिस्टर्ड कर के नंबर प्लेट दी गई हैं।

फिर क्यों लंदन जैसे शहर को कैब और ऑक्नी बसेज द्वारा भर दिया गया है? या लोगों को क्यों ८ पैसे प्रति मील के हिसाब से सफर करने देना चाहिए, जबकि पार्लियामेंट ने यह फैसला लिया था कि उन्हें धीमी सवारी से आने-जाने के लिए १ शिलिंग प्रति मील की दर से भुगतान करेंगे। चूँकि हमें इसका जवाब मिलने की कोई संभावना नहीं नजर आती, इसलिए हम अब एक नया पैरा शुरू करेंगे।

हैक्नी कोचेज से हमारी जान-पहचान पुरानी है। हम तो किरायोें की चलती-फिरती किताब हैं और हम यह महसूस करते हैं कि अगर इस बात पर कभी कोई विवाद हो तो हम अपने मुद्दे पर सही पाए जाएँगे। कोवेंट गार्डेंस के आसपास ३ मील तक कितने पानीवाले हैं, वे हम जानते हैं और हमें उम्मीद है कि उस क्षेत्र के  जितने घोड़े हैं, वे भी अच्छी तरह हमें जानते होंगे, यदि वे अंधे नहीं होंगे। हमें हैक्नी कोचेज में बहुत ज्यादा दिलचस्पी है, पर हम शायद ही कभी-कभार उस पर चढ़ते हैं। यदि हमने कभी किसी हैक्नी कोच को चलाया तो मुझे उम्मीद है कि वह कोच जरूर उलट जाएगी। अन्यथा हम घोड़ों और हैक्नी कोचेज के महान् दोस्त हैं, जैसाकि मि. मार्टिन, जो कि फेरीवाले के रूप में जाने जाते हैं, जानते हैं। हम कोई घोड़े नहीं रखते, पर केवल एक क्लॉथ्स हॉर्स (कपड़े का घोड़ा) हमने कभी भी घोड़ों की काठी पर बैठना पसंद नहीं किया था, केवल मरन की काठी को छोड़कर और कभी भी हाउंड्स (शिकारी कुत्तों) का पीछा नहीं किया था। यातायात के इन साधनोें को छोड़कर हम अपनी राय आपको घोड़ा गाड़ी के स्टैंड के बारे में जाहिर करना चाहते हैं।

जिस घर के ऊपरी कमरे में बैठकर मैं यह लेख लिख रहा हूँ, उसकी खिड़की के नीचे ही एक हैक्नी कोच स्टैंड है। इस वक्त वहाँ पर केवल एक ही गाड़ी खड़ी है, पर इस तरह की गाडि़यों का एक अच्छा नमूना है। एक बड़ी लंबी-चौड़ी वर्गाकार डिंगी (छोटीभव) जैसी पीले रंग की (जैसे कोई पित्तीय ब्रूनेट हो), जिसमें छोटी-छोटी काँच की खिड़कियाँ हैं तथा बड़े-बड़े फ्रेम्स हैं, उसके पैनेल पर किसी राजघराने के ‘कोट ऑफ आर्म्स’ का निशान बना हुआ था, जो अब धुँधला पड़ चुका था। उसकी एक्सेल या धुरी लाल रंग की थी और ज्यादातर पहिए हरे रंग के थे। कोच का बक्सा एक बड़े ओवरकोट से ढका हुआ था। उसपर कंधों के ढकने के लिए बहुत सारे कैप या बड़े-बड़े कपड़े लगे हुए थे और कुछ असाधारण कपड़े भी ढके हुए थे। और कई जगह से वह घास-फूस दिख रहा था, जो कुशन को भरने के लिए इस्तेमाल किया गया था। घोड़ों के सिर झुके हुए थे और उनमें से प्रत्येक के अयाल और पूँछों में बाल इतने कम थे, जैसे कि वे घिसे-पिटे लकड़ी के घोड़े की पूँछ और अयाल हो । वे धैर्यपूर्वक कुछ गीली घास पर खड़े थे और कभी अपनी ढकी हुई आँखों से कुछ देखने की कोशिश करते थे तथा कभी-कभी अपने साज को हिलाने की कोशिश करते थे और कभी-कभी बीच में एक घोड़ा दूसरे घोड़े के कान के पास अपना मुँह ले जाता था, जैसे वह फुसफुसाकर यह कह रहा हो कि मेरा वश चले तो मैं उस जवान की हत्या कर दूँ। कोचवान स्वयं जल-घर में था और जो पानीवाला था, वह अपने दोनों हाथ पैंट्स की जेब में डाले उबल-शफल का नाच कर रहा था, जिससे उसके पैर गरम रहें।

