११ दिन में तीन मंगल ग्रह मिशन लॉञ्च

११ दिन में तीन मंगल ग्रह मिशन लॉञ्च

दो हजार बीस वर्ष का महीना

जुलाई की थी अद्भुत शान।

इसी माह में मंगल ग्रह के

तीन मिशन का हुआ प्रस्‍थान।

अंतरिक्ष अन्वेषण के

इतिहास में पहली बार हुआ है।

ग्यारह दिन की अवधि के अंदर

तीन मिशन प्रस्‍थान हुआ है।

उन्नीस जुलाई से तीस जुलाई

अवधि में हुआ यह अद्भुत काम।

संयुक्त अरब अमीरात और चाइना

तथा अमरीका का था काम।

संयुक्त अरब अमीरात देश के

मंगल मिशन का ‘होप’ था नाम।

उन्नीस जुलाई दो हजार बीस को

पृथ्वी से हुआ था प्रस्‍थान।

चीन देश के मिशन का नाम था

‘टायनवेन-1’ जो तेइस जुलाई।

दो हजार बीस को हुआ प्रमोचित

मंगल ग्रह की करी चढ़ाई।

‘मार्स-दो हजार बीस’ नाम था

अमरीका के मंगल मिशन का।

तीस जुलाई दो हजार बीस को

था प्रस्‍थान हुआ था इसका।

‘होप’ मिशन संयुक्त अरब अमीरात

का पहला मंगल अभियान।

जापानी एच-२ए राकेट

द्वारा हुआ प्रमोचन काम।

जापान के टानेगाशीमा

केंद्र से इसका हुआ प्रमोचन।

मिशन में केवल आरबिटर है

करेगा मंगल ग्रह का परिक्रमण।

पहुँचेगा मंगल कक्षा में

दो हजार इक्कीस फरवरी में।

मिशन अवधि दो वर्ष है इसकी

लक्ष्यों का पूरा करने में।

‘होप’ अंतरिक्षयान भार है

तेरह सौ पचास किलोग्राम।

जिसमें आठ सौ किलोग्राम का

‘हाइड्राजीन’ ईंधन का काम।

अंतरिक्षयान की लंबाई है

दो दशमलव नौ मीटर।

एवं इसकी चौड़ाई है

दो दशमलव सैंतीस मीटर।

अठारह सौ वॉट जरूर

होगी बिजली इसकी।

जो दो सोलर पैनल द्वारा

मिलती रहेगी इसको।

मिशन डिजाइन औ, विकास

एवं इस मिशन प्रचालन।

मोहम्मद बिन राशिद अंतरिक्ष

केंद्र से हो रहा समापन।

‘होप’ अंतरिक्षयान विकास में

तीन संस्‍थाओं का भी है।

सहयोग जो अमरीका के

तीन बड़े विश्वविद्यालय हैं।

‘होप’ प्रोब अध्ययन करेगी

मंगल की वायुमंडली परता।

के विस्तृत स्वरूप को लेकर

इंतजार है सबको।

ग्रह के दैनिक और सीजनल

मौसम चक्रों का भी अध्ययन।

ग्रह के विभिन्न क्षेत्रों में भी

मौसम का परिवर्तन।

साथ में यह अध्ययन भी शामिल

क्यों ग्रह वायुमंडल है खो रहा।

हाइड्रोजन एवं ऑक्सीजन

अंतरिक्ष में, क्यों यह हो रहा?

