सूर्य उदय होगा

सूर्य उदय होगा

: एक :

बस देखती रही शून्य में

इतना कुछ सहना था भगवान् तो

औरत को

तूने दिल क्यों दिया

क्यों दिमाग दिया

क्यों दी सोचने-समझने की ताकत

क्यों नहीं बिना दिल के

मांस का लोथड़ा बनाकर फेंक दिया धरा पर

क्यों अत्याचार सहने के बाद

सिसकियों से भर जाती हैं साँसें

क्यों झर-झर बहती हैं आँखें

क्यों हर कोई करता है

अपने-अपने तरह का अत्याचार

घर या बाहर

कोई तानों से मारे तो कोई गोली से

कोई आँखों ही आँखों में निगल जाता है

कोई कर देता है इज्जत को ही तार-तार

मानसिक विकृतियों का इलाज नहीं करते

और इलजाम धर देते हैं औरत पर ही हर बार

कोई कपड़े तो

कोई गैर-वक्त का बहाना लेता है

कोई चरित्रहीन तक कह देता है

पर कुसूर औरत का ही होता है हर बार

ए खुदा, इतनी बड़ी मार न मार

बस औरत बनकर तो देख एक बार...

: दो :

यह गोधूली का समय कितना सुंदर है

लौटती गऊएँ चरागाहों से

शाम की अंतिम वेला में रक्तिम आभायुक्त सूर्य

हर पल बढ़ता मन लुभावन-सौंदर्य

गऊओं के खुरों से उड़ती धूल-धूसरित

रश्मियों की बदलियाँ

सूर्य के अप्रतिम लालिमायुक्त सौंदर्य को

ढकने की बेकार कोशिश में खुद भी

आभावान होती धूलिकनियाँ

सोना ही सोना बिखरा मेरे गाँव की

पगडंडियों पर

सबसे अमीर मेरी धरा, मेरा गाँव

अप्रतिम सौंदर्य बिखरा है

और फिर कल

प्रभात वेला में जब स्वर्ण रक्तिम आभायुक्त सूर्य उदय होगा

एक नई चेतना का संचार होगा

पक्षियों की चहक, फूलों की महक

ओस की बूँदें पत्तियों को सहलाएँगी

हवा भी मदमस्त हो जाएगी

हर वृक्ष कल्पवृक्ष हो जाएगा

हर गऊ माँ कामधेनु बन जाएगी

मेरी धरा स्वर्ग बन जाएगी।

: तीन :

तकदीर बने तदबीरों से

मेहनतों से इश्क किया जाए

न किसी का इंतजार करो

खुद को खुद ही सँवारा जाए

बुलंदियाँ छूनी हैं तो करो

खुद को इतना बुलंद

या तो आसमाँ झुक जाए

या कद खुद का बढ़ जाए!

: चार :

देश पर कुर्बान होना जिनको आता है

हँसकर फाँसी पर वह दीवाना झूल जाता है

आसाँ नहीं यह जज्बा शहादत का

क्या अपने क्या पराए सब भूल जाता है

वह पागलपन, मस्ती, जुनून, देशभक्ति

वह फाकामस्ती और वह सरपरस्ती

दुश्मन भी जिसको देखकर सिर झुकाता है

मैदान-ए-जंग में जब जौहर दिखाता है

दुश्मन भी दुम दबाकर सरपट भाग जाता है

बहाया खून जिन्होंने जय-जयकार उनकी है

इस देश की सब पीढ़ियाँ कर्जदार उनकी हैं

: पाँच :

मैंने चाँद पे चिट्ठी लिखी है

तुम उसको जरूर पढ़ लेना

मैं कल तक राह तकूँगी

तुम उसका जवाब लिख देना

बेचैन निगाहें उलझी हैं चाँद से

तुम भी उसका दीदार कर लेना

मैंने जो-जो पूछा है तुमसे

तुम उसका जवाब लिख देना

जो उदास है चंदा का चेहरा

मैंने तुमको याद किया, समझ लेना

एक हँसी का छोटा सा टुकड़ा तुम

उस जवाब में तुम लिख देना

आँखें भीग-भीग जाती हैं

हम तुमको न भूलें तुम हमको न भूलो

पलभर को ही आराम मिले, ऐसा कोई जतन

तुम उस जवाब में लिख देना

मैं रोज चाँद निहारूँगी

तुम भी दीदार कर लेना

दिल मेरा बेचैन है यह जान के, मीठी बातें

तुम उस जवाब में लिख देना!

म. नं.-3, ऑफिसर्स एन्क्लेव, आरटीओ,

हरियाणा पुलिस कॉम्प्लेक्स,

नियर सीआरपीएफ ट्रेनिंग सेंटर,

कादरपुर, गुरुग्राम-122102 (हरियाणा)

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