घर नं. ५ से एक नौकरानी, बालों में गुलाबी रिबन लगाए बाहर निकलती है और उसके साथ में चार बच्चे भी होते हैं। वह जोर-जोर से पुकारती है। पानीवाला आदमी नलघट से भागकर आता है तथा कोचवान को जोर-जोर से आवाज लगाता है। इस बीच वह घोड़ों को खींचकर लाता है, उनको लगाम लगाता है और बीच-बीच में वो जवान को भी पुकारता जाता था। फिर टैप-रूम से कोचवान अपनी लकड़ी के सोलवाले जूते पहने खट-खट करते हुए भागते हुए आता है और खींच-तानकर आगे-पीछे करके अपनी घोड़ा गाड़ी घर नं. ५ के दरवाजे के सामने खड़ी कर दिया। क्या हल्ला-गुल्ला और गड़बड़ कर रहे थे!

वह वृद्ध महिला, जो वहाँ पिछले चार महीने से रह रही थी, वह वापस अपने घर जा रही थी। कई बक्से घर के बाहर आ गए और उस गाड़ी का एक हिस्सा सामान से भर गया। बच्चे, जो हर आदमी-औरत के रास्ते में आ रहे थे, उस काम में रुकावट आ रही थी। एक छोटा बच्चा, जो एक छाता लेकर भाग रहा था, वह गिर गया था और उसे चोट लग गई थी तथा उसे जब अंदर ले आया जा रहा था, तब वह अपने हाथ-पैर फेंक रहा था। अन्य बच्चे इधर-उधर दुबक गए तथा साफ जाहिर था कि वह वृद्ध महिला पिछले कमरे में लोगों का चुंबन ले रही थी। उसके बाद वह उस कमरे से बाहर निकलकर आई। उसके पीछे-पीछे उसकी शादीशुदा लड़की तथा उसके बच्चे उनके पीछे-पीछे दोनों नौकर। इन दोनों नौकरों और कोचवान की मदद से सब लोगों को गाड़ी पर चढ़ा दिया गया। फिर एक कपड़ा और एक छोटी सी टोकरी, जिसमें मेरे खयाल से एक काली बॉटल तथा कुछ कागज में लपेटी सैंडविच थीं, पकड़ा दी गई। गाड़ी के पायदान ऊपर उस दिए गए कोच के दरवाजे बंद कर दिए गए।

‘‘गोल्डेन क्रॉस, चेरिंग क्रास, टॉम।’’ पानीवाले आदमी ने कहा, ‘‘गुड बाई, नानी!’’ बच्चे जोर से चिल्लाए और कोच घंटी बजाती हुई ३ मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल पड़ती है।

उनके जाने के बाद माँ और बच्चे घर के अंदर वापस चले गए, पर उनमें से एक बच्चा सड़क पर दौड़ लेता है और नौकरानी उसके पीछे-पीछे उसे पकड़ने के लिए भाग गई तथा उसे किसी प्रकार से पकड़कर घर वापस ले आई।  घर के अंदर घुसने के पहले उसने मुड़कर हम लोगों की ओर या पाँट ब्वॉय की ओर देखा, पता नहीं। और सच हैक्नी कोच स्टैंड बिल्कुल शांत हो गया।

हमने अकसर बहुत संतोष के साथ यह देखा है कि कैसे कोई नौकरानी, जो किसी काम के लिए या कोच लाने के लिए बाहर भेजी गई, वापस घर आने पर एक प्रकार की राहत महसूस करती है। और यदि इसी काम के लिए किसी लड़के-नौकर को भेजा जाता है तो वह उस कोच के बॉक्स पर चढ़कर बहुत खुश महसूस करता था। पर हमको इससे ज्यादा खुशी कभी महसूस नहीं है, जबकि हमने कोचवानों की एक पार्टी देखी।

