डॉक्टर-स्तुति

डॉक्टर-स्तुति

धन्वंतरि  और अश्विनी कुमार के अवतारस्वरूप डॉक्टरों को हमारा नमन। आपकी कृपा से देश में वृद्धों की जनसंख्या बड़ी है। लोग आशीर्वाद में कहा करते हैं—चिरायु हो, शतायु हो, नीरोग हो, यह सब आपकी सेवा का ही फल है। अब तो कुछ लोग सौ वर्ष की आयु भी पार करने लगे हैं। आप लोगों का इलाज न करते तो क्या इनकी बीमारियाँ दूर हो सकती थीं। आपको तो लोग परमात्मा मानते हैं। आपके आगे-पीछे भागते रहते हैं—डॉक्टर साहब मेरे बेटे को बचा लो, मेरे पति को बचा लो, मेरी पत्नी को बचा लो। आपकी महिमा अपार है।

भगवान् ब्रह्म‍ाजी ने मनुष्य की कल्पना करने से पूर्व आपका निर्माण किया; क्योंकि जहाँ वे जन्म से पूर्व माता के स्तनों में दुग्‍ध पैदा कर देते हैं, वहाँ क्या वे इस बात को भूल जाते कि मनुष्य को अपने जीवन में ऐसे व्यक्ति की सहायता लेनी पड़ेगी, जो उसका जन्म से नहीं, वरन‍् गर्भ से साथ दे और मरणपर्यंत उसकी सेवा करता रहे। डॉक्टर अल्‍ट्रासाउंड (सोनोग्राफी) द्वारा आपको यह भी बता सकता है कि बच्चे की माँ के गर्भ में पुत्र है या पुत्री, परंतु यह जाँच करना अवैध है। डॉक्टर तो पूरे जीवन में आपका सहायक है ही, आपकी मृत्यु के बाद भी वह जब मृत्यु-प्रमाण पत्र देता है तो ही मृत्यु प्रमाणित होती है। डॉक्टर साहब, आप हमारी जाति के जन्म-हितैषी हैं, अतः आपको बारंबार नमस्कार है।

यमराजजी ने मनुष्य को अपने पास बुलाने के लिए अनेक नए-नए रोगों का आविष्कार किया, परंतु आप तो उनसे दो बाँस आगे निकल गए। आपने भी मेडिकल साइंस (विज्ञान) में शोध-कार्य करके रोगों के उपचार के लिए औषधियाँ खोज निकालीं (बना डाली)। आजकल ‘विकासवाद’ के समय डॉक्टर साहब, आपकी बुद्ध‌ि ने भी पूर्ण विकास पाया है। सरस्वती देवी की कृपा से आपने चिकित्सा विज्ञान की सभी विद्याएँ सिद्ध कर ली हैं। आप लोगों का दिल मजबूत करने के लिए एम.बी.बी.एस. की पढ़ाई के प्रथम वर्ष में मुरदा चीरने के लिए दे दिया जाता है। मुरदा चीरते-चीरते आपका हृदय इतना कठोर बन जाता है कि मृत्यु आपके लिए एक साधारण बात हो जाती है। शव-शय्या के पास आपका हृदय तनिक भी विचलित नहीं होता। आप योगी की तरह स्थिर और अचल रहकर फीस की बातचीत करने में जरा भी संकोच नहीं करते। शल्य-चिकित्सा करते समय भी आप विचलित नहीं होते। शल्य-चिकित्सा से पहले मरीज के घरवालों से एक फार्म पर हस्ताक्षर ले लेते हैं कि यदि मरीज की शल्य-चिकित्सा ठीक नहीं हुई और वह भगवान् को प्यारा हो गया तो डॉक्टर की कोई जिम्मेवारी नहीं। शल्य-चिकित्सा से पहले मरीज के घरवालों से फीस आदि के बारे में भी बात करना नहीं भूलते।

