नोक-झोंक

नोक-झोंक

ऋचा उपाध्याय: जीव विज्ञान एवं हिंदी में स्नातकोत्तर। देश-विदेश में बच्चों को हिंदी भाषा का ऑनलाइन शिक्षण। बेंगलुरु में स्थानीय बच्चों को हिंदी का शिक्षण। संप्रति साहित्यिक पत्रिकाप्रेम सुधा पहलकी मुख्य संपादिका। पत्र-पत्रिकाओं में कविता, लेख आदि प्रकाशित।

 

“भइया! भाभी पूछ रही हैं, खाना लगा दें?” राधा ने आँगन में बैठे माधव बाबू से पूछा।

“हाँ, हाँ, लगा दो, क्या बना है?”

“मटर का पराँठा!”

“अरे भगवान्! आज दोपहर में ही तो मटर का निमोना बना था। फिर से मटर।”

“तो क्या करें, रोज सबेरे-सबेरे खेत से दौरी भर-भरकर मूली, मटर आ जाती है।” भाभी अंदर से ही भुनभुनाने लगीं।

अब भइया भी कम थोड़े न हैं, बोले, “अरे! तो मूली का पराँठा बना दिया होता। पता है न, मटर से बादी होती है, तीन टैम लगातार मटर बनाने की क्या जरूरत थी? खेत में जो होगा, वही सब न आएगा।”

लो भई, अब भाभी का टेप रिकॉर्डर चालू, “अरे! तो मूली से कौनो कम गैस बनती है का? परसों दोनों टैम मूली खाए, ऐसी गैस सर पर चढ़ी है कि अभी तक दरद कर रहा है।”

“अरे, तो कम खाया करो न, तुम तो चार-चार पराँठा दबा लेती हो।”

“अब लो, हमाए खाने पर भी नजर गड़ाए बैठे हैं। इससे तो अच्छे  हम अपने मैके में थे, जो मन करता, खाते थे, कोई रोकने-टोकने वाला नहीं था।”

“अरे हाँ भई, मायके में तो सब धन्ना सेठ हैं इनके, रोज शाही पनीर, और दिव्य भोजन बनता है।”

“हमारे मायके को कुछ न कहो। उहाँ रोज अलग सब्जी, अलग तरह का खाना बनता है।”

“तब किसे कहें, चार टैम से मटर तो हमें खानी पड़ रही है, कभी मटर की कचौड़ी, कभी घुघरी, कभी पराँठा, कभी चूड़ा-मटर तो कभी निमोना, डर रहे हैं, कहीं हम मटर ही न बन जाएँ।”

“तो ले आओ किसी और को, जो तुम्हें अलग-अलग तरह के खाने बना के खिलाए। घर में कुछ बाहर से आएगा नहीं और हमसे छप्पन व्यंजन की उम्मीद करेंगे।”

“बाहर का सामान चाहिए? किसान का घर है, यही सब मिलेगा। शादी के बाद तो तुम्हें बड़ा अच्छा लगता था कि वाह, कितनी ताजा सब्जी, शुद्ध दूध, शुद्ध हवा, पर अब?”

“अच्छा तो अब भी लगता है, पर कोई हमें टोके नहीं कि क्या बना रही, क्या नहीं?” भाभी शरमाते हुए बोलीं।

“लो शादी की बात सुनकर तो तुम लजाकर बिल्कुल लाल टमाटर हो गईं।”

“धत्त! बारह बरस हो गया, अब हम नहीं लजाते-फजाते।”

“भाभी ओ भाभी! देखो, आज खेत से एक दौरी टमाटर और गोभी आई है, अब तुम दोनों जने अपनी ये नोक-झोंक बंद करो, काहे से कि अब दो-तीन टैम मूली-मटर की जगह टमाटर और गोभी के व्यंजन बनाना, खाना पड़ेगा और गोभी से बादी भी नहीं होती।” राधा हँसते हुए बोली।

डी.आई.-५०७, व्हाइट हाउस अपार्टमेंट
आर.टी. नगर, बेंगलुरु-५६००३२
दूरभाष : ९९०२६२४४९२s

हमारे संकलन