हम एक दिन, जब हम वह टोरनहेम रोड में थे, तो हमने एक कमतर गली से एक शादी की पार्टी को निकलते देखा—फिट्जशय के पास देखा था। दुलहन ने, जिसका बड़ा सा लाल चेहरा था, एक पतली सी सफेद शादी की ड्रेस पहनी हुई थी और बाइड्समेड साथ चलनेवाली सहबालिका ने उसी तरह के उचित कपड़े पहने हुए वह एक खुशमिजाज, थोड़ी मोटी सी कम उम्र की औरत थी। दूल्हे ने नीले रंग का सूट पहना हुआ था और उसकी वेस्टकोट पीले रंग की थी। वह सफेद पैंट पहने हुआ था और उससे मिलता हुआ ही बर्लिन ग्लब्स (दस्ताने) पहने हुए था। वे उस गली के कोने पर रुके और बहुत ही अवर्णनीय शालीनता से उन्होंने कोच के लिए आवाज लगाई। जैसे ही कोच आई, वे लोग उसमें बैठ गए और दुलहन की सहेली ने बहुत ही लापरवाही से उसके दरवाजे पर एक लाल शॉल, जो शायद वह इसी उद्देश्य से लाई थी, डाल दिया, जिससे उसका नंबर न दिखे और वह निजी गाड़ी प्रतीत हो। पर शायद वह यह भूल गई कि गाड़ी के पीछे भी नंबर बड़े अक्षरों में लिखा था। इस तरह से वे लोग चले गए। एक शिलिंग प्रति मील की दर से और इस बार की सैर शायद उन्हें पाँच शिलिंग की लगे।

एक हैक्नी कोच के बारे में कितनी दिलचस्प पुस्तक लिखी जा सकती थी, यदि वह अपने शीर्ष पर भी उतना सामान ले जा सकती थी, जितना कि उसके शरीर में। एक टूटे-फूटे हैक्नी कोच की आत्मकथा उतनी ही दिलचस्प होगी, जितनी कि एक गए-बीते पुराने जमाने के नाटककार की जीवनी की...। कितने ही लोगों को इसने बिजनेस या मुनाफे के लिए—या घूमने-फिरने या दुःख-तकलीफ में यहाँ से वहाँ पहुँचाया होगा। और कितने ही लोगों की उदास कहानियाँ इसमें घटी होंगी। वह गाँव की लड़की, ज्यादा पोशाक पहने और दिखावा करनेवाली औरत या फिर मदहोश वेश्या! एक नौसिखिया या बहुत कंजूस आदमी या फिर कोई चोर ही!

हमारा मानना है कि घोड़ा गाड़ी, जो कि लंदन में हैकनी कोचेज कहलाती हैं, केवल मेट्रोपोलिटेन शहर में ही पाई जाती थीं। हमें यह बताया जाता है कि एडिनबरा और बहुत ज्यादा दूर नहीं, लिवरपूल और मैनचेस्टर में भी अपने-अपने हैकनी-कोच स्टैंड पाए जाते हैं। हम इस बात को भी तुरंत मान लेते हैं कि इस तरह की कुछ घोड़ा-गाडि़याँ इन शहरों में भी पाई जाती हैं; पर वे भी अकसर लंदन की कई घोड़ा गाडि़यों की तरह सुस्त, धीरे-धीरे चलनेवाली और गंदी होती हैं। पर वे किसी भी तरह लंदन की घोड़ा गाडि़यों की संख्या में, कितने स्टैंड हैं, कितने ड्राइवर या घोड़े हैं, वे कहीं से भी उनकी बराबरी नहीं कर पाती हैं।

