नववर्ष-२०२२

सूरज आया इक नया, गाने मंगल गीत।

प्रियवर अब दिल में सजे, केवल नूतन जीत॥

उसकी ही बस हार है, जो माना है हार।

साहस वाले का सदा, विजय करे शृंगार॥

बीते के संग छोड़ दो, मायूसी-अवसाद।

नवल बनेगा अब धवल, देगा मधुरिम याद॥

खट्टी-मीठी लोरियाँ, देकर गया अतीत।

वह भी था अपना कभी, था प्यारा सा मीत॥

जाते-जाते वर्ष यह, करता जाता नेह।

अंतर इसका जनवरी, भले दिसंबर देह॥

फिर से नव संकल्प हो, फिर से हो उत्थान।

फिर से अब जयघोष हो, हो फिर से नवगान॥

नया सूर्य ले आ गया, नया शौर्य नव ताप।

लिये आप आवेग यदि, नहीं बनोगे भाप॥

नहीं शिथिलता हो कभी, नहीं चरण हों मंद।

शासकीय जेएमसी महिला महाविद्यालय

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