तीन उपकरण लगे मिशन में

करने को बहु भाँति परीक्षण।

एक सौ पचास अमराती इंजीनियर

व्यस्त मिशन में लगे हैं हर क्षण।

दूजा मिशन जो हुआ प्रमोचित

टायनवेन-एक इसका नाम।

चीन देश का बड़ा औ पहला

मंगल मिशन, बड़ा सा काम।

तेईस जुलाई दो हजार बीस को

लाँग मार्च-पाँच राकेट द्वारा।

वेनचैंग केंद्र से हुआ प्रमोचन

चीन का यह था मिशन निराला।

चीन की अंतरिक्ष संस्‍था जिसका

‘सी एन एस ए’ नाम कहाता।

‘टायनवेन-एक’ मिशन है उसका

मंगल ग्रह की ओर जो जाता।

मिशन के तीन भाग में शामिल

आरबिटर, लैंडर औ रोवर।

फरवरी दो हजार इक्कीस माह में

पहुँचेंगे ये ग्रह मंगल पर।

मिशन में भेजे गए हैं तेरह

भाँति-भाँति के उपकरणों को।

विभिन्न मापन, प्रेक्षण कार्यों

इनके द्वारा सब करने को।

आरबटिर मंगल ग्रह चक्कर

पहुँच के वहाँ शुरू कर देगी।

लैंडर-रोवर को एक पैरा-

शूट सतह पर उतार देगा।

मिशन का प्रमुख लक्ष्य यह होगा

पता लगाना भूतकाल औ।

वर्तमान में जीवन होने

की संभावना, है आवश्यक जो।

मिशन तलाशेगा जीवन के

इन्हीं प्रमाणों को मंगल पर।

साथ में ग्रह के पर्यावरण की

छानबीन करेगा वहाँ पर।

तीजा मिशन ग्यारह ही दिनों में

जो मंगल ग्रह हुआ प्रमोचित।

‘मार्स-दो हजार बीस’ नाम है

यह भी मिशन बहुत ही यथोचित।

तीस जुलाई, दो हजार बीस को

केप केनेवेरल प्रमोचन केंद्र से।

अटलस-पाँच राकेट के द्वारा

हुआ प्रमोचित सुंदरता से।

मिशन के प्रमुख भाग दो ही हैं

पहला है ‘परसेवेरैंस’ रोवर।

दूजा भी अतिशय विशिष्ट है

नाम ‘इनजेन्युटी’ हेलीकाप्टर।

परसेवेरैंस तो एक बग्‍घी है

जो घूमेगी मंगल ग्रह पर।

इनजेन्युटी तो हेलीकाप्टर

फ्लाई करेगा मंगल ग्रह पर।

रोवर में छे पहिये लगे हैं

तीन मीटर इसकी लंबाई।

दो दशमलव सात मीटर चौड़ाई

दो दशमलव दो मीटर ऊँचाई।

एक सौ दस वाट पावर द्वारा

काम करेगा ऐसा रोवर।

अठारह फरवरी दो हजार इक्कीस

मिशन यह पहुँचेगा मंगल पर।

दस पच्चीस किलोग्राम का

भार वाला यह है रोवर।

जेट प्रॉपल्सन प्रयोगशाला

ने निर्माण किया यह रोवर।

रोवर में एक पाँच जोड़ की

रोबोटिक एक भुजा लगी है।

दो दशमलव एक मीटर जिसकी

लंबाई, पर उपयोगी है।

इस रोबोट भुजा के द्वारा

मंगल ग्रह के भूगर्मीय नमूनों।

का विश्लेषण सतह पे होगा

इसे बड़ी उपलब्धि ही मानो।

मंगल ग्रह के जेजरो क्रेटर

पर उतरेगा मिशन का रोवर।

तिथि होगी दो हजार इक्कीस

अठारह फरवरी के दिन यह।

एक दशमलव आठ किलोग्राम

भार वाला है हेलीकाप्टर।

दो सौ तिहत्तर ग्राम भार की

लगी बैटरी इसके अंदर।

ऐसा पहला मौका होगा

जब हेलीकाप्टर फ्लाई करेगा।

मंगल ग्रह के ऊपर जाकर

एक रिकार्ड की बात बनेगा।

अपनी तीस दिवस की अवधि में

पाँच बार यह फ्लाई करेगा।

मंगल ग्रह की सतह के ऊपर

तकनीकी प्रदर्शन यह होगा।

प्रति उड़ान में तीन सौ मीटर

की दूरी यह कवर करेगा।

अंतरिक्ष के किसी पिंड पर

पहली बार उड़ान भरेगा।

मार्स दो हजार बीस मिशन का

पहला तो उद्देश्य यही है।

आवासीय परिस्थितियाँ कैसी

भूतकाल में इस ग्रह पर रही हैं।

साथ-साथ इस मिशन के द्वारा

भूतकाल का जैविक जीवन।

कैसा था यह पता करेगा

मंगल ग्रह का यही मिशन।

ग्रह की भूगर्भशास्‍त्रीय प्रक्रिया

का भी इसी मिशन के द्वारा।

पता चलेगा ठीक तरह से

भेद खोल देगा यह सारा।

चट्टानों औ, मृदा के सैंपुल

यह संचित कर देगा ग्रह में।

बाद में ‘सैंपुल-रिटर्न’ मिशन से

लाया जाएगा पृथ्वी में।

इसी मिशन के प्राप्त ज्ञान से

भविष्य में योजना बनेगी।

मानवयुक्त मंगल अभियान की

जो मानव की जीत बनेगी।

लैंडिंग क्रेटर जेजेरो चुनने

का भी कारण महत्त्वमय है।

वैज्ञानिक अनुमान बताते

पहले यहाँ एक झील रही है।

तीन दशमलव नौ बिलियन

वर्षों के पहले की है बात।

ढाई सौ मीटर गहरी झील थी

हो गई बहुत पुरानी बात।

आज यहाँ है नदी का डेल्टा

जिसमें पानी बहता रहता।

युगों से, जिसमें तलहट जमता

एक बड़ा संग्रह है बनता।

इस तलहट में शामिल चीजें

कार्बोनेट, हाइड्रेटेड सिलिका।

जो ‘जैविक हस्ताक्षर’ रूप में

एक निभाएँगे प्रमुख भूमिका।

मिशन के द्वारा मंगल सतह पर

एकत्र सैंपुल लाने को।

दो हजार उनतीस में भेजा

जाएगा एक ‘फेच रोवर’ को।

आशा है दो हजार इकतीस

तक सैम्पुल पृथ्वी पहुँचेगा।

फिर सैम्पुल की जाँच बाद

मानवयुक्त मंगल मिशन बनेगा।

अवधि ‘मार्स दो हजार बीस’ की

नियोजित ‘मंगल एक वर्ष’ है।

जिसका मतलब यह भी होता

छे सौ सत्तासी पृथ्वी दिन है।

‘टायनवेन-एक’ मिशन का आरबिटर

जीवनकाल दो पृथ्वी वर्ष।

हुआ नियोजित, पर रोवर की

अवधि है नब्बे मंगल दिवस।

 

के-१०५८, आशियाना कॉलोनी, कानपुर रोड, लखनऊ-२२६०१२ (उ.प्र.)

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—कालीशंकर
 

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