अब एक भारी-भरकम, टूटी-फूटी लंदन की घोड़ा गाड़ी को लीजिए। मैं दावे के साथ कह सकता हूँ कि दुनिया का कोई भी वाहन या सवारी लंदन की इस घोड़ा गाड़ी की तरह नहीं हो सकती, चाहे वह उतनी ही पुरानी हैकनी कोच क्यों न हो! हमने अभी हाल ही लंदन की सड़कों पर, अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि कुछ स्टैंडों पर ऐसी गाडि़याँ देखी हैं, जो कि एक साफ-सुथरे, सजे हुए रथ की तरह थे—हरे रंग के रथ और पीली पॉलिश की हुई चार पहियों पर घोड़ा गाडि़याँ—और कुछ गाडि़यों के पहिए भी अलग-अलग रंग व अलग-अलग साइजों के होते हैं। यह एक तरह से नवीनता या विविधता लाने का प्रयास, जो कि मानव-मन की बेचैनी की ओर इशारा करता है और तमाम समय से चली आई मान्यताओं या संस्थाओं का अनादर है। अब आप ही बताइए, घोड़ा गाडि़याँ साफ-सुथरी क्यों होनी चाहिए? हमारे पूर्वजों ने उन्हें गंदी पाया और वैसे ही छोड़कर चले गए। और हमारे अंदर यह इच्छा क्यों होनी चाहिए कि हम हमेशा चलते ही रहें—वह भी ६ मील प्रति घंटे की रफ्तार से, जबकि वे ४ मील प्रति घंटे की रफ्तार से ही पथरीली, ऊबड़-खाबड़ सड़कों पर चलते रहते थे। यह सब बहुत गंभीर सवाल है। घोड़ा गाडि़याँ अब हमारे जीवन का एक अभिन्न अंग हैं। वे विधायिक द्वारा निर्धारित की गई हैं, और उन्हें सरकार द्वारा, पार्लियामेंट द्वारा बाकायदा रजिस्टर्ड कर के नंबर प्लेट दी गई हैं।

फिर क्यों लंदन जैसे शहर को कैब और ऑक्नी बसेज द्वारा भर दिया गया है? या लोगों को क्यों ८ पैसे प्रति मील के हिसाब से सफर करने देना चाहिए, जबकि पार्लियामेंट ने यह फैसला लिया था कि उन्हें धीमी सवारी से आने-जाने के लिए १ शिलिंग प्रति मील की दर से भुगतान करेंगे। चूँकि हमें इसका जवाब मिलने की कोई संभावना नहीं नजर आती, इसलिए हम अब एक नया पैरा शुरू करेंगे।

हैक्नी कोचेज से हमारी जान-पहचान पुरानी है। हम तो किरायोें की चलती-फिरती किताब हैं और हम यह महसूस करते हैं कि अगर इस बात पर कभी कोई विवाद हो तो हम अपने मुद्दे पर सही पाए जाएँगे। कोवेंट गार्डेंस के आसपास ३ मील तक कितने पानीवाले हैं, वे हम जानते हैं और हमें उम्मीद है कि उस क्षेत्र के  जितने घोड़े हैं, वे भी अच्छी तरह हमें जानते होंगे, यदि वे अंधे नहीं होंगे। हमें हैक्नी कोचेज में बहुत ज्यादा दिलचस्पी है, पर हम शायद ही कभी-कभार उस पर चढ़ते हैं। यदि हमने कभी किसी हैक्नी कोच को चलाया तो मुझे उम्मीद है कि वह कोच जरूर उलट जाएगी। अन्यथा हम घोड़ों और हैक्नी कोचेज के महान् दोस्त हैं, जैसाकि मि. मार्टिन, जो कि फेरीवाले के रूप में जाने जाते हैं, जानते हैं। हम कोई घोड़े नहीं रखते, पर केवल एक क्लॉथ्स हॉर्स (कपड़े का घोड़ा) हमने कभी भी घोड़ों की काठी पर बैठना पसंद नहीं किया था, केवल मरन की काठी को छोड़कर और कभी भी हाउंड्स (शिकारी कुत्तों) का पीछा नहीं किया था। यातायात के इन साधनोें को छोड़कर हम अपनी राय आपको घोड़ा गाड़ी के स्टैंड के बारे में जाहिर करना चाहते हैं।