डॉक्टर साहब आप, शल्य-चिकित्सा (ऑप्रेशन) करने से पहले मरीज को क्लोरोफार्म (एनेस्‍थीसिया) द्वारा उसपर ऐसा जादू चलाते हैं कि मनुष्य क्या, जानवर भी काष्ठ के समान बन जाता है। उसको काटिए-छाँटिए, पर वह आपके आतंक से चूँ भी नहीं करेगा। मंत्रमुग्‍धता इसी को कहते हैं। आप शरीर के किसी भी अंग को सुन्न कर अपना काम चला लेते हैं ‌और मरीज होश में रहता है। आपकी यह सम्मोहन-कला है, वशीकरण तो आपके बाएँ हाथ का खेल है। आपके रोगीगण सदा वशीभूत होकर आपकी इच्छानुसार रहते हैं। आपकी इच्छा के सामने रोगी की इच्छा भी आपकी इच्छा में विलीन हो जाती है। आपका आदेश मरीज के लिए ब्रह्म‍वाक्य बन जाता है। आप कहेंगे कि यह मत खाना, यह मत पीना और केवल यह-यह खाना है तो ‌बेचारा मरीज चाहकर भी अपनी इच्छा पूरी नहीं कर सकता। आप तो मरीज को पूरा विश्राम करने को कह देते हैं, यहाँ तक कि कभी-कभी चारपाई पर ही कुछ दिन पड़े रहना होगा। बेचारा मरीज बंद कमरे में ठीक होने के दिन गिनता रहता है। आप यह भी परवाह नहीं करते कि मरीज कितना बड़ा नेता या अभिनेता या खिलाड़ी है, उसे कितने ही आवश्यक कार्य हों, उसे आपकी आज्ञा का पालन करना ही पड़ता है। जब तक मरीज पूर्ण स्वस्‍थ न हो जाए, आपकी आज्ञा का पालन करता रहता है। आप सचमुच महान् है, भगवान् के समान हैं, जो अपने मरीज का बड़ा ध्यान रखते हैं।

पहले वैद्य-हकीम मरीज की नब्ज देखकर मर्ज का पता लगा लेते थे, पर अब तो डॉक्टर साहब आप जबतक मरीज की अनेक प्रकार से परीक्षा नहीं कर लेते, इलाज शुरू ही नहीं करते हैं। खून की जाँच, पेशाब की जाँच, मल की जाँच तो साधारण बात है, इससे भी काम नहीं चलता तो अल्ट्रासाउंड, एंड्रोस्कोपी, कोलनस्कोपी, सिटी स्केन, कार्डोग्राम, और न जाने कितनी महँगी जाँच भी कराने से नहीं चूकते। मरीज तो मरीज है, उसका इलाज करानेवाले भी तो मजबूर होते हैं। जो डॉक्टर साहब कहेंगे, करवाना पड़ता है। उसकी जेब में उतने रुपए हैं या नहीं, डॉक्टर नहीं जानते। अब बीमारियाँ भी इतनी नई-नई होने लगी हैं कि बेचारा डॉक्टर भी परेशान हो जाता है। डॉक्टर साहब, आप लोगों में बड़ा सेवाभाव है। मरीज देखते-देखते थकते नहीं, खाना भी समय पर नहीं खा पाते। तभी तो आप मरीज के लिए भगवान् कहलाते हैं। साल भर आपको कॉन्फ्रेंसों में भी जाना होता है, जहाँ आप लोग बहुत व्यस्त हो जाते हैं। ये कॉन्फ्रेंस दवा बनानेवाली कंपनियाँ आयोजित करती हैं। पाँच सितारा होटलों में ठहरने का प्रबंध भी करती हैं। आप लोगों को बड़े-बड़े उपहार भी मिलते हैं। बस आपको उनकी बनी दवाइयाँ मरीज के लिए लिखनी होती हैं। वहाँ अपना शोध-पत्र पढ़ते हैं, ताकि लोग आपके कार्य को जानें, प्रशंसा मिले, पुरस्कार मिलें।

आपके पास जब हम मरीज बनकर इलाज कराने आते हैं तो हमें घंटों प्रतीक्षा करनी होती है अपना नंबर आने के लिए। आपके क्लीनिक में आकर लगता है कि आप हमें अच्छी तरह देखेंगे, हमारी इतनी प्रतीक्षा के बाद, पर आप तो जल्दी-जल्दी हाल पूछकर पाँच मिनट में ही परचे पर दवा लिख देते हैं और जो जाँच करानी होती है, उसे भी लिख देते हैं। आपकी लिखावट ऐसी होती है, ‌जो केवल केमिस्ट ही पढ़ सकता है।

