बुरा नहीं मानो तो बेटा

बुरा नहीं मानो तो बेटा

मेरी सर्दी मेरा गीत

सर्दी बहुत है तभी न मम्मी

मैंने जुराब देखो पहनी।

अरे हुई क्या मजेदार जो

मुझे बात वह तुमसे कहनी।

 

देखो मम्मी! यह अँगूठा

कैसे झाँक रहा है बाहर!

जितना करती हूँ मैं अंदर

झट से आ जाता यह बाहर।

 

फटी जुराब से मुँह निकाले

निकल-निकल आता है ऐसे।

खुला देख के खटका चूहा

भागम-भाग मचाता जैसे।

 

झाड़ू, पोंचा, बरतन करके

जब घर पर आऊँगी बेटी।

सबसे पहले इस जुराब को

सी दूँगी मैं सच्ची बेटी।

सेम टू सेम

मम्मी अगर मैं बंदर जैसा

जंप करूँ जो सेम टू सेम,

और अगर मैं बकरी जैसा

मैं-मैं बोलूँ सेम टू सेम?

 

बोलो मम्मी डोगी जैसा

प्यार लड़ाऊँ सेम टू सेम?

और गाय सा बड़े प्यार से

जो  रँभाऊँ सेम टू सेम?

 

अगर मैं बनकर इक गिलहरी

दाना खाऊँ सेम टू सेम?

अगर फूल सा बनकर मैं भी

जो मुसकाऊँ सेम टू सेम?

 

बुरा नहीं मानो तो बेटा

रट छोड़ो अब सेम टू सेम।

क्या कहीं से सीख के आए

नया-नया तुम सेम टू सेम?

दादाजी के देखो दाँत

बचे-खुचे हैं

अब तो मुँह में

दादाजी के

देखो दाँत।

 

पर भोले

हम बच्चों जैसे

दादाजी के

देखो दाँत।

 

देख के खिचड़ी

या फिर हलवा

मचले–मचले

दिखते दाँत।

 

खिल-खिल खिल-खिल

देखो कैसे

हँसने लगते

उनके दाँत।

 

दातुन करते

मंजन करते

रगड़-रगड़कर

करते साफ।

 

बिल्कुल मोती

जैसे चमकें

दादाजी के

देखो दाँत।

हम क्या जानें

अच्छा बच्चो, मिलकर तुमसे

बोलो कैसा लगता होगा?

‘हम क्या जानें, आप बताओ

बोलो कैसा लगता होगा?’

 

लगता जैसे नाव खेलती

लहरों-लहरों से सागर में,

अथवा लगा रहा ज्यों डुबकी

मैं कहानियों के सागर में।

 

अच्छा अब तुम भी तो बोलो

कैसा लगता तुमको मिलकर?

हमें तो लगता जैसे आप

ढेर चुटकुले आओ बनकर।

 

एल. १२०२

ग्रांड अजंता हेरिटेज

सेक्टर-७४, नोएडा-२०१३०१

दूरभाषा : ९९१०१७७०९९

हमारे संकलन