जिस घर के ऊपरी कमरे में बैठकर मैं यह लेख लिख रहा हूँ, उसकी खिड़की के नीचे ही एक हैक्नी कोच स्टैंड है। इस वक्त वहाँ पर केवल एक ही गाड़ी खड़ी है, पर इस तरह की गाडि़यों का एक अच्छा नमूना है। एक बड़ी लंबी-चौड़ी वर्गाकार डिंगी (छोटीभव) जैसी पीले रंग की (जैसे कोई पित्तीय ब्रूनेट हो), जिसमें छोटी-छोटी काँच की खिड़कियाँ हैं तथा बड़े-बड़े फ्रेम्स हैं, उसके पैनेल पर किसी राजघराने के ‘कोट ऑफ आर्म्स’ का निशान बना हुआ था, जो अब धुँधला पड़ चुका था। उसकी एक्सेल या धुरी लाल रंग की थी और ज्यादातर पहिए हरे रंग के थे। कोच का बक्सा एक बड़े ओवरकोट से ढका हुआ था। उसपर कंधों के ढकने के लिए बहुत सारे कैप या बड़े-बड़े कपड़े लगे हुए थे और कुछ असाधारण कपड़े भी ढके हुए थे। और कई जगह से वह घास-फूस दिख रहा था, जो कुशन को भरने के लिए इस्तेमाल किया गया था। घोड़ों के सिर झुके हुए थे और उनमें से प्रत्येक के अयाल और पूँछों में बाल इतने कम थे, जैसे कि वे घिसे-पिटे लकड़ी के घोड़े की पूँछ और अयाल हो । वे धैर्यपूर्वक कुछ गीली घास पर खड़े थे और कभी अपनी ढकी हुई आँखों से कुछ देखने की कोशिश करते थे तथा कभी-कभी अपने साज को हिलाने की कोशिश करते थे और कभी-कभी बीच में एक घोड़ा दूसरे घोड़े के कान के पास अपना मुँह ले जाता था, जैसे वह फुसफुसाकर यह कह रहा हो कि मेरा वश चले तो मैं उस जवान की हत्या कर दूँ। कोचवान स्वयं जल-घर में था और जो पानीवाला था, वह अपने दोनों हाथ पैंट्स की जेब में डाले उबल-शफल का नाच कर रहा था, जिससे उसके पैर गरम रहें।

घर नं. ५ से एक नौकरानी, बालों में गुलाबी रिबन लगाए बाहर निकलती है और उसके साथ में चार बच्चे भी होते हैं। वह जोर-जोर से पुकारती है। पानीवाला आदमी नलघट से भागकर आता है तथा कोचवान को जोर-जोर से आवाज लगाता है। इस बीच वह घोड़ों को खींचकर लाता है, उनको लगाम लगाता है और बीच-बीच में वो जवान को भी पुकारता जाता था। फिर टैप-रूम से कोचवान अपनी लकड़ी के सोलवाले जूते पहने खट-खट करते हुए भागते हुए आता है और खींच-तानकर आगे-पीछे करके अपनी घोड़ा गाड़ी घर नं. ५ के दरवाजे के सामने खड़ी कर दिया। क्या हल्ला-गुल्ला और गड़बड़ कर रहे थे!

वह वृद्ध महिला, जो वहाँ पिछले चार महीने से रह रही थी, वह वापस अपने घर जा रही थी। कई बक्से घर के बाहर आ गए और उस गाड़ी का एक हिस्सा सामान से भर गया। बच्चे, जो हर आदमी-औरत के रास्ते में आ रहे थे, उस काम में रुकावट आ रही थी। एक छोटा बच्चा, जो एक छाता लेकर भाग रहा था, वह गिर गया था और उसे चोट लग गई थी तथा उसे जब अंदर ले आया जा रहा था, तब वह अपने हाथ-पैर फेंक रहा था। अन्य बच्चे इधर-उधर दुबक गए तथा साफ जाहिर था कि वह वृद्ध महिला पिछले कमरे में लोगों का चुंबन ले रही थी। उसके बाद वह उस कमरे से बाहर निकलकर आई। उसके पीछे-पीछे उसकी शादीशुदा लड़की तथा उसके बच्चे उनके पीछे-पीछे दोनों नौकर। इन दोनों नौकरों और कोचवान की मदद से सब लोगों को गाड़ी पर चढ़ा दिया गया। फिर एक कपड़ा और एक छोटी सी टोकरी, जिसमें मेरे खयाल से एक काली बॉटल तथा कुछ कागज में लपेटी सैंडविच थीं, पकड़ा दी गई। गाड़ी के पायदान ऊपर उस दिए गए कोच के दरवाजे बंद कर दिए गए।