डॉक्टर साहब, आप लोगों ने हम लोगों के इलाज के लिए जो बड़े-बड़े मल्टी स्पेशलिस्‍ट अस्पताल और नर्सिंग होम बनाए हैं, उसमें लाखों-करोड़ों रुपए खर्च किए हैं तो वे सब रुपए हम लोगों से वसूल कर लेते हैं। कभी-कभी आप लोग अपने मरीज पर इतनी कृपा करते हैं कि उसे अपने अस्पताल में या नर्सिंग होम में लंबे समय तक रखने का प्रयत्न करते हैं, ताकि मरीज के घरवाले अस्पताल के चक्कर लगाते रहें और अस्पताल में रहने पर आपका मीटर चलता रहे। कभी-कभी मरीज गंभीर बीमारी के इलाज के लिए जब अस्पताल आता है तो उसे आप आई.सी.यू. में रखते हैं, वहाँ तो मरीज के घरवाले आपकी आज्ञा के बिना मरीज से मिल भी नहीं पाते। आप लोग एक कृपा और भी करते हैं—मरीज जब अंतिम साँस ले रहा होता है, तो उसे वेंटिलेटर पर रखकर कुछ दिन जिंदा रख लेते हैं। इसमें थोड़ा आपका भी लाभ होता है।

आजकल महिलाओं की डिलीवरी सामान्य न होकर ऑपरेशन से ही होने लगी है। कभी-कभी डिलीवरी में विलंब होता है तो लेडी डॉक्टर सलाह देती है कि ऑपरेशन से डिलीवरी कर देते हैं, कोई परेशानी नहीं होगी। बच्चा शुभ मुहूर्त में पैदा हो, शुभ द‌िन हो, यह भी डॉक्टर के हाथ में है। बच्चे की जन्मपत्री उसके पैदा होने के समय पर निर्भर करती है। जन्मपत्री भी बड़ी काम की चीज है, वह मनुष्य का भाग्य बता देती है। विवाह, शादी में भी जन्मपत्री काम आती है तो बच्चे का जन्म कब हो, यह थोड़ा-बहुत लेडी डॉक्टर के हाथ में होता है। लेडी डॉक्टर गर्भवती महिला की केयर टेकर होती है, जब तक डिलीवरी न हो जाए।

डॉक्टर साहब, कभी-कभी आप मरीज को डरा भी देते हैं कि आपको गंभीर बीमारी है। आजकल कैंसर बड़ी खतरनाक बीमारी है, भगवान् न करे किसी को हो जाए। एक महिला को यूट्रस में कुछ परेशानी थी तो उसने एक लेडी डॉक्टर को दिखाया, उसने शक पैदा कर दिया कि कैंसर है। महिला के पति ने एक अन्य अस्पताल में लेडी डॉक्टर को दिखाया, जो जान-पहचान की थी, उन्होंने कुछ टेस्ट कराए तो सब ठीक थे। ऐसे ही मुझे गैस की परेशानी थी। मैं एक गैस्ट्रोलॉजी के डॉक्टर को दिखाने गया तो डॉक्टर ने मुझे खून के कुछ टेस्ट कराने को कहा और कहा कि टेस्ट कराकर दो दिन बाद आप खाली पेट आएँ, आपकी एंड्रोस्कोपी करनी होगी और उसमें कुछ पता नहीं लगा तो कोलनस्कोपी करनी होगी। मैं दो दिन बाद जो खून के टेस्ट बताए थे, वे सब कराकर वहाँ गया। वे ठीक थे, पर डॉक्टर ने पूछा कि खाली पेट आए हैं, आपकी एंड्रोस्कोपी करनी है। मैंने कहा कि मैं खाली पेट नहीं आया। डॉक्टर ने कहा कि आप कल फिर खाली पेट आएँ, मैं आपको ऐसे ही नहीं छोड़ूँगा, पूरा इलाज करूँगा। मैंने अपने एक रिश्तेदार डॉक्टर, जो दिल्ली में एक बड़े अस्पताल में बच्चों की एंड्रोस्कोपी करते हैं, उनकी सलाह ली। उन्होंने कहा कि पहले आप एक स्टूल (टट्टी) का टेस्ट कराओ, य‌द‌ि वह ठीक हुआ तो एंड्रोस्कोपी की आवश्यकता नहीं है। मैंने टेस्ट कराया तो वह ठीक था। मेरे रिश्तेदार डॉक्टर ने मुझे खाने की कुछ दवाई बताई, मैंने दवा खाई तो लाभ हुआ। डॉक्टर साहब, हम आपको इतना मान-सम्मान देते हैं, फिर भी कभी-कभी आप डॉक्टर हमें डरा देते हैं। कुछ शहरों में डॉक्टरों ने अपने एजेंट भी रखे हुए हैं कि उनके पास वे मरीज भेजें कि अमुक डॉक्टर अच्छे हैं, उससे ही इलाज कराओ। आप जिन डॉ. अवस्‍थी को दिखाने जाना चाहते हैं, वे तो अब बूढ़े हो गए हैं, उनके हाथ काँपते हैं। मैं आपको डॉक्टर श्रीवास्तव के पास ले चलता हूँ, जो बहुत तजुर्बेकार हैं, बड़ा नाम है उनका।