‘‘गोल्डेन क्रॉस, चेरिंग क्रास, टॉम।’’ पानीवाले आदमी ने कहा, ‘‘गुड बाई, नानी!’’ बच्चे जोर से चिल्लाए और कोच घंटी बजाती हुई ३ मील प्रति घंटे की रफ्तार से चल पड़ती है।

उनके जाने के बाद माँ और बच्चे घर के अंदर वापस चले गए, पर उनमें से एक बच्चा सड़क पर दौड़ लेता है और नौकरानी उसके पीछे-पीछे उसे पकड़ने के लिए भाग गई तथा उसे किसी प्रकार से पकड़कर घर वापस ले आई।  घर के अंदर घुसने के पहले उसने मुड़कर हम लोगों की ओर या पाँट ब्वॉय की ओर देखा, पता नहीं। और सच हैक्नी कोच स्टैंड बिल्कुल शांत हो गया।

हमने अकसर बहुत संतोष के साथ यह देखा है कि कैसे कोई नौकरानी, जो किसी काम के लिए या कोच लाने के लिए बाहर भेजी गई, वापस घर आने पर एक प्रकार की राहत महसूस करती है। और यदि इसी काम के लिए किसी लड़के-नौकर को भेजा जाता है तो वह उस कोच के बॉक्स पर चढ़कर बहुत खुश महसूस करता था। पर हमको इससे ज्यादा खुशी कभी महसूस नहीं है, जबकि हमने कोचवानों की एक पार्टी देखी।

हम एक दिन, जब हम वह टोरनहेम रोड में थे, तो हमने एक कमतर गली से एक शादी की पार्टी को निकलते देखा—फिट्जशय के पास देखा था। दुलहन ने, जिसका बड़ा सा लाल चेहरा था, एक पतली सी सफेद शादी की ड्रेस पहनी हुई थी और बाइड्समेड साथ चलनेवाली सहबालिका ने उसी तरह के उचित कपड़े पहने हुए वह एक खुशमिजाज, थोड़ी मोटी सी कम उम्र की औरत थी। दूल्हे ने नीले रंग का सूट पहना हुआ था और उसकी वेस्टकोट पीले रंग की थी। वह सफेद पैंट पहने हुआ था और उससे मिलता हुआ ही बर्लिन ग्लब्स (दस्ताने) पहने हुए था। वे उस गली के कोने पर रुके और बहुत ही अवर्णनीय शालीनता से उन्होंने कोच के लिए आवाज लगाई। जैसे ही कोच आई, वे लोग उसमें बैठ गए और दुलहन की सहेली ने बहुत ही लापरवाही से उसके दरवाजे पर एक लाल शॉल, जो शायद वह इसी उद्देश्य से लाई थी, डाल दिया, जिससे उसका नंबर न दिखे और वह निजी गाड़ी प्रतीत हो। पर शायद वह यह भूल गई कि गाड़ी के पीछे भी नंबर बड़े अक्षरों में लिखा था। इस तरह से वे लोग चले गए। एक शिलिंग प्रति मील की दर से और इस बार की सैर शायद उन्हें पाँच शिलिंग की लगे।

एक हैक्नी कोच के बारे में कितनी दिलचस्प पुस्तक लिखी जा सकती थी, यदि वह अपने शीर्ष पर भी उतना सामान ले जा सकती थी, जितना कि उसके शरीर में। एक टूटे-फूटे हैक्नी कोच की आत्मकथा उतनी ही दिलचस्प होगी, जितनी कि एक गए-बीते पुराने जमाने के नाटककार की जीवनी की...। कितने ही लोगों को इसने बिजनेस या मुनाफे के लिए—या घूमने-फिरने या दुःख-तकलीफ में यहाँ से वहाँ पहुँचाया होगा। और कितने ही लोगों की उदास कहानियाँ इसमें घटी होंगी। वह गाँव की लड़की, ज्यादा पोशाक पहने और दिखावा करनेवाली औरत या फिर मदहोश वेश्या! एक नौसिखिया या बहुत कंजूस आदमी या फिर कोई चोर ही!

मूल    : चार्ल्स डिकेंस
         अनुवाद :   अरुण चंद्र

 

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