आजकल अलग-अलग बीमारियों के अलग-अलग डॉक्टर होते हैं। पहले एक फिजीशियन होता था, एक सर्जन होता था, एक दाँतों का डॉक्टर, एक आँखों का डॉक्टर होता था, परंतु अब शरीर के हर अंग और बीमारियों के डॉक्टर विशेषज्ञ होते हैं। दिल का डॉक्टर कार्डियोलॉजिस्ट, पेट की बीमारी का गैस्ट्रोलॉजिस्ट, हड्डी का ओर्थोपेडिक सर्जन, नसों का न्यूरोलॉजिस्ट आदि-आदि। परमात्मा ने बहुत अच्छा मनुष्य बनाया है, उसके शरीर की देखभाल के लिए अनेक विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी बनाया है। डॉक्टर भी ईश्वर के भेजे गए दूत हैं, जो हमारी देखभाल कर रहे हैं।

डॉक्टर साहब, आप केवल रोगियों को ठीक करके पुण्य नहीं कमा रहे। आप तो समाज को अपनी और भी सेवाएँ दे रहे हैं। जब किसी को सरकारी नौकरी मिलती है तो उससे पहले आप उसका मेडिकल चैकअप करते हैं, आपके द्वारा फिटनेस का सर्टिफिकेट मिल जाने पर ही कोई व्यक्ति नौकरी प्राप्त कर सकता है। किसी को जीवन बीमा कराना हो तो उसका बीमा तभी होता है, जब आप उसे मेडिकली फिट कह देते हैं। इसके अतिरिक्त आपकी आवश्यकता तब भी होती है, जब किसी को मेडिकल लीव लेनी होती है। मनुष्य के जीवित रहते तो आप सेवा करते ही हैं, मृत्यु के बाद भी आपका मृत्यु प्रमाणपत्र परिवारवालों के काम आता है। यदि किसी की मृत्यु संदिग्‍ध कारणों से हो जाए, जैसे लड़ाई-झगड़े, मर्डर या दुर्घटना में तो आपको लाश का पोस्टमार्टम करना होता है। आप कितने कार्य करते हैं समाज और देश के लिए! आप सचमुच महान् हैं। सारा विश्व प्रत्येक वर्ष एक जुलाई को ‘डॉक्टर्स डे’ मनाता है।

‘सबका साथ, सबका विकास’ में भी आपका बड़ा योगदान है। हम सब आपका साथ देते हैं, तभी आप भी पाँच सितारा अस्पताल मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल्स का निर्माण करा पाते हैं। इन अस्पतालों में इलाज कराने के लिए लाखों रुपए मरीज के परिवारवालों को भेंट करने होते हैं। कुछ बड़े अस्पतालों में लिखा रहता है—‘चेरिटेबिल हॉस्पिटल’, पर वहाँ भी मरीज के घरवालों को चेरिटी में बहुत रुपए देने होते हैं। फिर भी आप मरीज के लिए भगवान् ही कहे जाते हैं। समाज में आपका बड़ा मान-सम्मान है। आपको पुनः नमन करती है यह मनुष्य जाति।

ए-३, ओल्ड स्टाफ कॉलोनी

जिंदल स्टेनलेस लि., हिसार-१२५००५ (हरि.)

दूरभाष : ९४१६९९५४२२
—विनोद शंकर गुप्त

हमारे संकलन